
बेंगलुरु: बेंगलुरु में प्रस्तावित टनल रोड प्रोजेक्ट को लेकर राजनीतिक और कानूनी हलचल तेज हो गई है। बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने कहा है कि हाई कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि टनल रोड निर्माण के लिए कॉन्ट्रैक्ट देने की प्रक्रिया उनकी ओर से दायर जनहित याचिका (PIL) के अंतिम फैसले के अधीन रहेगी।
बेंगलुरु दक्षिण लोकसभा क्षेत्र से सांसद तेजस्वी सूर्या ने राज्य सरकार की टनल रोड परियोजना को चुनौती देते हुए कर्नाटक हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। इस मामले की सुनवाई के लिए वह गुरुवार को अदालत में मौजूद रहे। सुनवाई के बाद उन्होंने कहा कि अदालत के रुख से साफ है कि परियोजना से जुड़ी आगे की कार्रवाई न्यायालय के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगी।
टनल रोड परियोजना राज्य सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य बेंगलुरु शहर में बढ़ते यातायात दबाव को कम करना बताया जा रहा है। सरकार का तर्क है कि भूमिगत मार्ग बनने से सड़कों पर भीड़ कम होगी और यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलेगी।
हालांकि, इस परियोजना को लेकर पर्यावरण, लागत, यातायात प्रबंधन और पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर सवाल उठाए गए हैं। तेजस्वी सूर्या ने अपनी याचिका में परियोजना से जुड़े विभिन्न पहलुओं को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
सांसद का कहना है कि इतने बड़े स्तर की बुनियादी ढांचा परियोजना शुरू करने से पहले सभी जरूरी पहलुओं का गहराई से मूल्यांकन किया जाना चाहिए। उन्होंने परियोजना की प्रक्रिया और उससे जुड़े निर्णयों को लेकर सवाल उठाते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले से जुड़े पक्षों को सुना और परियोजना की कानूनी स्थिति पर विचार किया। तेजस्वी सूर्या के अनुसार, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि टनल रोड के लिए ठेका देने की प्रक्रिया जनहित याचिका के अंतिम निपटारे के अधीन रहेगी।
इस घटनाक्रम के बाद अब परियोजना की आगे की प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। राज्य सरकार की ओर से अभी इस मामले में विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
बेंगलुरु देश के सबसे तेजी से बढ़ते महानगरों में शामिल है और यहां यातायात जाम लंबे समय से बड़ी समस्या बना हुआ है। शहर की बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के कारण मौजूदा सड़कों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। इसी को देखते हुए सरकार ने टनल रोड जैसे विकल्पों पर काम शुरू किया है।
समर्थकों का कहना है कि इस तरह की परियोजनाएं शहर के यातायात नेटवर्क को बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं। वहीं, विरोध करने वालों का तर्क है कि इतनी बड़ी परियोजनाओं में पर्यावरणीय प्रभाव, खर्च और लंबे समय के लाभों का आकलन जरूरी है।
तेजस्वी सूर्या ने इससे पहले भी बेंगलुरु के विकास और शहरी बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दों को उठाया है। इस मामले में उनकी याचिका के बाद अब परियोजना की कानूनी स्थिति हाई कोर्ट के अंतिम फैसले से तय होगी।
फिलहाल हाई कोर्ट में सुनवाई जारी है और टनल रोड प्रोजेक्ट को लेकर अंतिम निर्णय आना बाकी है। अदालत के फैसले के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि परियोजना की प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ेगी।
इस बीच, बेंगलुरु के नागरिकों और राजनीतिक दलों की नजरें इस मामले पर बनी हुई हैं, क्योंकि टनल रोड को शहर की भविष्य की यातायात व्यवस्था से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है।





