कर्नाटक

SIR प्रक्रिया पर डीके शिवकुमार के सवाल फॉर्म 7 मामलों में FIR की मांग

Ratna Netam
1 Oct 2026 6:38 PM IST
SIR प्रक्रिया पर डीके शिवकुमार के सवाल फॉर्म 7 मामलों में FIR की मांग
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बेंगलुरु। कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन यानी SIR को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने गुरुवार को राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अनबुकुमार से मुलाकात कर बड़ी संख्या में फॉर्म-7 जमा किए जाने और इनके जरिए वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश किए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने निर्वाचन अधिकारियों से मामले में तत्काल FIR दर्ज कराने और समयबद्ध आपराधिक जांच शुरू करने की मांग की।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय पहुंचे शिवकुमार के साथ राज्य सरकार के कई मंत्री और कांग्रेस नेता मौजूद रहे। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक मंत्री प्रियांक खड़गे, एस.एस. मल्लिकार्जुन, ईश्वर खंड्रे और एम.बी. पाटिल सहित अन्य नेताओं ने भी इस मुद्दे पर कार्रवाई की मांग की। शिवकुमार ने CEO को एक लिखित प्रतिनिधित्व सौंपकर कथित रूप से बड़ी संख्या में दाखिल किए गए फॉर्म-7 की जांच कराने की मांग की।
शिवकुमार का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान कुछ विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं के नाम हटाने के लिए बड़ी संख्या में फॉर्म-7 जमा किए गए। उन्होंने दावा किया कि इनमें से कई आवेदन पहले से प्रिंट किए गए थे और उनमें मतदाताओं से संबंधित जानकारी पहले से दर्ज थी। उन्होंने सवाल उठाया कि मतदाताओं के नाम, मतदाता पहचान पत्र यानी EPIC नंबर और अन्य विवरण आवेदन तैयार करने वालों तक कैसे पहुंचे। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
फॉर्म-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची में किसी व्यक्ति के नाम को शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज करने या पहले से मौजूद नाम को हटाने का अनुरोध करने के लिए किया जाता है। इसका उपयोग कोई मतदाता अपना नाम हटाने के लिए भी कर सकता है, जैसे स्थायी रूप से स्थान बदलने या अन्य पात्र परिस्थितियों में। मौजूदा विवाद इसका कथित तौर पर बड़ी संख्या में इस्तेमाल किए जाने को लेकर है।
शिवकुमार ने अपने प्रतिनिधित्व में विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में बड़ी संख्या में फॉर्म-7 जमा किए जाने के आंकड़ों का भी उल्लेख किया। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने बेलगावी उत्तर में करीब 3,000, मुदिगेरे में 6,259, बाबलेश्वर में 1,373, नरसिम्हराजा में करीब 1,200 और भालकी में 2,285 फॉर्म-7 आवेदन जमा किए जाने का हवाला दिया। उन्होंने निर्वाचन अधिकारियों से इन आवेदनों को जमा करने वाले लोगों, संबंधित बूथों और आवेदन के कारणों की विस्तृत जांच करने की मांग की।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि इन आवेदनों में जिन मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की गई, उनमें अल्पसंख्यक, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग से जुड़े मतदाता शामिल हैं। उन्होंने इसे संभावित रूप से संगठित कार्रवाई बताते हुए कहा कि यह पता लगाया जाना जरूरी है कि कहीं पात्र मतदाताओं को चुनिंदा तरीके से निशाना तो नहीं बनाया गया। ये शिवकुमार द्वारा लगाए गए आरोप हैं और मामले की जांच की मांग की गई है।
शिवकुमार ने BJP और JD(S) से जुड़े लोगों पर भी फॉर्म-7 के कथित बड़े पैमाने पर इस्तेमाल में शामिल होने का आरोप लगाया। उन्होंने मीडिया से बातचीत में इसे “वोट चोरी” से जोड़ते हुए विपक्षी दलों पर गंभीर आरोप लगाए। हालांकि इन आरोपों को अभी जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता। उन्होंने CEO से कहा कि आवेदन दाखिल करने वाले लोगों की पहचान और उनकी संभावित राजनीतिक संबद्धता की स्वतंत्र रूप से जांच कराई जाए।
मुख्यमंत्री ने कुछ सार्वजनिक बयानों और वीडियो का भी उल्लेख किया और निर्वाचन अधिकारियों से उनकी जांच करने की मांग की। उनका कहना था कि यदि एक ही व्यक्ति या समूह की ओर से बड़ी संख्या में मतदाताओं के खिलाफ आपत्तियां दर्ज की गई हैं तो यह पता लगाया जाना चाहिए कि इसके पीछे प्रक्रिया क्या थी और संबंधित मतदाता विवरण कहां से हासिल किए गए।
मामला डेटा सुरक्षा से भी जुड़ गया है। शिवकुमार ने अपने पत्र में सवाल उठाया कि अगर फॉर्म-7 में मतदाताओं के EPIC और अन्य विवरण पहले से प्रिंट थे तो संबंधित जानकारी आवेदन तैयार करने वालों के पास कैसे पहुंची। उन्होंने निर्वाचन प्रणाली में मौजूद मतदाता डेटा के स्रोत, पहुंच और संभावित प्रसार की जांच की मांग की है।
कर्नाटक में SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर इससे पहले भी राजनीतिक और नागरिक संगठनों की ओर से चिंता जताई गई है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि प्रत्येक पात्र मतदाता के मतदान अधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। इससे पहले उन्होंने विधानसभा क्षेत्रवार फॉर्म-7 आपत्तियों की जानकारी जुटाने की बात भी कही थी।
अब इस विवाद का केंद्र निर्वाचन अधिकारियों द्वारा की जाने वाली जांच और फॉर्म-7 आवेदनों के सत्यापन पर है। शिवकुमार ने CEO से मामले को प्राथमिकता के आधार पर लेने, संदिग्ध आवेदनों की जांच करने और यदि आपराधिक गतिविधि के प्रमाण मिलते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। आगे की तस्वीर जांच और निर्वाचन अधिकारियों की कार्रवाई के बाद स्पष्ट होगी।
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