
Karnataka कर्नाटक: कावेरी नदी के जल बंटवारे को लेकर एक बार फिर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। विपक्ष के नेता आर. अशोक ने सोमवार को कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार कन्नड़ लोगों के हितों की अनदेखी कर रही है और कथित तौर पर चुपके से कावेरी का पानी तमिलनाडु को भेज रही है। इस मुद्दे को लेकर राज्य की राजनीति में तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है।
आर. अशोक ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि इस समय राज्य में मानसून कमजोर रहा है और कई क्षेत्रों में सूखे की स्थिति बन रही है। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु जैसे बड़े शहर में भी पानी की गंभीर कमी महसूस की जा रही है, जहां लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे हालात में भी सरकार द्वारा कावेरी का पानी अन्य राज्य को दिए जाने का निर्णय सवालों के घेरे में है।
उन्होंने दावा किया कि कावेरी घाटी की जीवनरेखा माने जाने वाले केआरएस (कृष्णराज सागर) डैम से पेयजल आपूर्ति के नाम पर तमिलनाडु को पानी छोड़ा जा रहा है। आर. अशोक के अनुसार, पिछले तीन दिनों से प्रतिदिन लगभग 2,000 क्यूसेक पानी तमिलनाडु को दिया जा रहा है, जिसे उन्होंने कन्नड़ लोगों के हितों के खिलाफ बताया।
विपक्षी नेता ने राज्य सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि यह निर्णय कर्नाटक के लोगों के साथ विश्वासघात के समान है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार सत्ता में रहते हुए अलग रुख अपनाती है और जनता के हितों की बजाय राजनीतिक फैसलों को प्राथमिकता देती है।
आर. अशोक ने अपने बयान में यह भी कहा कि कांग्रेस का रुख समय के साथ बदलता रहता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब पार्टी सत्ता में नहीं होती, तब वह कावेरी जल को कर्नाटक का अधिकार बताती है, लेकिन सत्ता में आने के बाद उसका रुख बदल जाता है। उन्होंने इसे जनता के साथ दोहरा रवैया बताया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार केंद्रीय नेतृत्व और राजनीतिक समझौतों के दबाव में काम कर रही है, जिससे कर्नाटक के हित प्रभावित हो रहे हैं। उनके अनुसार, यह स्थिति राज्य के किसानों, शहरों और आम जनता के लिए नुकसानदायक है।
कावेरी जल विवाद पहले भी कई बार कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच तनाव का कारण बन चुका है। विशेष रूप से सूखे के समय में पानी के बंटवारे को लेकर दोनों राज्यों के बीच मतभेद सामने आते रहे हैं। इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा समय-समय पर निर्देश भी जारी किए जाते रहे हैं।
वर्तमान विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब कर्नाटक में कई क्षेत्रों में बारिश की कमी और पानी की समस्या को लेकर चिंता जताई जा रही है। खासकर बेंगलुरु जैसे शहरों में जल संकट को लेकर प्रशासन पहले से ही दबाव में है।
हालांकि, सरकार की ओर से इस मुद्दे पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर यह माना जाता है कि कावेरी जल का वितरण निर्धारित नियमों और प्राधिकरण के निर्देशों के अनुसार किया जाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कावेरी जल विवाद हमेशा से ही कर्नाटक की राजनीति में संवेदनशील मुद्दा रहा है और चुनावी समय या सूखे जैसी परिस्थितियों में यह और अधिक तीव्र हो जाता है।
फिलहाल आर. अशोक के आरोपों के बाद राज्य में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाने की संभावना है। वहीं आम जनता के बीच भी जल संकट को लेकर चिंता बनी हुई है, जिससे सरकार पर समाधान खोजने का दबाव बढ़ गया है।





