कर्नाटक

कम बारिश से बढ़ी चिंता, जलाशय खाली और बिजली उत्पादन प्रभावित

Kavita2
24 July 2026 1:46 PM IST
कम बारिश से बढ़ी चिंता, जलाशय खाली और बिजली उत्पादन प्रभावित
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बेंगलुरु : कर्नाटक में इस बार मानसून की कमजोर स्थिति के कारण सूखे जैसे हालात बनने लगे हैं। राज्य के कई हिस्सों में बारिश की कमी से जल संकट बढ़ रहा है। अधिकांश जलाशयों में पानी का स्तर काफी नीचे पहुंच गया है, जिसके चलते सरकार को पीने के पानी की जरूरतों को प्राथमिकता देनी पड़ रही है। सिंचाई के लिए पानी छोड़ने पर फिलहाल रोक लगाने के संकेत दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने राज्य में जल संकट की स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा कि इस वर्ष बारिश कम हुई है और सूखे का खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर जलाशय खाली हैं और सरकार केवल पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पानी उपलब्ध करा रही है। सिंचाई के लिए पानी छोड़ना वर्तमान परिस्थितियों में संभव नहीं है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के कई हिस्सों में बारिश की कमी का असर साफ दिखाई दे रहा है। जलाशयों में पर्याप्त पानी नहीं होने के कारण किसानों और आम लोगों दोनों के सामने चुनौतियां बढ़ गई हैं। सरकार की प्राथमिकता फिलहाल लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराना है।

कावेरी नदी बेसिन में भी जल संकट का असर देखने को मिल रहा है। कृष्णराज सागर (KRS) और काबिनी जैसे प्रमुख जलाशयों में पानी की कमी दर्ज की गई है। जलस्तर घटने से नदी के प्रवाह पर असर पड़ा है, जिसके कारण जल विद्युत उत्पादन भी प्रभावित हुआ है।

मांड्या जिले के मालवल्ली क्षेत्र में स्थित शिमशा हाइड्रोपावर प्लांट को पानी की कमी के कारण बंद करना पड़ा है। इसके अलावा शिवनसमुद्र हाइड्रोपावर प्लांट में भी बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है। शिवनसमुद्र को एशिया के शुरुआती पनबिजली संयंत्रों में से एक माना जाता है और इसका ऐतिहासिक महत्व भी है।

अधिकारियों के अनुसार, हाइड्रोपावर परियोजनाओं के संचालन के लिए पर्याप्त जल प्रवाह की आवश्यकता होती है। कावेरी नदी में पानी की उपलब्धता कम होने के कारण बिजली उत्पादन जारी रखना संभव नहीं रह गया है। जलस्तर में सुधार होने के बाद ही इन परियोजनाओं में उत्पादन दोबारा शुरू हो पाएगा।

जल संकट का सबसे ज्यादा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ने की आशंका है। कावेरी बेसिन के किसान लंबे समय से बारिश का इंतजार कर रहे हैं। पर्याप्त वर्षा नहीं होने से खेती के लिए पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है। किसानों को डर है कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो फसलों पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है।

राज्य सरकार ने जल संसाधनों के प्रबंधन को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। अधिकारियों को जलाशयों की स्थिति पर लगातार नजर रखने और पानी के उपयोग को नियंत्रित करने के निर्देश दिए गए हैं। स्थानीय प्रशासन को भी पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा गया है।

कर्नाटक में मानसून की बारिश खेती और जल भंडारण के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। लेकिन इस बार शुरुआती चरण में कम बारिश के कारण कई जिलों में स्थिति चिंताजनक हो गई है। ग्रामीण इलाकों में लोग जल स्रोतों के सूखने को लेकर परेशान हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो राज्य में जल संकट और बढ़ सकता है। जलाशयों में पानी की कमी से न केवल सिंचाई प्रभावित होगी, बल्कि बिजली उत्पादन और औद्योगिक गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है।

सरकार की ओर से लोगों से पानी का सावधानीपूर्वक इस्तेमाल करने की अपील की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध जल संसाधनों का प्रबंधन इस तरह किया जा रहा है ताकि पेयजल की जरूरतें पूरी की जा सकें।

फिलहाल कर्नाटक में सभी की नजर मानसून की आगामी बारिश पर टिकी हुई है। राज्य सरकार जल संकट से निपटने के लिए स्थिति की लगातार समीक्षा कर रही है। वहीं, किसान और आम लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही पर्याप्त बारिश होगी, जिससे जलाशयों का स्तर सुधरेगा और सूखे के खतरे को कम किया जा सकेगा।

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