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PRS स्टडी: 2025 में असेंबली बैठकों में ओडिशा सबसे आगे, कर्नाटक में सबसे ज्यादा बिल पास

Kavita2
1 Jun 2026 10:11 AM IST
PRS स्टडी: 2025 में असेंबली बैठकों में ओडिशा सबसे आगे, कर्नाटक में सबसे ज्यादा बिल पास
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Delhi दिल्ली: PRS लेजिस्लेटिव रिसर्च की एक नई स्टडी के अनुसार वर्ष 2025 में देशभर की राज्य विधानसभाओं की औसतन बैठक अवधि 24 दिन रही। इस अध्ययन में राज्यों की विधायी गतिविधियों, बैठकों की संख्या और पारित विधेयकों का विस्तृत विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट का नाम ‘Annual Review of State Laws 2025’ है, जिसे रविवार को जारी किया गया।

स्टडी के मुताबिक, बैठकों की कुल अवधि के मामले में ओडिशा सबसे आगे रहा, जहां विधानसभा 43 दिनों तक चली। इसके बाद तमिलनाडु में 39 दिन, महाराष्ट्र में 38 दिन, हिमाचल प्रदेश में 35 दिन और कर्नाटक में 34 दिन की बैठकें दर्ज की गईं। यह आंकड़े राज्यों की विधायी सक्रियता और नीतिगत चर्चाओं की तीव्रता को दर्शाते हैं।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कर्नाटक ने अपनी 34 बैठकों के दौरान सबसे अधिक 84 विधेयक पारित किए, जो देश में किसी भी राज्य द्वारा पारित किए गए बिलों में सबसे ज्यादा हैं। यह दर्शाता है कि कम बैठकों के बावजूद कर्नाटक की विधानसभा में विधायी कार्य तेजी से आगे बढ़ा।

वहीं दूसरी ओर, नागालैंड में सबसे कम केवल 7 बैठकें हुईं, जबकि उत्तराखंड में 10 बैठकें दर्ज की गईं। इन आंकड़ों से राज्यों के बीच विधानसभा गतिविधियों में बड़े अंतर को भी उजागर किया गया है।

स्टडी में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ राज्यों ने संवैधानिक आवश्यकता को पूरा करने के लिए छोटे-छोटे सत्र बुलाए। संविधान के अनुसार, किसी भी राज्य विधानसभा के दो सत्रों के बीच छह महीने से अधिक का अंतर नहीं होना चाहिए। इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए असम, गुजरात, राजस्थान और मेघालय जैसे राज्यों ने सीमित अवधि के सत्र आयोजित किए।

रिपोर्ट के अनुसार, कई राज्यों में विधायी कार्यों की संख्या और बैठकों की अवधि में संतुलन देखने को मिला, जबकि कुछ राज्यों में कम बैठकों के बावजूद अधिक विधेयक पारित किए गए। यह अंतर राज्यों की राजनीतिक प्राथमिकताओं और प्रशासनिक कार्यशैली को दर्शाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि विधानसभा बैठकों की संख्या और उनकी गुणवत्ता दोनों ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण हैं। नियमित और पर्याप्त बैठकें न केवल नीतियों पर चर्चा को बढ़ावा देती हैं, बल्कि विधायी पारदर्शिता को भी मजबूत करती हैं।

PRS स्टडी ने यह भी संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में राज्यों को अपनी विधायी बैठकों की नियमितता और प्रभावशीलता दोनों पर ध्यान देने की आवश्यकता होगी, ताकि शासन प्रक्रिया और अधिक मजबूत हो सके।

कुल मिलाकर, यह रिपोर्ट देशभर की राज्य विधानसभाओं की कार्यप्रणाली और उनकी विधायी सक्रियता की एक स्पष्ट तस्वीर पेश करती है।

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