कर्नाटक

Karnataka ; बारिश में 21% की गिरावट, तटीय और मलनाड क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित

Kavita2
16 Jun 2026 10:46 AM IST
Karnataka ; बारिश में 21% की गिरावट, तटीय और मलनाड क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित
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Karnataka कर्नाटक: इस वर्ष मानसून की शुरुआत के बावजूद बारिश में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। 1 जून से अब तक राज्य में कुल वर्षा में 21 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है, जिससे कृषि और जल संसाधनों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने इस साल 4 जून को कर्नाटक के कुछ हिस्सों में मानसून के आगमन की घोषणा की थी। इसके बावजूद शुरुआती दिनों में बारिश सामान्य स्तर से काफी कम रही है।

आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 15 जून के बीच राज्य में औसतन 85.5 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन इस अवधि में केवल 67 मिमी बारिश दर्ज की गई। इस तरह कुल मिलाकर 18.5 मिमी की कमी सामने आई है, जो राज्य में मौसमी असंतुलन को दर्शाती है।

क्षेत्रवार स्थिति पर नजर डालें तो कर्नाटक के तटीय इलाकों और मलनाड क्षेत्र में बारिश की कमी सबसे अधिक दर्ज की गई है। तटीय कर्नाटक में सामान्य वर्षा की तुलना में 41 प्रतिशत की गिरावट देखी गई, जबकि मलनाड क्षेत्र में 36 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इन दोनों क्षेत्रों में मानसून की बारिश सामान्यतः अधिक होती है, लेकिन इस बार बारिश की अनियमितता ने स्थिति को प्रभावित किया है। इसका सीधा असर खेती-बाड़ी, जलाशयों के स्तर और ग्रामीण जीवन पर पड़ सकता है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में बारिश में सुधार नहीं होता है, तो धान, मक्का और अन्य खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हो सकती है। इसके साथ ही जल संकट की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां सिंचाई का प्रमुख स्रोत वर्षा आधारित है।

IMD के अनुसार, मानसून की गतिविधियां फिलहाल असमान बनी हुई हैं और कुछ क्षेत्रों में अच्छी बारिश हो रही है, जबकि अन्य क्षेत्रों में सूखे जैसे हालात बने हुए हैं। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियों में सुधार की संभावना जताई है, लेकिन स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।

राज्य सरकार और संबंधित विभागों ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है और जल प्रबंधन तथा कृषि योजनाओं को लेकर सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और स्थानीय मौसमीय पैटर्न में बदलाव के कारण मानसून का व्यवहार पहले की तुलना में अधिक अस्थिर हो गया है, जिससे इस तरह की असमान वर्षा देखने को मिल रही है।

फिलहाल कर्नाटक में बारिश की कमी चिंता का विषय बनी हुई है, और आने वाले हफ्ते राज्य के लिए काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

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