कर्नाटक

बेलूर गोपालकृष्ण ने बदला फैसला, विधायक पद से इस्तीफा नहीं देंगे

Kavita2
4 Aug 2026 2:20 PM IST
बेलूर गोपालकृष्ण ने बदला फैसला, विधायक पद से इस्तीफा नहीं देंगे
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बेंगलुरु। कर्नाटक की राजनीति में मंत्री पद के बंटवारे के बाद जारी असंतोष के बीच कांग्रेस विधायक बेलूर गोपालकृष्ण ने अपने रुख में बड़ा बदलाव किया है। एक दिन पहले उन्होंने घोषणा की थी कि मंत्री पद नहीं मिलने से नाराज होकर वह अगले दिन सुबह 10 बजे विधायक पद से इस्तीफा दे देंगे। हालांकि, अब उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वह विधायक पद से इस्तीफा नहीं देंगे। साथ ही उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए अपनी नाराजगी भी खुलकर जाहिर की।

बेलूर गोपालकृष्ण ने मीडिया से बातचीत के दौरान भावुक अंदाज में कहा कि वह लंबे समय से पार्टी और जनता की सेवा कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अपेक्षित सम्मान नहीं मिला। उन्होंने कहा कि अब वह मानसिक रूप से बेहद आहत हैं और इस पूरे घटनाक्रम से निराश हैं।

उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का नाम लेते हुए कहा, “सिद्धारमैया अब खुश नहीं हैं। वे सौ साल तक खुश रहें। उनके समर्थकों को वही मिले जिसके वे हकदार हैं। वे भी सौ साल तक खुश रहें। मैं तंग आ चुका हूं। मेरी आंखों में आंसू हैं। क्या मैं अपना चश्मा उतारकर आपको दिखाऊं?” उनके इस बयान को पार्टी नेतृत्व के प्रति नाराजगी के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि, तमाम नाराजगी के बावजूद बेलूर गोपालकृष्ण ने विधायक पद छोड़ने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने इस्तीफे के फैसले पर पुनर्विचार किया है और अब वह जनता के जनादेश का सम्मान करते हुए विधायक बने रहेंगे।

उन्होंने बताया कि उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से बातचीत के बाद उन्होंने अपना निर्णय बदला। गोपालकृष्ण के अनुसार, डी.के. शिवकुमार ने उनसे कहा कि सरकार और संगठन को उनकी जरूरत है तथा जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाना चाहिए।

उन्होंने कहा, “मुझे इस बात का डर नहीं है कि आपने तुरंत इस्तीफा देने पर विचार करने को कहा। मैं डरने वाला व्यक्ति नहीं हूं। डी.के. शिवकुमार ने मुझसे कहा कि ‘मैं मुख्यमंत्री नहीं हूं, लेकिन सरकार का हिस्सा हूं और आपके साथ खड़ा हूं।’ उनके आग्रह पर मैंने इस्तीफे का फैसला वापस ले लिया।”

गोपालकृष्ण ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल वह विधायक पद से इस्तीफा नहीं देंगे और पार्टी के भीतर अपनी बात लोकतांत्रिक तरीके से रखते रहेंगे। उन्होंने कहा कि राजनीति में धैर्य रखना जरूरी है और जल्दबाजी में लिया गया कोई भी फैसला नुकसानदायक हो सकता है।

उन्होंने अन्य नाराज नेताओं से भी अपील की कि वे भावनाओं में बहकर कोई बड़ा फैसला न लें। उन्होंने कहा, “आज एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। मैं चाहता हूं कि वहां कोई भी इस्तीफा न दे। सभी को बैठकर बातचीत करनी चाहिए और संगठन के भीतर ही समाधान निकालना चाहिए।”

कर्नाटक में हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद कई कांग्रेस विधायकों में असंतोष की स्थिति देखी जा रही है। कई वरिष्ठ नेताओं और विधायकों को मंत्री पद नहीं मिलने से नाराजगी सामने आई है। बेलूर गोपालकृष्ण भी उन्हीं नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी निराशा व्यक्त की।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मंत्रिमंडल विस्तार के बाद पार्टी नेतृत्व के सामने असंतुष्ट नेताओं को संतुष्ट रखना बड़ी चुनौती बन गया है। कांग्रेस नेतृत्व लगातार नाराज विधायकों से बातचीत कर रहा है ताकि किसी भी तरह के राजनीतिक संकट से बचा जा सके।

बेलूर गोपालकृष्ण का इस्तीफा न देने का फैसला फिलहाल पार्टी के लिए राहत की खबर माना जा रहा है। हालांकि, उनके बयानों से यह स्पष्ट है कि मंत्री पद को लेकर असंतोष अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस नेतृत्व को संगठनात्मक संतुलन बनाए रखने और नाराज नेताओं को मनाने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने होंगे। यदि असंतोष बढ़ता है तो इसका असर सरकार और संगठन दोनों पर पड़ सकता है।

फिलहाल बेलूर गोपालकृष्ण ने विधायक पद पर बने रहने का फैसला लेकर तत्काल राजनीतिक संकट को टाल दिया है, लेकिन उनके तीखे बयान यह संकेत देते हैं कि कर्नाटक कांग्रेस के भीतर मंत्री पद को लेकर असंतोष की लहर अभी भी जारी है। पार्टी नेतृत्व की अगली बैठकों और फैसलों पर अब सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

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