
बेंगलुरु : कर्नाटक में प्रश्न पत्र लीक मामले को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के उस बयान पर सवाल उठाए हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रश्न पत्र लीक होने की स्थिति में जिलों के डिप्टी कमिश्नर (DC) जिम्मेदार होंगे।
बीजेपी के वरिष्ठ नेता आर. अशोक ने कांग्रेस सरकार पर "राजनीतिक पाखंड" का आरोप लगाया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कांग्रेस विपक्ष में होती है तो जवाबदेही तय करने के लिए इस्तीफे की मांग करती है, लेकिन सत्ता में आने के बाद जिम्मेदारी अधिकारियों के स्तर पर डाल देती है।
आर. अशोक ने रविवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) अकाउंट पर पोस्ट करते हुए कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और डी.के. शिवकुमार तीन चेहरे हैं, लेकिन रवैया एक जैसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व जवाबदेही की बात करता है, जबकि कर्नाटक में सरकार की सोच अलग दिखाई देती है।
बीजेपी नेता ने कहा कि कांग्रेस सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रश्न पत्र लीक जैसी गंभीर घटनाओं के लिए असली जिम्मेदारी किसकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए अधिकारियों पर दोष मढ़ने का प्रयास कर रही है।
दरअसल, मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने हाल ही में कहा था कि प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्न पत्र लीक रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि किसी जिले में प्रश्न पत्र लीक जैसी घटना होती है तो संबंधित जिले के डिप्टी कमिश्नर को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद बीजेपी ने इसे लेकर कांग्रेस सरकार पर हमला तेज कर दिया। पार्टी नेताओं का कहना है कि सरकार को केवल प्रशासनिक अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराने के बजाय राजनीतिक स्तर पर भी जवाबदेही तय करनी चाहिए।
आर. अशोक ने कांग्रेस नेतृत्व पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब केंद्र सरकार या अन्य राज्यों में कोई विवाद होता है तो कांग्रेस नेता मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हैं, लेकिन अपने शासन वाले राज्यों में अलग रुख अपनाते हैं।
वहीं, कांग्रेस सरकार की ओर से अभी तक बीजेपी के आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, सरकार लगातार परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाने की बात कहती रही है।
कर्नाटक में प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता और सुरक्षा को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। पेपर लीक की घटनाएं छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा मानी जाती हैं। ऐसे मामलों में सरकारों पर पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने का दबाव रहता है।
बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का यह सिलसिला ऐसे समय में बढ़ा है, जब राज्य में भर्ती परीक्षाओं और परीक्षा प्रणाली को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। विपक्ष सरकार से जवाबदेही और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे सीधे तौर पर युवाओं और छात्रों को प्रभावित करते हैं, इसलिए ऐसे मामलों पर राजनीतिक दल तेजी से प्रतिक्रिया देते हैं। पेपर लीक जैसे मामलों में जनता के बीच सरकार की छवि और प्रशासनिक क्षमता पर भी असर पड़ता है।
फिलहाल कर्नाटक में प्रश्न पत्र लीक को लेकर जारी विवाद के केंद्र में मुख्यमंत्री का बयान और बीजेपी की ओर से लगाए गए आरोप हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर विधानसभा और राजनीतिक मंचों पर बहस और तेज होने की संभावना है।
बीजेपी जहां इसे कांग्रेस सरकार की जवाबदेही का मुद्दा बता रही है, वहीं कांग्रेस सरकार का जोर परीक्षा व्यवस्था में सुधार और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई पर है। अब देखना होगा कि सरकार इस विवाद को शांत करने के लिए कौन से कदम उठाती है।





