कर्नाटक

कर्नाटक ट्रेजरी दफ्तरों पर लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई, रिश्वत के आरोपों में जांच तेज

Kavita2
13 Aug 2026 12:36 PM IST
कर्नाटक ट्रेजरी दफ्तरों पर लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई, रिश्वत के आरोपों में जांच तेज
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बेंगलुरु। जनता की शिकायतों के बाद कर्नाटक लोकायुक्त ने ट्रेजरी विभाग के कई दफ्तरों पर एक साथ बड़ी कार्रवाई की। बिलों के भुगतान में देरी और फंड मंजूरी की प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए लोकायुक्त की अलग-अलग टीमों ने राजधानी बेंगलुरु के कई ट्रेजरी कार्यालयों में अचानक छापेमारी की। इस कार्रवाई के बाद विभाग में हड़कंप मच गया।

लोकायुक्त अधिकारियों को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि सरकारी बिलों के निपटारे में अनावश्यक देरी की जा रही है और भुगतान प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए कथित रूप से रिश्वत की मांग की जा रही है। इन शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए लोकायुक्त ने जांच अभियान शुरू किया और कई प्रमुख ट्रेजरी कार्यालयों को निशाने पर लिया।

कार्रवाई के तहत लोकायुक्त बी.एस. पाटिल की अगुवाई वाली टीम ने हुजूर स्थित राज्य ट्रेजरी कार्यालय में छापा मारा। वहीं, लोकायुक्त के.एन. फनिंद्र की टीम ने KGID, V.V. टॉवर समेत अन्य ट्रेजरी कार्यालयों की जांच की। इसके अलावा लोकायुक्त बी. वीरप्पा की टीम ने मल्लेश्वरम, येलाहंका और बेंगलुरु उत्तर क्षेत्र के अन्य ट्रेजरी दफ्तरों में पहुंचकर दस्तावेजों और कामकाज की जांच की।

लोकायुक्त ADGP मनीष खरभिकर के नेतृत्व वाली टीम ने शहर की रेवेन्यू बिल्डिंग स्थित ट्रेजरी कार्यालय में कार्रवाई की। अधिकारियों ने कार्यालयों में मौजूद रिकॉर्ड, भुगतान से जुड़े दस्तावेज और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली की जांच की।

जांच के दौरान लोकायुक्त टीम को कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं। अधिकारियों के अनुसार, कार्रवाई के दौरान यह भी सामने आया कि लोकायुक्त के कार काफिले से जुड़े ड्राइवरों से भी कथित तौर पर रिश्वत ली गई थी। इस खुलासे ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

बताया गया कि हुजूर ट्रेजरी कार्यालय में कार्यरत फर्स्ट क्लास असिस्टेंट कृष्णा ने लोकायुक्त न्यायमूर्ति बी.एस. पाटिल की पायलट गाड़ी के ड्राइवर से 3,000 रुपये की रिश्वत ली थी। यह मामला सामने आने के बाद लोकायुक्त अधिकारियों ने विभागीय भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच को और तेज कर दिया है।

लोकायुक्त अधिकारियों ने कहा कि सरकारी कार्यालयों में आम लोगों और कर्मचारियों से जुड़े कामों को समय पर पूरा करना जरूरी है। अगर किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा रिश्वत की मांग की जाती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

ट्रेजरी विभाग सरकार की वित्तीय व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां से सरकारी कर्मचारियों, विभागों और विभिन्न योजनाओं से जुड़े भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाती है। ऐसे में यदि भुगतान में देरी या भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आती हैं तो इसका सीधा असर सरकारी व्यवस्था और आम लोगों पर पड़ता है।

लोकायुक्त की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी पहल के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि कितने स्तर पर अनियमितताएं हुईं और किन-किन कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध है।

जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या रिश्वत लेने का मामला केवल कुछ कर्मचारियों तक सीमित था या फिर इसमें कोई बड़ा नेटवर्क शामिल है। इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि किन-किन बिलों और भुगतान मामलों में देरी की गई और इसके पीछे क्या कारण थे।

लोकायुक्त की टीमों ने छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेजों और अन्य जानकारियों को जांच के लिए सुरक्षित कर लिया है। आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी।

इस कार्रवाई के बाद ट्रेजरी विभाग के कर्मचारियों में भी सतर्कता बढ़ गई है। लोकायुक्त ने स्पष्ट संकेत दिया है कि सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है और भ्रष्टाचार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

कर्नाटक में लोकायुक्त की यह कार्रवाई सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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