
Karnataka कर्नाटक: बेंगलुरु सिटी सिविल कोर्ट ने आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और अभिनेता पवन कल्याण से जुड़े एक मामले में बड़ा अंतरिम आदेश जारी किया है। अदालत ने उनके खिलाफ भूमि अतिक्रमण के आरोपों से संबंधित झूठी और अपमानजनक खबरों के प्रसार पर रोक लगाते हुए मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों को निर्देश जारी किए हैं।
यह आदेश शहर के XVI अतिरिक्त सिटी सिविल और सत्र न्यायालय द्वारा 11 जून को पारित किया गया। अदालत ने विभिन्न मीडिया हाउसों, डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया कंपनियों को पवन कल्याण के खिलाफ किसी भी प्रकार की अपमानजनक सामग्री को प्रकाशित करने, पुनः प्रकाशित करने, प्रसारित करने, अपलोड करने या प्रदर्शित करने से अस्थायी रूप से रोक दिया है।
इसके साथ ही अदालत ने टेक कंपनियों को भी सख्त निर्देश दिए हैं। आदेश के अनुसार, Google, Meta और X को ऐसे वीडियो, पोस्ट और लिंक को तुरंत हटाने के लिए कहा गया है, जो इस मामले से संबंधित अपमानजनक या मानहानिकारक सामग्री फैलाते हैं। यह अंतरिम आदेश 24 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई तक प्रभावी रहेगा।
पवन कल्याण द्वारा दायर मूल मुकदमे की सुनवाई के दौरान अदालत ने यह आदेश पारित किया। अपनी याचिका में पवन कल्याण ने आरोप लगाया था कि विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया चैनलों पर उनके खिलाफ मानहानिकारक और झूठी सामग्री प्रसारित की जा रही है, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंच रहा है।
याचिका में उन्होंने यह भी मांग की थी कि इस तरह की सामग्री के प्रकाशन और प्रसार पर रोक लगाई जाए तथा पहले से प्रकाशित आपत्तिजनक सामग्री को तत्काल हटाया जाए। अदालत ने प्रारंभिक सुनवाई के आधार पर यह माना कि मामले में तत्काल राहत की आवश्यकता है, जिसके चलते यह अंतरिम निषेधाज्ञा जारी की गई।
अदालत के आदेश के बाद संबंधित डिजिटल प्लेटफार्मों पर इस मामले से जुड़े कई लिंक और वीडियो हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह आदेश डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया पर मानहानि से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा सकता है, जहां अदालत ने तत्काल प्रभाव से सामग्री हटाने के निर्देश दिए हैं।
फिलहाल यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है और 24 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई में इस पर आगे की कार्यवाही की जाएगी।





