कर्नाटक

सूखे पर PM से मिलेंगे डीके शिवकुमार

Kavita2
24 Sept 2026 1:37 PM IST
सूखे पर PM से मिलेंगे डीके शिवकुमार
x

बेंगलुरु। कर्नाटक में कमजोर मानसून और सूखे जैसी परिस्थितियों के बीच मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने केंद्र सरकार से मदद की मांग की है। उन्होंने कहा कि राज्य के 200 से अधिक तालुका सूखे जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं, फसलों को व्यापक नुकसान हुआ है और भूजल स्तर गिरने के कारण पानी तथा बिजली की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ी है। हालांकि आधिकारिक रूप से सूखाग्रस्त घोषित तालुकों की संख्या अभी 200 से कम है और सरकार चरणबद्ध आकलन के बाद सूची बढ़ा रही है।

अपने सदाशिवनगर स्थित आवास के पास मीडिया से बातचीत में शिवकुमार ने कहा कि राज्य सरकार सूखे से राहत के मुद्दे को केंद्र के सामने मजबूती से रखेगी। उन्होंने बताया कि सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल दिल्ली जाएगा और प्रधानमंत्री से मुलाकात के लिए समय मांगा गया है। उनका कहना था कि राज्य में मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए पहले अंतरिम राहत मिलनी चाहिए और विस्तृत आकलन के बाद अतिरिक्त सहायता पर फैसला किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सूखे की स्थिति का सरकारी स्तर पर अध्ययन कराया जा रहा है। राज्य सरकार के मुताबिक अलग-अलग चरणों में तालुकों का आकलन किया जा रहा है। उपमुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने 20 सितंबर को बताया था कि पहले चरण में 101 तालुका सूखाग्रस्त घोषित किए गए और दूसरे चरण में 24 अन्य तालुका जोड़े गए। इसके बाद 52 और तालुकों को शामिल किए जाने की प्रक्रिया चल रही थी। करीब 50 अतिरिक्त तालुकों में जमीनी आकलन के बाद निर्णय लिया जाना है।

सरकार का अनुमान है कि यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद सूखे से प्रभावित घोषित तालुकों की संख्या 200 के पार पहुंच सकती है। मुख्यमंत्री शिवकुमार भी इससे पहले कह चुके हैं कि राज्य के 239 तालुकों में से 200 से अधिक में सूखे जैसी परिस्थितियां बनी हुई हैं।

बारिश की कमी का सबसे अधिक असर कृषि क्षेत्र पर दिखाई दे रहा है। कई क्षेत्रों में फसलों को नुकसान पहुंचा है, जबकि कुछ स्थानों पर पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण बुआई भी प्रभावित हुई। सितंबर के मध्य तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मानसून सीजन में राज्य में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई थी। 11 सितंबर तक कर्नाटक में 742 मिलीमीटर की सामान्य बारिश के मुकाबले करीब 487 मिलीमीटर बारिश हुई थी, यानी लगभग 34 प्रतिशत की कमी थी।

सूखे के कारण भूजल स्तर में गिरावट भी सरकार की चिंता बढ़ा रही है। आने वाले महीनों में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना राज्य के सामने बड़ी चुनौती हो सकती है। सरकार का कहना है कि पानी की कमी का असर केवल ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शहरी क्षेत्रों में भी पेयजल प्रबंधन पर दबाव बढ़ सकता है।

पानी की कमी का प्रभाव बिजली उत्पादन पर भी पड़ने की आशंका है। जलाशयों में पर्याप्त पानी नहीं होने से जलविद्युत उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसके साथ ही बिजली की मांग बढ़ने से राज्य को दूसरे स्रोतों से बिजली खरीदने की आवश्यकता पड़ रही है।

सितंबर के मध्य में मुख्यमंत्री ने बताया था कि राज्य में पीक बिजली मांग 19 हजार मेगावाट से ऊपर पहुंच गई थी। उस समय कर्नाटक को करीब 11 से 13 रुपये प्रति यूनिट की दर पर अतिरिक्त बिजली खरीदने की स्थिति का सामना करना पड़ा था। सरकार पड़ोसी और अन्य राज्यों से बिजली खरीदने सहित वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर विचार कर रही है।

मुख्यमंत्री ने मौजूदा सूखे को केवल राज्य सरकार का विषय नहीं बताते हुए केंद्र से सहयोग की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि कर्नाटक को सहायता उपलब्ध कराना प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है। यह मुख्यमंत्री का राजनीतिक और प्रशासनिक आग्रह है, जिस पर केंद्र की ओर से राहत राशि का फैसला निर्धारित आपदा राहत मानकों और आकलन प्रक्रिया के आधार पर किया जाएगा।

राज्य सरकार इस मुद्दे पर विपक्ष को भी साथ लेने की कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि विपक्षी दलों के नेता और राज्य के सांसद कर्नाटक के हित में केंद्र से राहत दिलाने में सहयोग करेंगे। सरकार सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के माध्यम से सूखे की स्थिति, किसानों को हुए नुकसान और पानी-बिजली की समस्या को केंद्र के सामने रखने की तैयारी कर रही है।

उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर के मुताबिक पहले चरण में सूखाग्रस्त घोषित 101 तालुकों में करीब 18 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। राज्य ने पहले ज्ञापन में केंद्र से लगभग 3,500 करोड़ रुपये की राहत मांगी है। आगे अन्य तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किए जाने के बाद नुकसान का आकलन कर दूसरा और तीसरा ज्ञापन भी भेजे जाने की योजना है।

सरकार की सबसे बड़ी चिंता किसानों को तत्काल राहत पहुंचाने की है। बारिश की कमी के कारण फसल खराब होने से किसानों की आय प्रभावित हुई है। इसके अलावा जलस्रोतों में कमी से अगली फसल और पशुओं के लिए पानी की उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है।

सूखे की गंभीरता को देखते हुए कर्नाटक विधानसभा के विशेष सत्र में भी इस मुद्दे पर चर्चा रखी गई। सरकार ने कहा है कि वह विपक्षी दलों के सुझावों को भी शामिल करते हुए केंद्र सरकार के सामने राज्य की मांग रखेगी।

फिलहाल सरकार की नजर सूखा प्रभावित क्षेत्रों के जमीनी आकलन और केंद्र से मिलने वाली सहायता पर है। मुख्यमंत्री शिवकुमार ने तत्काल अंतरिम राहत की जरूरत बताई है, जबकि विस्तृत सर्वेक्षण पूरा होने के बाद अतिरिक्त सहायता की मांग की जाएगी। राज्य सरकार का कहना है कि कमजोर मानसून के कारण किसानों के साथ-साथ पेयजल और बिजली आपूर्ति पर भी दबाव बढ़ा है और इससे निपटने के लिए केंद्र तथा राज्य के बीच समन्वय जरूरी है।

Next Story