
Karnataka कर्नाटक: भाजपा की राज्य इकाई के प्रवक्ता एम.जी. महेश को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया है। यह कार्रवाई पार्टी आलाकमान और राज्य नेतृत्व के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी और आरोप लगाने के मामले में की गई है। पार्टी के इस निर्णय को अनुशासनात्मक कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।
जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला 19 जून को हुई पार्टी नेताओं की एक बैठक से जुड़ा है, जिसमें एम.जी. महेश द्वारा पार्टी नेतृत्व के खिलाफ कुछ अपमानजनक आरोप लगाए गए थे। इन आरोपों के बाद पार्टी संगठन के भीतर गंभीर असंतोष और चर्चा का माहौल बन गया था।
घटना के बाद भाजपा की राज्य अनुशासन समिति ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एम.जी. महेश को नोटिस जारी किया था और उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया था। समिति ने उनसे यह स्पष्ट करने को कहा था कि उनके द्वारा लगाए गए आरोपों का आधार क्या है और क्या यह पार्टी अनुशासन के अनुरूप है या नहीं।
इस पर एम.जी. महेश ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया, लेकिन राज्य अनुशासन समिति के अनुसार उनका स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बाद समिति ने कार्रवाई की सिफारिश की और संगठनात्मक अनुशासन को ध्यान में रखते हुए कड़ा निर्णय लिया गया।
राज्य अनुशासन समिति के अध्यक्ष लिंगाराजू पाटिल ने बताया कि मामले की पूरी जांच और विचार-विमर्श के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि एम.जी. महेश का आचरण पार्टी के अनुशासन के अनुरूप नहीं था। उन्होंने कहा कि पार्टी की एकता और अनुशासन सर्वोपरि है, और किसी भी प्रकार के अनुशासनहीन व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
इसी आधार पर एम.जी. महेश को तत्काल प्रभाव से पार्टी की सभी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया और उन्हें छह साल के लिए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया गया है। यह निर्णय संगठनात्मक अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह कदम यह संदेश देने के लिए भी है कि भाजपा संगठन में सार्वजनिक रूप से नेतृत्व के खिलाफ अनुशासनहीन बयानबाजी को गंभीरता से लिया जाता है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस निर्णय के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग इसे पार्टी के भीतर अनुशासन बनाए रखने का कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे आंतरिक असहमति के कठोर समाधान के रूप में देख रहे हैं।
फिलहाल, एम.जी. महेश की ओर से इस निष्कासन पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पार्टी के इस फैसले के बाद राज्य इकाई में अनुशासन और नेतृत्व के प्रति जवाबदेही को लेकर संदेश और सख्त हो गया है।





