कर्नाटक
कर्नाटक में पहली बार विधान सौधा की सीढ़ियों पर सजेगा उर्दू हब्बा
Ratna Netam
30 Sept 2026 8:19 PM IST

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बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार 9 नवंबर को ‘उर्दू दिवस’ के अवसर पर विधान सौधा की भव्य सीढ़ियों पर राज्य का पहला ‘उर्दू हब्बा’ आयोजित करने जा रही है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य उर्दू भाषा, साहित्य, संस्कृति, विरासत, खानपान और विभिन्न कला रूपों को राज्य के सभी समुदायों के सामने एक बड़े सार्वजनिक मंच पर प्रस्तुत करना है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण, हज और वक्फ मंत्री यू.टी. खादर ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि सरकार इस आयोजन को केवल साहित्यिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि इसे व्यापक सांस्कृतिक उत्सव के रूप में विकसित करेगी।
यू.टी. खादर ने ‘कर्नाटक पर्व 2026’ के चौथे दिन उर्दू समाचार पत्रों के प्रतिनिधियों से बातचीत के दौरान इस कार्यक्रम की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विधान सौधा परिसर में अलग-अलग सरकारी विभागों और क्षेत्रों से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, इसलिए उर्दू भाषा और साहित्य से जुड़ा बड़ा कार्यक्रम भी इसी प्रतिष्ठित स्थान पर आयोजित किया जा सकता है। इसी सोच के आधार पर 9 नवंबर को ‘उर्दू हब्बा’ आयोजित करने का फैसला लिया गया है।
सरकार का कहना है कि यह कर्नाटक में अपनी तरह का पहला सरकारी आयोजन होगा, जिसमें विधान सौधा की सीढ़ियों को उर्दू भाषा और संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें साहित्यकारों, कलाकारों, लेखकों, उर्दू भाषा से जुड़े संगठनों और विभिन्न सांस्कृतिक समूहों की भागीदारी की योजना है।
मंत्री खादर के मुताबिक उर्दू हब्बा का उद्देश्य केवल उर्दू बोलने वाले लोगों के लिए कार्यक्रम आयोजित करना नहीं है। इसे अलग-अलग समुदायों के बीच भाषा और संस्कृति को साझा करने वाले मंच के रूप में तैयार किया जाएगा। सरकार चाहती है कि जो लोग उर्दू भाषा से सीधे तौर पर जुड़े नहीं हैं, वे भी उसके साहित्य, कला, संगीत और खानपान से परिचित हो सकें।
प्रस्तावित कार्यक्रम में उर्दू किताबों की प्रदर्शनी और पुस्तक मेले को भी शामिल करने की योजना है। उर्दू साहित्य की पुरानी और नई किताबों, कविता, कहानी, उपन्यास और अन्य साहित्यिक रचनाओं को लोगों के सामने लाया जाएगा। इसके जरिए युवा पीढ़ी को भी उर्दू साहित्य से जोड़ने की कोशिश की जाएगी।
इसके अलावा कार्यक्रम में उर्दू से जुड़ी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की जाएंगी। इनमें मुशायरा, संगीत, कला प्रदर्शन और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल हो सकते हैं। आयोजकों की योजना उर्दू भाषा की साहित्यिक विरासत के साथ-साथ उससे जुड़े विभिन्न कला रूपों को एक ही मंच पर प्रस्तुत करने की है।
उर्दू हब्बा में खानपान को भी खास जगह दी जाएगी। अलग-अलग क्षेत्रों की उर्दू भाषी सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े व्यंजनों को फूड फेस्टिवल के रूप में पेश करने की योजना है। इससे कार्यक्रम को केवल साहित्यिक आयोजन के बजाय एक व्यापक सांस्कृतिक उत्सव के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
यू.टी. खादर ने कहा कि उर्दू भाषा और साहित्य का कर्नाटक की सांस्कृतिक विविधता में महत्वपूर्ण स्थान है। राज्य में बड़ी संख्या में लोग उर्दू बोलते और पढ़ते हैं, जबकि कई क्षेत्रों में उर्दू साहित्य और कला की पुरानी परंपरा मौजूद है। ऐसे में इस भाषा की सांस्कृतिक विरासत को एक सार्वजनिक मंच पर प्रस्तुत करना अलग-अलग समुदायों के बीच संवाद बढ़ाने का माध्यम भी बन सकता है।
सरकार की योजना है कि कार्यक्रम में उर्दू के प्रमुख लेखकों, कवियों और कलाकारों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा साहित्य, पत्रकारिता और कला के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को भी मंच देने पर विचार किया जा रहा है।
9 नवंबर को दुनियाभर में उर्दू भाषा और उसके साहित्यिक योगदान को लेकर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कर्नाटक सरकार इसी अवसर को राज्य स्तर पर बड़े आयोजन के रूप में मनाने जा रही है। विधान सौधा जैसी प्रतिष्ठित जगह पर कार्यक्रम आयोजित होने के कारण इसे प्रतीकात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विधान सौधा कर्नाटक की राजनीतिक और प्रशासनिक पहचान का प्रमुख केंद्र है। यहां राज्य विधानसभा और सरकार से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित होते हैं। इसकी सीढ़ियों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी समय-समय पर आयोजित किए जाते रहे हैं। उर्दू हब्बा को यहां आयोजित करने के पीछे सरकार का उद्देश्य भाषा को मुख्यधारा के सार्वजनिक सांस्कृतिक मंच से जोड़ना बताया गया है।
कार्यक्रम में किताबों, संगीत, कविता और कला के अलावा उर्दू से जुड़े ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहलुओं को भी प्रदर्शित किए जाने की संभावना है। सरकार चाहती है कि लोग केवल भाषा के रूप में नहीं बल्कि उससे जुड़े पूरे सांस्कृतिक संसार को समझ सकें।
यू.टी. खादर ने कहा कि कार्यक्रम सभी समुदायों के लोगों के लिए खुला रखने की योजना है। इसका उद्देश्य किसी एक समूह तक सीमित आयोजन करना नहीं, बल्कि कर्नाटक की बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक पहचान को सामने लाना है। उन्होंने कहा कि राज्य की विविध भाषाओं और परंपराओं को सार्वजनिक मंच देना सरकार की सांस्कृतिक नीति का हिस्सा है।
इस आयोजन के जरिए उर्दू के युवा लेखकों और कलाकारों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल सकता है। सरकार विभिन्न साहित्यिक और सांस्कृतिक संगठनों के साथ मिलकर कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार कर रही है।
फिलहाल कार्यक्रम की विस्तृत समय-सारणी और इसमें हिस्सा लेने वाले प्रमुख साहित्यकारों तथा कलाकारों की पूरी सूची जारी नहीं की गई है। आने वाले दिनों में आयोजन से जुड़ी अधिक जानकारी सार्वजनिक किए जाने की उम्मीद है।
9 नवंबर को विधान सौधा की सीढ़ियों पर होने वाला ‘उर्दू हब्बा’ भाषा, साहित्य, कला, खानपान और सांस्कृतिक विरासत को एक साथ प्रस्तुत करने वाला बड़ा आयोजन होगा। राज्य सरकार इसे उर्दू भाषा को व्यापक समाज तक पहुंचाने और कर्नाटक की सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करने वाले मंच के रूप में तैयार कर रही है।
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