कर्नाटक

JD(S) के लीगल सेल ने GBA चुनावों को लेकर कर्नाटक के गवर्नर से अर्जी दी

Kavita2
29 April 2026 11:27 AM IST
JD(S) के लीगल सेल ने GBA चुनावों को लेकर कर्नाटक के गवर्नर से अर्जी दी
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Karnataka कर्नाटक: जनता दल (सेक्युलर) यानी JD(S) के लीगल सेल ने मंगलवार को कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत को एक अर्जी सौंपते हुए ग्रेटर बेंगलुरु के चुनावों को जल्द कराने के लिए संवैधानिक हस्तक्षेप की मांग की है। पार्टी ने कहा कि स्थानीय स्तर पर लोकतांत्रिक व्यवस्था को बहाल करने के लिए तत्काल कार्रवाई जरूरी है।

अर्जी में JD(S) ने आरोप लगाया कि वर्तमान स्थिति राज्य में संवैधानिक मशीनरी की विफलता का संकेत देती है। पार्टी का कहना है कि इस मामले को भारत के राष्ट्रपति के संज्ञान में लाया जाना चाहिए, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को दोबारा सुचारू रूप से बहाल किया जा सके।

पार्टी ने अपने पत्र में राज्यपाल को “राज्य की सर्वोच्च संवैधानिक शक्ति” बताते हुए कहा कि यह उनकी जिम्मेदारी है कि सभी संवैधानिक संस्थाएं स्वतंत्र रूप से और संविधान के अनुसार कार्य करें। अर्जी में यह भी कहा गया कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को किसी भी स्थिति में नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।

JD(S) ने आगे मांग की कि राज्यपाल राज्य चुनाव आयोग और राज्य सरकार को आवश्यक निर्देश दें, ताकि संवैधानिक आदेशों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। पार्टी ने यह भी कहा कि यदि संबंधित अधिकारियों द्वारा किसी प्रकार की देरी या अनुपालन में विफलता होती है, तो उसे तुरंत सुधारा जाए।

अर्जी में लिखा गया है कि इस स्थिति में संवैधानिक नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए उचित और आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए। पार्टी का कहना है कि ग्रेटर बेंगलुरु जैसे बड़े शहरी क्षेत्र में स्थानीय निकाय चुनावों में देरी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है।

JD(S) ने यह भी कहा कि चुनावों में देरी से जनता के प्रतिनिधित्व का अधिकार प्रभावित होता है और स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था कमजोर होती है। पार्टी ने इसे गंभीर संवैधानिक मुद्दा बताते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से कर्नाटक की राजनीति में नई बहस शुरू हो सकती है, खासकर तब जब स्थानीय निकाय चुनाव लंबे समय से लंबित हैं। ग्रेटर बेंगलुरु क्षेत्र में चुनाव कराना प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

JD(S) की इस मांग के बाद अब सभी की नजर राज्य सरकार और राज्यपाल के अगले कदम पर टिकी है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस मामले में संवैधानिक और प्रशासनिक स्तर पर क्या निर्णय लिया जाता है।

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