
गदग। कर्नाटक के गदग जिले से लापता हुए कर्नाटक रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट लिमिटेड (KRIDL) के सहायक कार्यकारी अभियंता (AEE) परवेज धारवाड़ आखिरकार करीब 40 दिनों बाद महाराष्ट्र के मुंबई में मिल गए हैं। सरकारी अनुदान जारी नहीं होने और ठेकेदारों के कथित दबाव से परेशान होकर उन्होंने एक पत्र छोड़ा था, जिसमें आत्महत्या से जुड़े संकेत भी थे। इसके बाद अचानक लापता होने से परिवार और प्रशासन में चिंता बढ़ गई थी। पुलिस की पांच विशेष टीमें लगातार उनकी तलाश कर रही थीं। आखिरकार मुंबई में उनका पता चलने के बाद पुलिस ने उन्हें अपनी निगरानी में ले लिया है।
परवेज धारवाड़ सितंबर के मध्य से लापता थे। उनके परिवार ने 16 सितंबर को गदग के बेटगेरी पुलिस थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद पुलिस ने कई राज्यों में तलाश शुरू की। शुक्रवार, 23 अक्टूबर को मुंबई में उनका पता चलने की पुष्टि हुई। अब पुलिस उनसे पूछताछ कर यह जानने का प्रयास करेगी कि वह इतने दिनों तक कहां रहे और अचानक गायब होने की वजह क्या थी।
बेंगलुरु जाने की बात कहकर निकले थे घर से
जानकारी के अनुसार, 34 वर्षीय परवेज धारवाड़ गदग में केआरआईडीएल के सहायक कार्यकारी अभियंता के रूप में पदस्थ थे।
13 सितंबर को उन्होंने अपने परिवार को बताया था कि वह विभागीय बैठक में शामिल होने के लिए बेंगलुरु जा रहे हैं। इसके बाद वह घर से निकल गए।
परिवार के अनुसार, शुरुआत में उनसे संपर्क हुआ था, लेकिन बाद में उनका मोबाइल फोन बंद आने लगा।
जब परिवार ने संबंधित अधिकारियों से जानकारी ली, तो पता चला कि जिस बैठक में शामिल होने की बात कहकर वह निकले थे, उसमें उनकी उपस्थिति की पुष्टि नहीं हुई।
इसके बाद परिवार की चिंता बढ़ गई। लगातार संपर्क नहीं होने पर 16 सितंबर को पुलिस में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई गई।
कार्यालय में मिला था चिंताजनक पत्र
परवेज धारवाड़ के लापता होने के बाद उनके कार्यालय से एक पत्र मिलने की जानकारी सामने आई थी।
इस पत्र में उन्होंने सरकारी अनुदान जारी नहीं होने के कारण विकास कार्यों के भुगतान लंबित रहने की बात कही थी।
उन्होंने आरोप लगाया था कि बकाया भुगतान को लेकर ठेकेदार और उपठेकेदार लगातार उन पर दबाव बना रहे थे।
पत्र में यह भी उल्लेख था कि कुछ लोग भुगतान की मांग को लेकर उनके कार्यालय और घर तक पहुंच रहे थे, जिससे वह मानसिक रूप से परेशान थे।
पत्र में आत्महत्या से जुड़े संकेत मिलने के कारण परिवार और पुलिस की चिंता और बढ़ गई थी।
हालांकि, पुलिस को बाद में उनके जीवित होने के संकेत मिले और तलाश जारी रखी गई।
छह करोड़ रुपये के भुगतान का मामला
इस प्रकरण में सरकारी विकास कार्यों के लिए जारी होने वाली राशि का मुद्दा भी सामने आया है।
परवेज धारवाड़ ने अपने पत्र में दावा किया था कि लगभग छह करोड़ रुपये से संबंधित विकास कार्य पूरे किए जा चुके थे, लेकिन उनके भुगतान के लिए आवश्यक राशि उपलब्ध नहीं कराई गई थी।
उनका कहना था कि अनुदान नहीं मिलने के कारण ठेकेदारों का भुगतान लंबित था।
इस वजह से संबंधित ठेकेदार कथित तौर पर लगातार भुगतान की मांग कर रहे थे।
उन्होंने विभागीय अधिकारियों से लंबित राशि जारी करने और उनकी जगह किसी अन्य सहायक कार्यकारी अभियंता को नियुक्त करने का अनुरोध भी किया था।
इन आरोपों की स्वतंत्र विभागीय पुष्टि और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच आवश्यक है।
तलाश के लिए बनाई गई थीं पांच पुलिस टीमें
मामले की गंभीरता को देखते हुए गदग पुलिस ने परवेज धारवाड़ को खोजने के लिए पांच विशेष टीमें गठित की थीं।
इन टीमों को पुलिस अधीक्षक मिथुन एच.एन. की निगरानी में अलग-अलग स्थानों पर भेजा गया।
पुलिस ने रेलवे स्टेशनों, संभावित ठिकानों और विभिन्न शहरों में उनकी गतिविधियों के सुराग तलाशे।
शुरुआती जांच में उनके मोबाइल फोन की लोकेशन आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में मिली थी।
हालांकि, बाद में फोन बंद हो गया, जिससे पुलिस के लिए उनकी लोकेशन पता करना मुश्किल हो गया।
इसके बाद जांच टीमों ने तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज की मदद से तलाश आगे बढ़ाई।
भोपाल रेलवे स्टेशन के कैमरे में दिखे थे
परवेज की तलाश के दौरान पुलिस को मध्य प्रदेश के भोपाल रेलवे स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज से महत्वपूर्ण सुराग मिला था।
सितंबर के अंतिम दिनों में सामने आए फुटेज में परवेज जैसे दिखाई देने वाले व्यक्ति की पहचान की गई।
इसके आधार पर पुलिस ने भोपाल और आसपास के क्षेत्रों में तलाश शुरू की।
इसके अलावा महाराष्ट्र के मिरज सहित अन्य स्थानों पर भी उनकी खोज की गई।
लेकिन लगातार प्रयासों के बावजूद पुलिस उन्हें तत्काल नहीं ढूंढ सकी।
इस दौरान उनका मोबाइल फोन बंद रहने से पुलिस को तकनीकी निगरानी में भी परेशानी हुई।
मुंबई में मिला सुराग, पुलिस ने लिया निगरानी में
करीब 40 दिनों की तलाश के बाद पुलिस को महाराष्ट्र के मुंबई में परवेज धारवाड़ के होने की जानकारी मिली।
गदग पुलिस की टीम ने वहां पहुंचकर उनका पता लगाया और उन्हें अपनी निगरानी में ले लिया।
प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, शुक्रवार 23 अक्टूबर को उनके मिलने की जानकारी सामने आई थी। पुलिस ने शनिवार 24 अक्टूबर को उन्हें गदग लाकर पूछताछ करने की तैयारी की।
अधिकारियों के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि परवेज इतने दिनों तक किन स्थानों पर रहे और उन्होंने परिवार तथा विभाग से संपर्क क्यों नहीं किया।
पुलिस उनके यात्रा मार्ग और इस दौरान संपर्क में रहे लोगों के बारे में भी जानकारी जुटा सकती है।
परिवार को मिली बड़ी राहत
परवेज के जीवित मिलने की खबर उनके परिवार के लिए राहत लेकर आई है।
लापता होने के बाद परिवार लगातार उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित था।
विशेष रूप से उनके द्वारा छोड़े गए पत्र के कारण परिवार को किसी अनहोनी की आशंका थी।
करीब डेढ़ महीने तक उनका पता नहीं चलने से परिवार की परेशानी बनी हुई थी।
अब उनके मिलने के बाद परिवार को लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता से राहत मिली है।
हालांकि, वह किन परिस्थितियों में इतने दिनों तक परिवार से दूर रहे, इसका जवाब पुलिस पूछताछ के बाद ही स्पष्ट होगा।
सरकार पर भी उठे थे सवाल
परवेज धारवाड़ के लापता होने के बाद मामला राजनीतिक चर्चा का विषय भी बना था।
विपक्षी नेताओं ने सरकारी अनुदान जारी नहीं होने और ठेकेदारों के भुगतान लंबित रहने के आरोपों को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए थे।
भाजपा नेता आर. अशोक ने दावा किया था कि यह घटना सरकारी विभागों में भुगतान संबंधी समस्याओं को उजागर करती है।
दूसरी ओर, ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री ईश्वर खंड्रे ने परिवार से बातचीत कर आवश्यक सहायता का भरोसा दिलाया था।
उन्होंने लंबित भुगतान से जुड़ी समस्याओं पर भी ध्यान देने की बात कही थी।
पुलिस पूछताछ में सामने आ सकते हैं नए तथ्य
परवेज धारवाड़ के मिल जाने से गुमशुदगी के मामले में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, लेकिन कई सवालों के जवाब अभी बाकी हैं।
पुलिस यह जानने की कोशिश करेगी कि वह इतने लंबे समय तक अलग-अलग शहरों में क्यों घूमते रहे।
इसके अलावा उनके पत्र में लगाए गए दबाव और मानसिक उत्पीड़न के आरोपों की भी जांच की जा सकती है।
यह भी स्पष्ट किया जाना बाकी है कि संबंधित निर्माण कार्यों का कितना भुगतान वास्तव में लंबित था और विभाग ने इस मामले में क्या कार्रवाई की थी।
फिलहाल परवेज के मुंबई में सुरक्षित मिलने की जानकारी से परिवार को राहत मिली है। अब पुलिस पूछताछ और विभागीय जांच के बाद ही पूरे घटनाक्रम के पीछे की वास्तविक परिस्थितियां सामने आ सकेंगी।





