
बेल्लारी। कर्नाटक के बेल्लारी जिले के कोलूर गांव में पुरातात्विक महत्व की चार दुर्लभ प्राचीन जैन मूर्तियां मिलने से क्षेत्र के धार्मिक और सांस्कृतिक इतिहास को लेकर नई जानकारियां सामने आई हैं। ये मूर्तियां मध्यकालीन युग से जुड़ी बताई जा रही हैं और इनके मिलने से कर्नाटक में जैन धर्म की समृद्ध परंपरा और ऐतिहासिक प्रभाव पर नई रोशनी पड़ने की उम्मीद है।
जानकारी के अनुसार, इन प्राचीन मूर्तियों की खोज विजयनगर के श्री कृष्णदेवराय विश्वविद्यालय की विजयनगर साम्राज्य अनुसंधान टीम द्वारा किए गए फील्ड अध्ययन के दौरान हुई। शोधकर्ताओं की टीम क्षेत्र में ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थलों का अध्ययन कर रही थी, इसी दौरान कोलूर गांव की खेती वाली जमीन पर इन मूर्तियों के अवशेष मिले।
शोध टीम के अनुसार, ये चारों मूर्तियां कोलूर गांव के अलग-अलग हिस्सों में मिली हैं। इनमें से एक मूर्ति दक्षिण-पूर्व दिशा में, दूसरी उत्तर-पूर्व दिशा में, तीसरी दक्षिण-पश्चिम दिशा में और चौथी उत्तर-पश्चिम दिशा में मिली। यह स्थान बेल्लारी शहर से करीब 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
पुरातत्व विशेषज्ञों का मानना है कि इन मूर्तियों का संबंध क्षेत्र में कभी मौजूद जैन धार्मिक गतिविधियों से हो सकता है। मूर्तियों की शैली, निर्माण तकनीक और अन्य विशेषताओं का अध्ययन किया जा रहा है, जिससे इनके सही कालखंड और ऐतिहासिक महत्व का पता लगाया जा सके।
कर्नाटक का इतिहास धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता से भरा रहा है। यहां जैन धर्म का प्रभाव प्राचीन काल से रहा है और कई क्षेत्रों में जैन मंदिरों, प्रतिमाओं और शिलालेखों के प्रमाण मिलते रहे हैं। बेल्लारी और आसपास के इलाकों में भी जैन परंपरा के कई ऐतिहासिक प्रमाण मौजूद हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, मध्यकालीन समय में दक्षिण भारत के कई हिस्सों में जैन धर्म का व्यापक प्रभाव था। व्यापारिक केंद्रों, राजवंशों और स्थानीय समुदायों के सहयोग से जैन धर्म से जुड़े धार्मिक स्थल विकसित हुए। ऐसे में कोलूर में मिली मूर्तियां इस ऐतिहासिक परंपरा की महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती हैं।
शोधकर्ताओं की टीम अब इन मूर्तियों का विस्तृत अध्ययन करने की तैयारी कर रही है। इसके तहत मूर्तियों पर मौजूद कलात्मक विशेषताओं, निर्माण शैली और संभावित शिलालेखों की जांच की जाएगी। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि इनका निर्माण किस काल में हुआ और इनका उपयोग किस धार्मिक उद्देश्य के लिए किया जाता था।
पुरातात्विक खोजों में किसी भी प्राचीन मूर्ति का मिलना केवल धार्मिक महत्व तक सीमित नहीं होता, बल्कि इससे उस क्षेत्र के सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक इतिहास को समझने में भी मदद मिलती है। कोलूर में मिली इन मूर्तियों से क्षेत्र में जैन समुदाय की मौजूदगी और उनकी गतिविधियों के बारे में नई जानकारी मिलने की संभावना है।
स्थानीय लोगों के लिए भी यह खोज आकर्षण का विषय बन गई है। ग्रामीणों का कहना है कि खेती वाली जमीन पर इतनी पुरानी मूर्तियों का मिलना क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व को दर्शाता है। अब लोगों को उम्मीद है कि इस स्थल का संरक्षण किया जाएगा और इसे भविष्य में अध्ययन और पर्यटन के लिहाज से विकसित किया जा सकता है।
श्री कृष्णदेवराय विश्वविद्यालय की अनुसंधान टीम द्वारा की गई यह खोज कर्नाटक की पुरातात्विक विरासत को और समृद्ध करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी खोजें इतिहास के उन पहलुओं को सामने लाती हैं, जो अब तक कम ज्ञात रहे हैं।
फिलहाल इन मूर्तियों की वैज्ञानिक और ऐतिहासिक जांच जारी है। जांच के बाद इनके कालखंड, निर्माण शैली और धार्मिक महत्व को लेकर अधिक स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी।
कोलूर गांव में मिलीं ये चार जैन मूर्तियां केवल पत्थर की प्रतिमाएं नहीं हैं, बल्कि ये कर्नाटक के प्राचीन धार्मिक इतिहास और सांस्कृतिक विरासत की महत्वपूर्ण धरोहर हैं। इनकी खोज से क्षेत्र के इतिहास को समझने के लिए एक नया अध्याय जुड़ गया है।





