कर्नाटक

Karnataka : अलंद दंगा केस सहित 52 आपराधिक मामले वापस लेने की मंजूरी

Kavita2
22 May 2026 11:56 AM IST
Karnataka : अलंद दंगा केस सहित 52 आपराधिक मामले वापस लेने की मंजूरी
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Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक सरकार ने गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में एक अहम फैसला लेते हुए कलबुर्गी जिले के अलंद स्थित लाडले मशक दरगाह दंगा मामले सहित कुल 52 आपराधिक मामलों को वापस लेने की मंजूरी दे दी है। इस निर्णय के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह फैसला विधानसभा अध्यक्ष यू.टी. खादर की लिखित सिफारिश के आधार पर लिया गया है। इस सिफारिश के बाद कैबिनेट ने विवादित मामलों को वापस लेने पर आधिकारिक मुहर लगा दी।

यह मामला कलबुर्गी जिले के अलंद क्षेत्र में स्थित लाडले मशक दरगाह से जुड़ा हुआ है, जहां महाशिवरात्रि 2022 के दौरान राघव चैतन्य शिवलिंग की पूजा को लेकर तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। इस दौरान पत्थरबाजी, पुलिस पर हमले और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाएं सामने आई थीं।

सरकार के इस फैसले के तहत इस घटना से जुड़े कुल 13 केस वापस ले लिए गए हैं। हालांकि, इस कदम पर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

हिंदू संगठनों और विपक्षी दलों ने इस फैसले पर कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि हिंसा और दंगा मामलों में शामिल लोगों के खिलाफ दर्ज केस वापस लेना गलत संदेश देता है। कई संगठनों ने इस निर्णय के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की चेतावनी भी दी है।

इसके अलावा, कैबिनेट ने कन्नड़ समर्थक कार्यकर्ताओं, किसान आंदोलनों और अन्य सामाजिक आंदोलनों से जुड़े मामलों समेत कुल 52 आपराधिक केस वापस लेने का निर्णय भी लिया है। इनमें कई चर्चित आंदोलन और विरोध प्रदर्शन के दौरान दर्ज किए गए मामले शामिल हैं।

सरकार का तर्क है कि कुछ मामलों में लंबे समय से चले आ रहे मुकदमों को खत्म करने और राजनीतिक-सामाजिक तनाव कम करने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया है। वहीं, आलोचकों का मानना है कि इससे कानून-व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस फैसले के बाद राज्य में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ सकता है। विपक्ष ने पहले ही संकेत दिए हैं कि वह इस मुद्दे को लेकर विधानसभा और सड़क दोनों जगह विरोध करेगा।

फिलहाल सरकार के इस निर्णय को लेकर राज्य में बहस तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक तापमान और बढ़ने की संभावना है।

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