कर्नाटक

बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट पर किसानों की सीएम से मुलाकात

Kavita2
26 Aug 2026 10:13 AM IST
बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट पर किसानों की सीएम से मुलाकात
x

बेंगलुरु। विवादित 7,000 एकड़ के बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट से जुड़ी जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया को लेकर मंगलवार को किसानों के 25 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से मुलाकात की। बैठक में किसानों ने प्रस्तावित परियोजना और जमीन अधिग्रहण को लेकर अपनी आपत्तियां मुख्यमंत्री के सामने रखीं। चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने किसानों को भरोसा दिलाया कि सरकार किसी भी किसान को उसकी जमीन छोड़ने के लिए मजबूर नहीं करेगी।

किसान प्रतिनिधिमंडल में चुक्की नंजुंदास्वामी, बडगलपुर नागेंद्र, टी. यशवंत, नूर श्रीधर और एस.आर. हिरेमथ सहित कई किसान नेता शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के सामने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों और किसानों की चिंताओं को विस्तार से रखा। बैठक का मुख्य केंद्र यह रहा कि बिदादी टाउनशिप परियोजना के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण में किसानों की सहमति और उनके हितों को किस तरह सुरक्षित रखा जाएगा।

बैठक के बाद किसानों ने बताया कि उन्होंने अपनी मांगों और चिंताओं को मुख्यमंत्री के सामने स्पष्ट रूप से रखा। किसानों का कहना था कि परियोजना के लिए बड़े पैमाने पर जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया से प्रभावित होने वाले परिवारों की स्थिति और उनकी आपत्तियों पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। किसानों ने जमीन को केवल संपत्ति के रूप में नहीं, बल्कि अपनी आजीविका और भविष्य से जुड़े संसाधन के रूप में देखने की बात कही।

किसान नेताओं के अनुसार, वे अपनी मांगों को लेकर विधान सौधा का घेराव करने की योजना बना रहे थे। हालांकि, मुख्यमंत्री के साथ बैठक का समय तय होने के बाद इस कार्यक्रम को छोड़ दिया गया। किसानों ने कहा कि जब मुख्यमंत्री से सीधे बातचीत का अवसर मिला तो उन्होंने विरोध प्रदर्शन के बजाय वार्ता के माध्यम से अपनी बात रखने को प्राथमिकता दी।

बैठक में मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने किसानों को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार किसी को भी अपनी जमीन छोड़ने के लिए मजबूर नहीं करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार जमीन के लिए डी-नोटिफिकेशन का आदेश जारी करने की कोशिश भी नहीं करेगी। मुख्यमंत्री के इस आश्वासन को किसानों और सरकार के बीच बातचीत के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बिदादी टाउनशिप परियोजना से जुड़ा जमीन अधिग्रहण लंबे समय से किसानों और सरकार के बीच चर्चा का विषय रहा है। करीब 7,000 एकड़ भूमि से संबंधित परियोजना के कारण प्रभावित होने वाले किसानों के बीच चिंता बनी हुई है। किसानों की मुख्य चिंता यह है कि बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण होने की स्थिति में उनकी आजीविका, कृषि गतिविधियों और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।

किसान प्रतिनिधियों ने सरकार से यह सुनिश्चित करने की मांग की कि परियोजना के नाम पर किसी भी किसान पर दबाव न बनाया जाए। उनका कहना है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसानों को अपनी जमीन के संबंध में निर्णय लेने का पूरा अधिकार मिलना चाहिए। बैठक में प्रतिनिधिमंडल ने इसी मुद्दे को प्रमुखता से उठाया।

मुख्यमंत्री की ओर से दिया गया आश्वासन इस विवाद में आगे की बातचीत का आधार बन सकता है। सरकार की ओर से किसी किसान को जमीन छोड़ने के लिए मजबूर नहीं करने की बात कहे जाने के बाद किसानों ने भी वार्ता के रास्ते को खुला रखा है। हालांकि, परियोजना से जुड़े सभी मुद्दों का अंतिम समाधान किस तरह होगा, यह आगे होने वाली चर्चा और सरकार की नीतिगत कार्रवाई पर निर्भर करेगा।

किसान नेताओं की मौजूदगी में हुई बैठक ने यह भी स्पष्ट किया कि परियोजना को लेकर विरोध केवल व्यक्तिगत स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न किसान संगठनों और नेताओं ने इसे सामूहिक मुद्दे के रूप में उठाया है। चुक्की नंजुंदास्वामी, बडगलपुर नागेंद्र, टी. यशवंत, नूर श्रीधर और एस.आर. हिरेमथ जैसे किसान नेताओं की भागीदारी ने बैठक को महत्वपूर्ण बना दिया।

विधान सौधा के घेराव की योजना वापस लेने का फैसला भी सरकार और किसानों के बीच बातचीत के लिए बने माहौल को दर्शाता है। किसान नेताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री के साथ सीधे संवाद का अवसर मिलने के बाद उन्होंने टकराव के बजाय चर्चा को प्राथमिकता दी। इससे संकेत मिलता है कि किसान अपनी मांगों को सरकार के सामने बातचीत के माध्यम से रखने के लिए तैयार हैं, लेकिन जमीन से जुड़े मुद्दों पर उनका रुख अब भी स्पष्ट है।

बिदादी टाउनशिप परियोजना के लिए प्रस्तावित जमीन अधिग्रहण का मुद्दा आगे भी राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण बना रह सकता है। इतने बड़े क्षेत्र में परियोजना प्रस्तावित होने के कारण भूमि, किसानों के अधिकार और विकास के बीच संतुलन बनाना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण होगा। एक तरफ शहरी और औद्योगिक विकास से जुड़ी योजनाओं को आगे बढ़ाने की जरूरत है, वहीं दूसरी ओर कृषि भूमि और उस पर निर्भर परिवारों के हितों की रक्षा भी जरूरी है।

मंगलवार की बैठक के बाद फिलहाल किसानों को मुख्यमंत्री की ओर से मिले आश्वासन से बातचीत का रास्ता खुला है। किसानों ने अपनी आपत्तियां और मांगें सामने रख दी हैं, जबकि मुख्यमंत्री ने जमीन छोड़ने के लिए किसी पर दबाव नहीं डालने की बात कही है। अब आगे की प्रक्रिया में सरकार किस तरह किसानों की चिंताओं को शामिल करती है और बिदादी टाउनशिप परियोजना से जुड़े भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर क्या कदम उठाती है, इस पर सभी की नजर रहेगी।

किसानों और सरकार के बीच हुई यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 7,000 एकड़ के प्रस्तावित टाउनशिप प्रोजेक्ट से जुड़े भूमि विवाद को लेकर तनाव के बीच संवाद की शुरुआत हुई है। फिलहाल किसान नेताओं ने अपना विरोध दर्ज कराने के साथ बातचीत का विकल्प खुला रखा है और सरकार ने भी किसानों को उनकी जमीन को लेकर आश्वस्त किया है। आने वाले दिनों में इस मामले में होने वाली अगली बैठकों और सरकारी फैसलों से विवाद की दिशा स्पष्ट होगी।

Next Story