
Bengaluru बेंगलुरु : देश में बुजुर्ग आबादी पर जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव को लेकर एक नए अध्ययन में गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि बदलते मौसम का असर न केवल बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है, बल्कि मौजूदा देखभाल प्रणालियों की कमियां भी इस समस्या को और बढ़ा रही हैं। विशेष रूप से हीटवेव को सबसे बड़ा जलवायु खतरा बताया गया है।
‘क्लाइमेट रेजिलिएंट एजिंग – सुनिश्चित देखभाल, गरिमा और एजेंसी’ शीर्षक वाली यह रिपोर्ट हेल्पएज इंडिया द्वारा तैयार की गई है। इस अध्ययन के लिए कर्नाटक सहित देश के 10 राज्यों के 20 जिलों में सर्वे किया गया, जिसमें 60 वर्ष से अधिक आयु के 2,224 बुजुर्ग नागरिकों को शामिल किया गया।
रिपोर्ट में पाया गया है कि बढ़ते तापमान और लगातार आने वाली हीटवेव्स के कारण बुजुर्गों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इनमें डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक, हृदय संबंधी परेशानियां और पुरानी बीमारियों का बिगड़ना प्रमुख रूप से शामिल है। विशेषज्ञों के अनुसार, बुजुर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण वे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
अध्ययन में यह भी सामने आया है कि मौजूदा स्वास्थ्य और देखभाल प्रणालियां जलवायु संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए पर्याप्त रूप से तैयार नहीं हैं। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बुजुर्गों के लिए आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाओं और नियमित देखभाल सेवाओं की कमी एक बड़ी समस्या के रूप में उभरी है।
रिपोर्ट के अनुसार, कई बुजुर्ग ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं जहां गर्मी से बचाव के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। कूलिंग सिस्टम, सुरक्षित पेयजल और समय पर चिकित्सा सहायता की कमी उनके लिए खतरा बढ़ा देती है।
इसके अलावा, सामाजिक और आर्थिक कारण भी इस समस्या को और गंभीर बनाते हैं। कई बुजुर्ग अकेले रहते हैं या सीमित आय पर निर्भर हैं, जिससे वे मौसम की चरम स्थितियों से खुद को सुरक्षित रखने में असमर्थ हो जाते हैं।
हेल्पएज इंडिया की रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि बुजुर्गों के लिए जलवायु-संवेदनशील नीतियां बनाई जानी चाहिए, जिसमें स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना, समुदाय आधारित देखभाल व्यवस्था विकसित करना और हीटवेव जैसे खतरों के लिए विशेष अलर्ट सिस्टम तैयार करना शामिल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन अब केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह एक गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है। खासकर बुजुर्गों के लिए यह स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि वे शारीरिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर अधिक असुरक्षित हैं।
रिपोर्ट में सरकार और सामाजिक संगठनों से अपील की गई है कि बुजुर्गों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए और जलवायु अनुकूल स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत किया जाए, ताकि आने वाले समय में बढ़ते तापमान के प्रभाव को कम किया जा सके।





