
बेंगलुरु। कर्नाटक के राज्यपाल थावर चंद गहलोत ने मंत्री बी. नागेंद्र का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। आधिकारिक नोटिफिकेशन के अनुसार, राज्यपाल ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की सिफारिश पर यह कदम उठाया है। नागेंद्र ने कथित कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम घोटाले को लेकर विपक्ष के निशाने पर आने के बाद शुक्रवार को मंत्री पद से इस्तीफा सौंप दिया था।
राज्यपाल की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि मुख्यमंत्री की सिफारिश को स्वीकार करते हुए संविधान के अनुच्छेद 164(1) के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए बी. नागेंद्र का कैबिनेट से इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया जाता है।
29 अगस्त को जारी हुआ था नोटिफिकेशन
बी. नागेंद्र के इस्तीफे को स्वीकार करने से संबंधित आधिकारिक अधिसूचना 29 अगस्त को जारी की गई थी, जिसे रविवार को मीडिया के सामने लाया गया।
नोटिफिकेशन में राज्यपाल थावर चंद गहलोत ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री की सिफारिश के आधार पर योजना और सांख्यिकी मंत्री बी. नागेंद्र का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।
इसके साथ ही नागेंद्र का मंत्री पद औपचारिक रूप से समाप्त हो गया।
वाल्मीकि निगम घोटाले को लेकर घिरे थे नागेंद्र
बी. नागेंद्र कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर विपक्ष के निशाने पर थे।
विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर राज्य सरकार पर लगातार हमला बोला और मंत्री की जिम्मेदारी तय करने की मांग की थी।
आरोप लगाया गया था कि निगम से जुड़े धन के लेन-देन में गड़बड़ी हुई है। हालांकि, मामले की जांच जारी है और आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा।
इस्तीफे के बाद राजनीतिक दबाव बढ़ा
कथित घोटाले को लेकर बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच नागेंद्र ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को अपना इस्तीफा सौंप दिया था।
उनका इस्तीफा ऐसे समय आया जब विपक्ष इस मामले को लेकर सरकार पर लगातार सवाल उठा रहा था।
कांग्रेस सरकार के लिए भी यह मामला राजनीतिक रूप से चुनौती बन गया था, जिसके बाद नागेंद्र ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने का फैसला किया।
कैबिनेट में वापसी के 25 दिन बाद छोड़ा पद
बी. नागेंद्र का इस्तीफा इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि उन्होंने शिवकुमार के नेतृत्व वाली कैबिनेट में दोबारा शामिल होने के करीब 25 दिन बाद ही पद छोड़ दिया।
इससे पहले उन्हें सरकार में फिर से जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन वाल्मीकि निगम मामले को लेकर विवाद बढ़ने के बाद उन्हें मंत्री पद से हटना पड़ा।
कांग्रेस सरकार पर विपक्ष का हमला
नागेंद्र के इस्तीफे के बाद विपक्षी दलों ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा। विपक्ष का कहना है कि मामले में केवल इस्तीफा पर्याप्त नहीं है, बल्कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
वहीं, कांग्रेस सरकार का कहना है कि जांच प्रक्रिया जारी है और कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
जांच एजेंसियां कर रही हैं मामले की जांच
वाल्मीकि निगम मामले में जांच एजेंसियां सक्रिय हैं। मामले से जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की जांच की जा रही है।
जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित अनियमितताओं में किन लोगों की भूमिका रही और धन का इस्तेमाल किस तरह किया गया।
नागेंद्र का राजनीतिक सफर
बी. नागेंद्र कर्नाटक की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। वह राज्य सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।
मंत्री पद से इस्तीफा देने के बावजूद वह अपनी राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहेंगे। हालांकि, आगे उनकी भूमिका और पार्टी की रणनीति पर सभी की नजर बनी हुई है।
आगे की कार्रवाई पर नजर
राज्यपाल द्वारा इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद अब सरकार के सामने मंत्रिमंडल में बदलाव और विभागों के पुनर्वितरण की चुनौती होगी।
वहीं, वाल्मीकि निगम घोटाले की जांच का परिणाम इस पूरे मामले की दिशा तय करेगा।
फिलहाल बी. नागेंद्र का इस्तीफा कर्नाटक की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। विपक्ष इसे सरकार पर दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल कर रहा है, जबकि कांग्रेस इसे जांच प्रक्रिया का हिस्सा बता रही है।





