कर्नाटक

जयनगर में 5,698 वोटरों के नाम हटाने की कोशिश का आरोप, BJP से जुड़े दो BLA समेत अन्य पर FIR

Kavita2
6 Oct 2026 11:48 AM IST
जयनगर में 5,698 वोटरों के नाम हटाने की कोशिश का आरोप, BJP से जुड़े दो BLA समेत अन्य पर FIR
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कर्नाटक : राजधानी बेंगलुरु के जयनगर विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची से हजारों नाम हटाने की कथित कोशिश को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। BJP से जुड़े दो बूथ लेवल एजेंट यानी BLA और अन्य लोगों के खिलाफ जयनगर पुलिस ने FIR दर्ज की है। आरोप है कि जयनगर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची से 5,698 वोटरों के नाम हटाने के लिए फर्जी ‘फॉर्म-7’ आवेदन दाखिल किए गए थे।

यह मामला कांग्रेस नेता और कर्नाटक महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सौम्या रेड्डी की शिकायत पर दर्ज किया गया है। पुलिस ने सोमवार रात उनकी लिखित शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मतदाता सूची में सुधार की प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे आवेदन दाखिल किए गए, जिनमें संबंधित मतदाताओं के क्षेत्र से स्थायी रूप से कहीं और चले जाने का दावा किया गया था।

मिली जानकारी के अनुसार, कथित गड़बड़ियां 16 जून से 5 अक्टूबर के बीच वोटर लिस्ट में सुधार की प्रक्रिया के दौरान हुईं। इसी अवधि में हजारों फॉर्म-7 आवेदन दाखिल किए गए। शिकायत में दावा किया गया है कि इन आवेदनों का मकसद बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाना था।

फॉर्म-7 चुनावी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इसका इस्तेमाल किसी मतदाता के नाम को मतदाता सूची में शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराने या पहले से मौजूद किसी मतदाता का नाम हटाने का अनुरोध करने के लिए किया जाता है। आमतौर पर इस फॉर्म का उपयोग तब किया जाता है, जब कोई मतदाता संबंधित निर्वाचन क्षेत्र से स्थायी रूप से स्थानांतरित हो गया हो, उसकी मृत्यु हो गई हो या उसका नाम गलत तरीके से सूची में दर्ज हो।

जयनगर मामले में आरोप है कि इसी प्रक्रिया का दुरुपयोग किया गया। हजारों आवेदनों में यह दावा किया गया कि संबंधित मतदाता अपने पते से स्थायी रूप से कहीं और चले गए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता वास्तव में उसी क्षेत्र में रह रहे थे और उनके नाम हटाने का कोई वैध आधार नहीं था।

सौम्या रेड्डी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया के पीछे संगठित तरीके से काम किया गया। उन्होंने पुलिस से मामले की विस्तृत जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में BJP से जुड़े दो बूथ लेवल एजेंटों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।

पुलिस ने शिकायत के आधार पर FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि हजारों फॉर्म-7 आवेदन किसने दाखिल किए, इन आवेदनों में इस्तेमाल की गई जानकारी कहां से आई और क्या संबंधित मतदाताओं की जानकारी का दुरुपयोग किया गया।

मामले में यह भी जांच का अहम हिस्सा होगा कि फॉर्म-7 आवेदन व्यक्तिगत स्तर पर दाखिल किए गए थे या किसी समन्वित अभियान के तहत बड़ी संख्या में जमा किए गए। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश करेगी कि आवेदन प्रक्रिया में किसी तरह की फर्जी पहचान, गलत पता या गलत जानकारी का इस्तेमाल किया गया या नहीं।

जयनगर विधानसभा क्षेत्र में यह मामला राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील माना जा रहा है। मतदाता सूची से नाम हटाने या जोड़ने का सीधा असर चुनावी प्रक्रिया पर पड़ सकता है। ऐसे में हजारों मतदाताओं के नाम हटाने की कथित कोशिश ने राजनीतिक विवाद को और तेज कर दिया है।

कांग्रेस पहले से ही फॉर्म-7 और मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रही है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए आवेदन प्रणाली का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। जयनगर का मामला इसी विवाद को और गंभीर बना सकता है।

शिकायत में 5,698 वोटरों के नाम हटाने की कोशिश का आरोप लगाया गया है, जो संख्या अपने आप में काफी बड़ी है। अगर जांच में यह साबित होता है कि इतने बड़े स्तर पर गलत आवेदन दाखिल किए गए, तो यह चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।

हालांकि फिलहाल ये सभी आरोप शिकायत पर आधारित हैं और पुलिस जांच जारी है। आरोपियों की ओर से क्या पक्ष रखा जाता है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं, यह आगे स्पष्ट होगा। किसी भी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच पूरी होना जरूरी है।

पुलिस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती डिजिटल और दस्तावेजी रिकॉर्ड की जांच करना होगी। यह देखा जाएगा कि फॉर्म-7 ऑनलाइन दाखिल किए गए थे या किसी अन्य माध्यम से, किस मोबाइल नंबर या पहचान का इस्तेमाल हुआ और क्या एक ही स्रोत से बड़ी संख्या में आवेदन भेजे गए।

इसके अलावा चुनाव अधिकारियों से भी जानकारी ली जा सकती है कि इन आवेदनों में से कितनों पर कार्रवाई हुई, कितने खारिज किए गए और कितने मामलों में संबंधित मतदाताओं से सत्यापन कराया गया।

जयनगर में सामने आए इस मामले ने मतदाता सूची की सुरक्षा, सत्यापन प्रक्रिया और फॉर्म-7 के इस्तेमाल पर नई बहस छेड़ दी है। अब सबकी नजर पुलिस जांच और चुनाव अधिकारियों की आगे की कार्रवाई पर है।

यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मामला केवल स्थानीय स्तर की गड़बड़ी नहीं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप की गंभीर कोशिश के रूप में देखा जा सकता है। फिलहाल FIR दर्ज होने के बाद जांच शुरू हो चुकी है और आगे के तथ्य सामने आने का इंतजार किया जा रहा है।

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