
Karnataka कर्नाटक: विभिन्न विभागों के तहत पूरे हो चुके कार्यों के लंबित भुगतान का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कॉन्ट्रैक्टर्स से अपील की है कि राज्य सरकार को लंबित बिलों के भुगतान के लिए तीन महीने का समय दिया जाए।
जानकारी के अनुसार, राज्य के अलग-अलग विभागों में ठेकेदारों के कुल 37,370 करोड़ रुपये से अधिक के बिल लंबे समय से बकाया हैं। इस स्थिति को लेकर ठेकेदारों में चिंता बढ़ रही है और उन्होंने जल्द भुगतान की मांग तेज कर दी है।
इसी मुद्दे को लेकर कर्नाटक स्टेट कॉन्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन (KSCA) का एक प्रतिनिधिमंडल विधान सौध में मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया और उन्हें अपनी मांगों से संबंधित एक ज्ञापन सौंपा।
ठेकेदारों ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि लंबे समय से लंबित बिलों का जल्द से जल्द भुगतान किया जाए, ताकि निर्माण कार्यों में आ रही वित्तीय बाधाओं को दूर किया जा सके। उनका कहना है कि भुगतान में देरी के कारण कई परियोजनाओं पर असर पड़ रहा है और छोटे ठेकेदारों को गंभीर आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
इस पर मुख्यमंत्री ने ठेकेदारों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए कहा कि सरकार इस मुद्दे के समाधान के लिए जल्द ही संबंधित विभागों और वित्त विभाग के अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक करेगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि विकास कार्यों में कोई बाधा न आए, लेकिन साथ ही वित्तीय प्रबंधन को भी संतुलित रखना आवश्यक है।
उन्होंने कॉन्ट्रैक्टर्स से अपील की कि वे सरकार को कुछ समय दें, ताकि सभी लंबित भुगतान व्यवस्थित तरीके से किए जा सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले तीन महीनों के भीतर इस मुद्दे पर ठोस समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
ठेकेदारों का कहना है कि लंबित भुगतान के कारण निर्माण सामग्री की आपूर्ति और श्रमिकों के भुगतान में भी कठिनाइयां आ रही हैं। इससे कई परियोजनाओं की गति धीमी पड़ गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बड़े पैमाने पर लंबित भुगतान का असर राज्य के बुनियादी ढांचे के विकास पर भी पड़ सकता है, इसलिए समय पर समाधान जरूरी है।
कुल मिलाकर, कर्नाटक सरकार और ठेकेदारों के बीच यह मुद्दा अब एक अहम वित्तीय और प्रशासनिक चुनौती बन गया है, जिसके समाधान के लिए आने वाले तीन महीने महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।





