
Karnataka कर्नाटक: ग्रामीण विकास और पंचायत राज मंत्री ईश्वर खंड्रे ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि MGNREGA योजना के तहत केंद्र और राज्य के बीच फंडिंग अनुपात को 80:20 किया जाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान 60:40 की व्यवस्था राज्यों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रही है।
पत्रकारों से बातचीत में ईश्वर खंड्रे ने बताया कि UPA सरकार ने वर्ष 2006 में MGNREGA लागू किया था, जिसमें केंद्र सरकार 90 प्रतिशत और राज्य सरकार 10 प्रतिशत खर्च वहन करती थी। उन्होंने कहा कि उस समय यह मॉडल ग्रामीण रोजगार सुनिश्चित करने के लिए अधिक प्रभावी था।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में NDA सरकार की ओर से लागू 60:40 फंडिंग पैटर्न के कारण राज्यों को अधिक वित्तीय दबाव झेलना पड़ रहा है। खंड्रे ने कहा कि इस व्यवस्था को या तो पुराने 90:10 अनुपात पर वापस लाया जाए या फिर कम से कम 80:20 तक बढ़ाया जाए, ताकि राज्यों पर बोझ कम हो सके और योजना प्रभावी ढंग से चलती रहे।
मंत्री ने यह भी कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की स्थिति पहले ही चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने बताया कि कृषि कार्यों में मशीनों के बढ़ते उपयोग के कारण भूमिहीन और गरीब मजदूरों के लिए काम के अवसर कम हो रहे हैं। ऐसे में MGNREGA ही ग्रामीण परिवारों के लिए महत्वपूर्ण सहारा बनकर सामने आती है।
ईश्वर खंड्रे ने केंद्र सरकार के उस रुख पर भी सवाल उठाया जिसमें वर्ष में 60 दिनों के रोजगार की सीमा का प्रस्ताव रखा गया है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था न तो व्यावहारिक है और न ही टिकाऊ, क्योंकि ग्रामीण मजदूर बड़ी संख्या में इस योजना पर निर्भर हैं।
उन्होंने मांग की कि रोजगार की गारंटी को सीमित करने के बजाय इसे मजबूत किया जाए, ताकि जरूरतमंद लोगों को साल भर काम मिल सके। खंड्रे ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए MGNREGA जैसी योजनाओं का विस्तार जरूरी है, न कि उसे सीमित करना।
मंत्री ने यह भी कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय से ही योजना का सही लाभ ग्रामीण जनता तक पहुंच सकता है। उन्होंने केंद्र से अपील की कि वे राज्यों की वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए फंडिंग मॉडल में सुधार करें।
विशेषज्ञों का मानना है कि MGNREGA देश के ग्रामीण रोजगार ढांचे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसके फंडिंग पैटर्न में बदलाव का सीधा असर राज्यों की आर्थिक स्थिति और रोजगार उपलब्धता पर पड़ सकता है।





