कर्नाटक

KPCC बदलाव पर जारकीहोली का बयान, फैसला हाईकमान का

Kavita2
1 Jun 2026 10:48 AM IST
KPCC बदलाव पर जारकीहोली का बयान, फैसला हाईकमान का
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Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन के बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के पुनर्गठन को लेकर तेज हो रही राजनीतिक चर्चाओं के बीच वरिष्ठ नेता सतीश जारकीहोली ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए खुद को पार्टी का वफादार और अनुशासित कार्यकर्ता बताया है। उन्होंने कहा कि संगठन में किसी भी महत्वपूर्ण पद पर नियुक्ति का अंतिम निर्णय पूरी तरह से पार्टी हाईकमान के हाथ में है।

जारकीहोली ने स्पष्ट किया कि उन्होंने इस विषय पर कांग्रेस नेतृत्व से कोई विशेष बातचीत नहीं की है, क्योंकि फिलहाल हाईकमान सरकार गठन और उससे जुड़ी महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रक्रियाओं में व्यस्त है। उन्होंने कहा कि इस समय संगठनात्मक नियुक्तियों पर चर्चा प्राथमिकता नहीं है।

उन्होंने उन अटकलों को भी सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि KPCC के भीतर शीर्ष पदों के लिए लॉबिंग की जा रही है। जारकीहोली ने दोहराया कि उन्होंने किसी भी पद के लिए कोई मांग नहीं रखी है और वे पार्टी के निर्णय का पूरी तरह सम्मान करते हैं।

अपने बयान में उन्होंने कहा, “मैंने कोई मांग नहीं रखी है। पार्टी के नज़रिए से, मेरा प्रेसिडेंट बनना ज़रूरी नहीं है। हाईकमान कोई भी फ़ैसला लेगा। फ़ैसला आख़िरी होगा।” उनके इस बयान को पार्टी के भीतर अनुशासन और एकता बनाए रखने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद से जुड़े बदलाव के बाद राजनीतिक हलचल तेज है और पार्टी नेतृत्व राज्य सरकार तथा संगठन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। कांग्रेस हाईकमान पर दबाव है कि वह राज्य संगठन को मजबूत करने के लिए जल्द से जल्द KPCC के ढांचे को स्पष्ट करे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि KPCC अध्यक्ष की नियुक्ति आने वाले चुनावों से पहले पार्टी के पावर स्ट्रक्चर को आकार देने में अहम भूमिका निभा सकती है। यह फैसला न केवल संगठनात्मक संतुलन को प्रभावित करेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर पार्टी की चुनावी रणनीति को भी दिशा देगा।

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, संगठन में संभावित बदलावों को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा जारी है, लेकिन अंतिम निर्णय हाईकमान द्वारा ही लिया जाएगा। ऐसे में नेताओं के सार्वजनिक बयान पार्टी के भीतर अनुशासन और एकजुटता को बनाए रखने के प्रयास के रूप में देखे जा रहे हैं।

जारकीहोली के इस बयान को यह संदेश देने के रूप में भी देखा जा रहा है कि वे संगठनात्मक विवादों या पदों की दौड़ से दूर रहकर पार्टी लाइन का पालन करना चाहते हैं। इससे यह भी संकेत मिलता है कि कांग्रेस नेतृत्व फिलहाल किसी भी जल्दबाजी में बड़ा संगठनात्मक बदलाव करने के मूड में नहीं है।

कुल मिलाकर, KPCC रीस्ट्रक्चरिंग को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच सतीश जारकीहोली का यह बयान पार्टी के भीतर संतुलन, अनुशासन और हाईकमान की निर्णायक भूमिका को रेखांकित करता है।

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