
बेंगलुरु: कर्नाटक में सिंचाई और जल संकट से जुड़े मुद्दों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद बसवराज बोम्मई ने किया। बैठक में राज्य में सूखे जैसे हालात, पेयजल संकट और कावेरी जल विवाद से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई।
प्रतिनिधिमंडल में पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद जगदीश शेट्टार, गोविंदा करजोल, विश्वेश्वर हेगड़े कागेरी, पीसी मोहन और पीसी गद्दीगौड़ा समेत कई बीजेपी नेता शामिल थे। नेताओं ने केंद्रीय मंत्री को कर्नाटक में जल उपलब्धता की स्थिति और किसानों व आम लोगों के सामने आ रही परेशानियों से अवगत कराया।
बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए बसवराज बोम्मई ने कहा कि राज्य में कावेरी बेसिन के जलाशयों में मौजूद पानी की मात्रा सीमित है और मौजूदा परिस्थितियों में यह पानी केवल पीने के उद्देश्य के लिए पर्याप्त है। उन्होंने कहा कि राज्य में कई क्षेत्रों में पानी की कमी और सूखे जैसे हालात बने हुए हैं, ऐसे में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती है।
बोम्मई ने कावेरी जल विवाद का मुद्दा उठाते हुए कहा कि तमिलनाडु की ओर से लगातार कर्नाटक पर पानी छोड़ने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह विवाद नया नहीं है, लेकिन मौजूदा जल संकट के दौरान कर्नाटक की वास्तविक स्थिति को मजबूती से रखने की जरूरत है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के सामने कर्नाटक की स्थिति को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि राज्य के प्रतिनिधियों को जल उपलब्धता, जलाशयों की स्थिति और सूखे के प्रभावों को स्पष्ट रूप से सामने रखना चाहिए था।
बोम्मई ने कहा कि कावेरी बेसिन के जलाशयों में उपलब्ध पानी का इस्तेमाल मुख्य रूप से लोगों की पेयजल जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों की जरूरतों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
कावेरी जल विवाद लंबे समय से कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच एक प्रमुख मुद्दा रहा है। दोनों राज्यों के बीच नदी के पानी के बंटवारे को लेकर समय-समय पर विवाद सामने आते रहे हैं। जल वर्षा, जलाशयों में पानी की उपलब्धता और कृषि जरूरतों के आधार पर दोनों राज्यों के बीच मतभेद बढ़ते रहे हैं।
कर्नाटक के बीजेपी नेताओं का कहना है कि इस बार स्थिति सामान्य वर्षों जैसी नहीं है। कम बारिश और जलाशयों में कम पानी के कारण राज्य में जल संकट गहरा रहा है। ऐसे में तमिलनाडु को पानी छोड़ने के फैसलों पर पुनर्विचार की जरूरत है।
प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री के सामने राज्य के किसानों की समस्याओं को भी रखा। नेताओं ने कहा कि सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होने से कृषि क्षेत्र पर असर पड़ रहा है और सरकार को इस दिशा में आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
बीजेपी नेताओं की इस मुलाकात को कावेरी जल मुद्दे पर केंद्र सरकार के सामने कर्नाटक का पक्ष रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी नेताओं ने उम्मीद जताई कि केंद्र राज्य की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उचित कदम उठाएगा।
वहीं, जल विवाद से जुड़े मामलों में राज्य सरकारों की भूमिका और कानूनी प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण रहती है। कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण और अन्य संबंधित संस्थाएं उपलब्ध आंकड़ों, जलाशयों की स्थिति और तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर फैसले लेती हैं।
कर्नाटक के नेताओं का कहना है कि किसी भी फैसले में राज्य के लोगों की पेयजल जरूरतों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने केंद्र से अपील की कि जल संकट की मौजूदा स्थिति को देखते हुए कर्नाटक के हितों की रक्षा की जाए।
बैठक के बाद अब नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार और संबंधित जल प्राधिकरण कावेरी जल वितरण से जुड़े मुद्दे पर आगे क्या कदम उठाते हैं। कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच यह विवाद आने वाले दिनों में भी राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बना रह सकता है।





