कर्नाटक

भर्ती घोटाले में फंसे IAS अधिकारी सरकार ने दी मुकदमे की मंजूरी

Ratna Netam
24 Oct 2026 2:38 PM IST
भर्ती घोटाले में फंसे IAS अधिकारी सरकार ने दी मुकदमे की मंजूरी
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बेंगलुरु। कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित भ्रष्टाचार और बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के मामले में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने शनिवार को निलंबित आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति देने की घोषणा की। सरकार के इस फैसले से भर्ती घोटाले की जांच कर रही एजेंसियों को आगे की कानूनी कार्रवाई करने का रास्ता साफ होने की उम्मीद है।मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया कि सरकार युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि सरकारी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना उनकी सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
भ्रष्टाचारियों को नहीं मिलेगा संरक्षण
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने अपने बयान में कहा कि राज्य सरकार ने सार्वजनिक भर्ती प्रणाली की विश्वसनीयता को प्रभावित करने वाले भ्रष्टाचार को बेहद गंभीरता से लिया है। उन्होंने दोहराया कि प्रशासन में भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं है और दोषियों को किसी भी प्रकार का संरक्षण नहीं दिया जाएगा।उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरियों की तैयारी करने वाले लाखों युवाओं की उम्मीदें निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी होती हैं। ऐसे में भर्ती परीक्षाओं में भ्रष्टाचार केवल प्रशासनिक अनियमितता नहीं, बल्कि योग्य उम्मीदवारों के भविष्य के साथ अन्याय भी है।मुख्यमंत्री ने शासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और ईमानदारी बनाए रखने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उनका कहना था कि प्रशासन की छवि खराब करने और आम जनता के विश्वास को कमजोर करने वाली गतिविधियों के प्रति कोई नरमी नहीं दिखाई जाएगी।
CID और ED कर रही हैं मामले की जांच
कर्नाटक लोक सेवा आयोग से जुड़े कथित भर्ती घोटाले की जांच राज्य की क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रहे हैं।मामले में भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र और उत्तर कथित तौर पर चुनिंदा उम्मीदवारों तक पहुंचाने के आरोप सामने आए हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरे मामले में किन अधिकारियों, बिचौलियों और अन्य व्यक्तियों की भूमिका रही।इससे पहले सीआईडी ने ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार के खिलाफ अभियोजन की अनुमति मांगी थी। जांच में भ्रष्टाचार और धनशोधन से जुड़े पहलुओं को भी खंगाला जा रहा है।
जनवरी 2024 से मार्च 2026 तक परीक्षा नियंत्रक रहे गंगवार
ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार कर्नाटक कैडर के 2016 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। वह जनवरी 2024 से मार्च 2026 तक KPSC में परीक्षा नियंत्रक के पद पर तैनात थे।जांच एजेंसियों के अनुसार, पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र कथित तौर पर कुछ अभ्यर्थियों को पहले ही उपलब्ध करा दिए गए थे। इस मामले में बिचौलियों के माध्यम से उम्मीदवारों से लाखों रुपये लेने के आरोप भी सामने आए हैं।अगस्त 2026 में गंगवार की गिरफ्तारी हुई थी। इसके बाद सितंबर में कर्नाटक सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया था।
मुकदमा चलाने का रास्ता साफ
शनिवार को दी गई अभियोजन मंजूरी भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 218 के तहत जारी की गई है। इससे संबंधित जांच एजेंसियों को कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी।हालांकि, अभियोजन की मंजूरी का अर्थ अधिकारी का दोषी साबित होना नहीं है। आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होगा।इस मामले ने प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सरकार के फैसले के बाद अब जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई और अदालत की कार्यवाही पर अभ्यर्थियों की नजर रहेगी।
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