
मैसूर: आषाढ़ महीने के पहले शुक्रवार के अवसर पर मैसूर की प्रसिद्ध चामुंडी पहाड़ियों पर शुक्रवार को भक्ति और उत्सव का माहौल देखने को मिला। सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवी चामुंडेश्वरी के दर्शन के लिए पहुंचने लगे। पहाड़ी पर भक्तों की लंबी कतारें नजर आईं और पूरे परिसर में धार्मिक उत्साह का वातावरण बना रहा।
आषाढ़ के शुक्रवार को देवी चामुंडेश्वरी की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इसी परंपरा के तहत चामुंडी पहाड़ियों को आकर्षक तरीके से सजाया गया है। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र को विभिन्न प्रकार के फूलों से सजाया गया, जिससे पूरा वातावरण श्रद्धा और उत्सव के रंग में रंग गया।
शुक्रवार तड़के ही मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना शुरू हो गई। मंदिर प्रशासन के अनुसार, सुबह करीब 3:30 बजे से धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत की गई। इसके बाद देवी की विशेष पूजा, अभिषेक और श्रृंगार किया गया। सुबह से ही श्रद्धालुओं का मंदिर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया और दिन बढ़ने के साथ भक्तों की संख्या लगातार बढ़ती गई।
इस विशेष अवसर पर देवी चामुंडेश्वरी को नागलक्ष्मी के रूप में सजाया गया। देवी की उत्सव मूर्ति का भी विशेष श्रृंगार किया गया। देवी को हरी साड़ी और नागशेष स्वरूप में सजाया गया, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा। मंदिर में किए गए भव्य श्रृंगार को देखकर भक्त भाव-विभोर नजर आए।
मान्यता है कि आषाढ़ के शुक्रवार के दिन देवी चामुंडेश्वरी के दर्शन और पूजा करने से भक्तों को विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसी विश्वास के चलते कर्नाटक ही नहीं, बल्कि आसपास के राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मैसूर पहुंचते हैं। कई भक्तों ने सुबह से कतारों में खड़े होकर देवी के दर्शन किए और पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की।
मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन की ओर से विशेष व्यवस्थाएं की गईं। सुरक्षा व्यवस्था के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। इसके अलावा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कतार प्रबंधन, पेयजल और अन्य आवश्यक इंतजाम किए गए।
चामुंडी पहाड़ियों पर हर साल आषाढ़ के शुक्रवार के अवसर पर विशेष आयोजन किया जाता है। इस दौरान मंदिर को विशेष रूप से सजाया जाता है और देवी की अलग-अलग स्वरूपों में पूजा की जाती है। धार्मिक दृष्टि से यह पर्व स्थानीय लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
भक्तों ने बताया कि आषाढ़ शुक्रवार के दिन देवी के दर्शन करना उनके लिए विशेष आध्यात्मिक अनुभव है। कई श्रद्धालु सुबह जल्दी पहाड़ी पर पहुंच गए थे ताकि पूजा में शामिल हो सकें और शांतिपूर्ण तरीके से देवी के दर्शन कर सकें।
मैसूर की चामुंडी पहाड़ी न केवल धार्मिक बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से भी महत्वपूर्ण स्थान रखती है। यहां स्थित चामुंडेश्वरी मंदिर देशभर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। हर साल लाखों लोग यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
आषाढ़ के पहले शुक्रवार पर हुए इस विशेष आयोजन में मंदिर की सजावट, देवी का मनमोहक श्रृंगार और भक्तों की आस्था ने पूरे क्षेत्र को उत्सवमय बना दिया। सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्ति गीतों और मंत्रोच्चार की गूंज सुनाई देती रही।
मंदिर प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों ने श्रद्धालुओं से व्यवस्था बनाए रखने और शांतिपूर्ण तरीके से दर्शन करने की अपील की। भीड़ को देखते हुए समय-समय पर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था की निगरानी भी की गई।
दिनभर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। अधिकारियों का कहना है कि भक्तों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए सभी जरूरी कदम उठाए गए हैं।
आषाढ़ के पहले शुक्रवार का यह आयोजन मैसूर की धार्मिक परंपरा और आस्था का एक बड़ा उदाहरण बना। देवी चामुंडेश्वरी के विशेष श्रृंगार और पूजा-अर्चना के साथ चामुंडी पहाड़ियों पर श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का अनोखा संगम देखने को मिला।





