कर्नाटक

वोटर लिस्ट से 13 करोड़ नाम हटाने का अभिजीत दीपके का आरोप, बेंगलुरु में SIR के खिलाफ प्रदर्शन

Kavita2
9 Oct 2026 10:46 AM IST
वोटर लिस्ट से 13 करोड़ नाम हटाने का अभिजीत दीपके का आरोप, बेंगलुरु में SIR के खिलाफ प्रदर्शन
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बेंगलुरु। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि देशभर में मतदाता सूची से 13 करोड़ लोगों के नाम हटा दिए गए हैं। गुरुवार को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में SIR के खिलाफ आयोजित विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए दीपके ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया का इस्तेमाल चुनावी नतीजों को प्रभावित करने के लिए किया गया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और चुनाव आयोग के अधिकारियों पर भी आरोप लगाए। हालांकि, उनके दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।

अभिजीत दीपके ने दावा किया कि मतदाता सूची से नाम हटाने के कारण बीजेपी को उन राज्यों में भी चुनावी लाभ मिला, जहां उनके अनुसार पार्टी के जीतने की संभावना नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के अधिकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कहने पर मतदाताओं के नाम हटाए। ये आरोप दीपके की ओर से लगाए गए हैं और इन्हें पुष्ट तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

फ्रीडम पार्क में SIR के खिलाफ प्रदर्शन

गुरुवार को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के विरोध में प्रदर्शन आयोजित किया गया। इसमें CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और नाम हटाए जाने के मुद्दे पर अपनी बात रखी।

दीपके ने आरोप लगाया कि देशभर में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं और इस प्रक्रिया ने चुनावी निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दावा किया कि लगभग 13 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। हालांकि, इस आंकड़े के समर्थन में कोई आधिकारिक दस्तावेज या स्वतंत्र रूप से सत्यापित विवरण उपलब्ध नहीं है।

मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनाव प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इसमें नाम जोड़ने, हटाने और विवरणों को सुधारने की प्रक्रिया शामिल रहती है। ऐसे में किसी भी बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के दावे का आकलन करने के लिए संबंधित आधिकारिक आंकड़ों और निर्वाचन आयोग के विवरण को देखना जरूरी है।

मोदी और शाह पर लगाए आरोप

प्रदर्शन के दौरान अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग के अधिकारियों ने उनके निर्देश पर मतदाताओं के नाम हटाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए किया गया।

दीपके ने कहा कि मतदाता सूची में कथित बदलावों से चुनावों के नतीजों पर असर पड़ा। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में ऐसा कोई स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है जो उनके आरोपों की पुष्टि करता हो। इसलिए इन दावों को राजनीतिक बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

बंगाल, दिल्ली और तमिलनाडु का किया जिक्र

अभिजीत दीपके ने अपने संबोधन में पश्चिम बंगाल, दिल्ली और तमिलनाडु का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी, दिल्ली में अरविंद केजरीवाल और तमिलनाडु में एम.के. स्टालिन के निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं के नाम हटाकर चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की कोशिश की गई।

उन्होंने इन राज्यों और नेताओं का उल्लेख करते हुए मतदाता सूची की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। हालांकि, उनके बयान में ऐसे हटाए गए नामों की संख्या, निर्वाचन क्षेत्रों के विशिष्ट आंकड़े या इन आरोपों की पुष्टि करने वाले दस्तावेजों का विवरण उपलब्ध नहीं है।

किसी निर्वाचन क्षेत्र में नाम हटाए जाने की वास्तविक स्थिति जानने के लिए चुनाव आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड, संबंधित मतदाता सूची और दावों-आपत्तियों की प्रक्रिया से जुड़े आंकड़ों की जांच आवश्यक है।

केरल चुनाव और पिनाराई विजयन का भी उठाया मुद्दा

अपने संबोधन में दीपके ने केरल चुनाव और मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के इस्तीफे का मुद्दा भी उठाया। हालांकि, उपलब्ध विवरण में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि उन्होंने इस विषय को किस विशेष घटना या राजनीतिक संदर्भ से जोड़कर उठाया था।

इसलिए केरल और पिनाराई विजयन से संबंधित उनके बयान के विस्तृत आशय पर निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है। फिलहाल, यह जानकारी सामने आई है कि उन्होंने SIR के विरोध में बोलते हुए इस मुद्दे का भी जिक्र किया।

मतदाता सूची की पारदर्शिता पर बहस

SIR को लेकर राजनीतिक दलों और संगठनों के बीच बहस जारी है। मतदाता सूची की शुद्धता, पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने और नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता जैसे मुद्दे इस चर्चा के केंद्र में हैं।

CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बेंगलुरु के प्रदर्शन में 13 करोड़ नाम हटाए जाने का दावा करते हुए चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि के लिए स्वतंत्र प्रमाण और आधिकारिक आंकड़ों की जरूरत होगी।

फिलहाल, फ्रीडम पार्क में हुए प्रदर्शन के दौरान उठाए गए सवालों और लगाए गए आरोपों पर संबंधित पक्षों की विस्तृत प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है। मतदाता सूची से हटाए गए नामों की वास्तविक संख्या और चुनावों पर उनके कथित प्रभाव का आकलन आधिकारिक रिकॉर्ड और सत्यापित तथ्यों के आधार पर ही किया जा सकता है।

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