
बेंगलुरु। कर्नाटक में सूखे की स्थिति को लेकर सियासत तेज हो गई है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने केंद्र सरकार से राज्य के किसानों को राहत देने के लिए कृषि ऋण माफी में सहयोग करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है और केंद्र सरकार को राज्य के किसानों की मदद के लिए आगे आना चाहिए।
बागलकोट और विजयनगर जिलों के सूखा प्रभावित इलाकों का दौरा करने से पहले पत्रकारों से बातचीत में शिवकुमार ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की समस्याओं को लेकर गंभीर है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं से भी अपील की कि वे किसानों के हित में राज्य सरकार का साथ दें और उनके साथ दिल्ली चलें। उन्होंने कहा कि सभी दलों को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर केंद्र सरकार पर दबाव बनाना चाहिए, ताकि किसानों के कृषि ऋण माफ करने के लिए आवश्यक सहायता मिल सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सूखे की स्थिति का सबसे अधिक असर किसानों पर पड़ रहा है। फसल प्रभावित होने के कारण किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में कृषि ऋण की अदायगी उनके लिए अतिरिक्त बोझ बन सकती है। उन्होंने केंद्र से किसानों के हित में सकारात्मक कदम उठाने की अपील की।
भाजपा नेताओं से दिल्ली चलने की अपील
शिवकुमार ने भाजपा नेताओं से कहा कि यदि वे वास्तव में किसानों की समस्याओं को लेकर चिंतित हैं तो उन्हें राज्य सरकार के साथ खड़ा होना चाहिए। उन्होंने भाजपा नेताओं से उनके साथ दिल्ली चलने और केंद्र सरकार के समक्ष किसानों के कृषि ऋण माफी का मुद्दा उठाने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि किसानों को राहत दिलाने के लिए केंद्र और राज्य को मिलकर काम करने की आवश्यकता है। सूखे जैसी प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहे किसानों के लिए केवल राजनीतिक बयानबाजी पर्याप्त नहीं है। सरकारों को मिलकर ठोस कदम उठाने होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र से सहायता मांगने के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने संकेत दिया कि किसानों की स्थिति को देखते हुए केंद्र के समक्ष राज्य की मांग मजबूती से रखी जाएगी।
विधानसभा सत्र में किसानों पर चर्चा नहीं होने का आरोप
मुख्यमंत्री ने हाल ही में संपन्न विधानसभा के मानसून सत्र को लेकर भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) यानी जेडीएस पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा के हालिया सत्र में किसानों की समस्याओं और सूखे की स्थिति पर कोई चर्चा नहीं हुई।
शिवकुमार ने कहा, “आपने बीजेपी और जेडीएस की राजनीति देखी है। हालिया सत्र में किसानों या सूखे की स्थिति के बारे में कोई चर्चा नहीं हुई। इसीलिए एक विशेष सत्र बुलाया गया है।”
उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं को गंभीरता से उठाने और सूखे से पैदा हुई परिस्थितियों पर चर्चा करने के लिए विशेष सत्र का आयोजन किया गया है। सरकार का प्रयास है कि इस दौरान किसानों को राहत देने से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हो और आवश्यक निर्णय लिए जाएं।
सूखा प्रभावित क्षेत्रों का लिया जायजा
मुख्यमंत्री ने बागलकोट और विजयनगर जिलों के सूखा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर जमीनी स्थिति का जायजा लेने की बात कही। इन क्षेत्रों में किसानों और स्थानीय लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याओं को समझने का प्रयास किया जाएगा।
सूखे के कारण कृषि गतिविधियों पर पड़ने वाले प्रभाव, किसानों की फसल और आय से जुड़ी समस्याओं तथा उन्हें उपलब्ध कराई जा रही सरकारी सहायता की स्थिति का भी जायजा लिया जाएगा। मुख्यमंत्री के दौरे को सरकार की ओर से जमीनी स्तर पर स्थिति समझने और राहत उपायों को आगे बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
केंद्र-राज्य सहयोग पर जोर
शिवकुमार ने कहा कि सूखे जैसी गंभीर परिस्थितियों से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। उन्होंने केंद्र से किसानों के कृषि ऋण माफ करने में सहयोग की मांग करते हुए कहा कि संकट के समय किसानों को अकेला नहीं छोड़ा जा सकता।
उन्होंने राजनीतिक दलों से भी किसानों के मुद्दे पर एकजुट होने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री का कहना है कि किसानों की समस्या किसी एक राजनीतिक दल की समस्या नहीं है। इसलिए सभी दलों को मिलकर समाधान की दिशा में काम करना चाहिए।
मुख्यमंत्री की मांग ऐसे समय सामने आई है जब राज्य के कई हिस्सों में सूखे की स्थिति को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस तेज है। सरकार जहां किसानों को राहत दिलाने के लिए केंद्र से सहयोग मांग रही है, वहीं विपक्ष की भूमिका और विधानसभा में सूखे पर चर्चा को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार किसानों के मुद्दे को प्राथमिकता दे रही है। विशेष विधानसभा सत्र के माध्यम से सूखे और किसानों की समस्याओं पर चर्चा का अवसर मिलेगा। साथ ही केंद्र सरकार के समक्ष भी किसानों के कृषि ऋण माफी सहित अन्य राहत उपायों की मांग रखी जाएगी।
मुख्यमंत्री की अपील से साफ है कि कर्नाटक सरकार सूखे से प्रभावित किसानों के लिए केंद्र से वित्तीय और नीतिगत सहयोग चाहती है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि केंद्र सरकार राज्य की इस मांग पर क्या रुख अपनाती है और किसानों को राहत देने के लिए किस प्रकार के कदम उठाए जाते हैं।





