
मैसूर। एशिया के नंबर-1 कुमकी हाथी के रूप में पहचान बना चुके अभिमन्यु के प्रशंसकों के लिए बड़ी खुशखबरी है। 25 से अधिक वर्षों तक मैसूर दशहरा महोत्सव का हिस्सा रहे और लगातार छह बार सुनहरी अंबारी यानी गोल्डन अंबारी उठाकर इतिहास रचने वाले अभिमन्यु की एक बार फिर दशहरा समारोह में वापसी होगी। 2026 के मैसूर दशहरा महोत्सव में अभिमन्यु ‘सिग्नल एलिफेंट’ के रूप में शामिल होगा। सरकार की ओर से इसकी आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है।
अभिमन्यु को दशहरा महोत्सव में उसकी बहादुरी, अनुशासन और लंबे समय तक निभाई गई जिम्मेदारियों के लिए विशेष सम्मान हासिल है। वह कई वर्षों तक जंबू सवारी का प्रमुख आकर्षण रहा है। अपनी ताकत और प्रशिक्षण के कारण उसने सुनहरी अंबारी उठाने की जिम्मेदारी भी सफलतापूर्वक निभाई। लगातार छह बार गोल्डन अंबारी उठाने के बाद अभिमन्यु की लोकप्रियता देश ही नहीं, बल्कि एशिया के प्रमुख कुमकी हाथियों में होने लगी।
इस वर्ष अभिमन्यु के प्रशंसकों के बीच उस समय निराशा फैल गई थी, जब दशहरा महोत्सव में शामिल होने वाले हाथियों की सूची में उसका नाम नहीं था। 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद अभिमन्यु को सुनहरी अंबारी उठाने की जिम्मेदारी से सेवानिवृत्त कर दिया गया था। इसके बाद 26 अगस्त को गजपायना कार्यक्रम के दौरान उसे सम्मान के साथ विदाई भी दी गई थी।
अभिमन्यु की विदाई के बाद उसके प्रशंसकों और आम लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई थी कि क्या इस वर्ष मैसूर दशहरा में अभिमन्यु दिखाई देगा। दशहरा हाथियों की प्रारंभिक सूची में नाम नहीं होने से प्रशंसकों में मायूसी बढ़ गई। लोगों ने सरकार से मांग की कि अभिमन्यु को उसकी वर्षों की सेवा और योगदान के सम्मान में दशहरा समारोह का हिस्सा बनाया जाए।
लोगों की लगातार मांग और दबाव के बाद सरकार ने अभिमन्यु को जंबू सवारी में शामिल करने का फैसला किया। वन मंत्री रामलिंगा रेड्डी की ओर से इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया गया। इसमें अभिमन्यु को विशेष सम्मान के तौर पर ‘सिग्नल एलिफेंट’ के रूप में भेजने की मंजूरी दी गई है।
सुनहरी अंबारी से बनाई पहचान
अभिमन्यु ने मैसूर दशहरा के इतिहास में अपनी अलग पहचान बनाई है। दशहरा महोत्सव में सुनहरी अंबारी उठाना बेहद महत्वपूर्ण और प्रतिष्ठित जिम्मेदारी मानी जाती है। अभिमन्यु ने लगातार छह बार यह जिम्मेदारी निभाई। इस दौरान उसकी चाल, अनुशासन और भीड़ के बीच शांत रहने की क्षमता ने उसे दर्शकों का पसंदीदा बना दिया।
कुमकी हाथियों को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाता है। इनका इस्तेमाल वन विभाग की विभिन्न जिम्मेदारियों के अलावा जंगली हाथियों को नियंत्रित करने और मानव-हाथी संघर्ष की परिस्थितियों में भी किया जाता है। अभिमन्यु ने भी अपने लंबे करियर में कई कठिन अभियानों में हिस्सा लिया है। इसी वजह से उसे ‘वॉर हंटर’ के नाम से भी जाना जाता है।
रिटायरमेंट के बाद भी विशेष भूमिका
60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद अभिमन्यु को सुनहरी अंबारी उठाने की जिम्मेदारी से मुक्त किया गया। 26 अगस्त को गजपायना के दौरान उसे औपचारिक रूप से सम्मान के साथ विदाई दी गई थी। उस समय माना जा रहा था कि अब अभिमन्यु दशहरा महोत्सव की मुख्य गतिविधियों से दूर रहेगा।
हालांकि, प्रशंसकों और जनता की मांग ने तस्वीर बदल दी। लोगों का कहना था कि अभिमन्यु ने दशहरा महोत्सव के लिए लंबे समय तक सेवा की है और उसे पूरी तरह समारोह से अलग करना उचित नहीं होगा। इसी मांग को देखते हुए सरकार ने उसे एक अलग भूमिका में दशहरा जुलूस का हिस्सा बनाने की मंजूरी दी।
‘सिग्नल एलिफेंट’ के रूप में होगा शामिल
इस बार अभिमन्यु सुनहरी अंबारी नहीं उठाएगा। उसकी भूमिका ‘सिग्नल एलिफेंट’ की होगी। जंबू सवारी के दौरान हाथियों की गतिविधियों और व्यवस्था को नियंत्रित करने में ऐसे हाथियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अभिमन्यु का अनुभव और प्रशिक्षण इस जिम्मेदारी के लिए उपयोगी माना जा रहा है।
वन मंत्री रामलिंगा रेड्डी की ओर से जारी नोटिफिकेशन में अभिमन्यु को यह विशेष सम्मान उसकी लंबी सेवा को याद करने के उद्देश्य से दिए जाने की बात कही गई है। सरकार के इस फैसले से अभिमन्यु के प्रशंसकों में उत्साह है।
प्रशंसकों में खुशी
अभिमन्यु के दशहरा में लौटने की खबर सामने आने के बाद उसके प्रशंसकों में खुशी की लहर है। सोशल मीडिया पर भी लोग इस फैसले को अभिमन्यु के प्रति सम्मान के रूप में देख रहे हैं। प्रशंसकों का कहना है कि सुनहरी अंबारी उठाने की जिम्मेदारी से भले ही उसे रिटायर कर दिया गया हो, लेकिन मैसूर दशहरा के साथ उसका जुड़ाव और योगदान इतना बड़ा है कि उसे समारोह से पूरी तरह अलग नहीं किया जा सकता।
इस फैसले के साथ अभिमन्यु एक बार फिर मैसूर दशहरा की शान बढ़ाता नजर आएगा। भले ही इस बार उसकी जिम्मेदारी पहले जैसी नहीं होगी, लेकिन उसके अनुभव, लोकप्रियता और वर्षों की सेवा के कारण उसकी मौजूदगी जंबू सवारी के दौरान खास आकर्षण बनी रहेगी।
इस तरह 2026 का मैसूर दशहरा अभिमन्यु के प्रशंसकों के लिए भावनात्मक और खास अवसर होगा। एक ओर जहां वह सुनहरी अंबारी उठाने की अपनी ऐतिहासिक जिम्मेदारी से रिटायर हो चुका है, वहीं दूसरी ओर विशेष सम्मान के साथ उसकी दशहरा में वापसी यह बताती है कि मैसूर के दशहरा उत्सव और लोगों के दिलों में अभिमन्यु की जगह अब भी कायम है।





