
बेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को लेकर सरकार ने विधान परिषद में अहम जानकारी साझा की है। गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने बताया कि पिछले तीन वर्षों के दौरान गृह विभाग ने शहर में 911 अवैध प्रवासियों की पहचान की है। सरकार के इस आंकड़े के सामने आने के बाद राजधानी में अवैध प्रवास और विदेशी नागरिकों के दस्तावेजों की स्थिति को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
यह जानकारी विधान परिषद में प्रश्नकाल के दौरान भाजपा सदस्य गोपीनाथ द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में सामने आई। सवाल विदेशी नागरिकों की पहचान, उनके दस्तावेजों और राज्य में अवैध रूप से रह रहे लोगों से जुड़ा था। गृह मंत्री ने सदन को उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के आधार पर स्थिति की जानकारी दी।
5,304 विदेशियों के वीजा-पासपोर्ट की अवधि खत्म
गृह मंत्री के अनुसार, बेंगलुरु में 5,304 ऐसे विदेशी नागरिक मौजूद हैं, जिनके वीजा और पासपोर्ट की वैधता समाप्त हो चुकी है। इनमें से 446 विदेशी नागरिकों को उनके वीजा और पासपोर्ट की अवधि समाप्त होने के कारण अवैध श्रेणी में माना गया है।
सरकार की ओर से पेश आंकड़ों ने शहर में विदेशी नागरिकों की निगरानी और उनके दस्तावेजों की जांच को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति के दस्तावेज की अवधि समाप्त होना और उसके अवैध रूप से देश में प्रवेश करने के आरोप एक ही बात नहीं हैं। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति की कानूनी स्थिति और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच जरूरी होती है।
तीन साल में 911 लोगों की पहचान
गृह मंत्री ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में गृह विभाग ने बेंगलुरु में 911 अवैध प्रवासियों की पहचान की है। सरकार की ओर से यह जानकारी ऐसे समय में सामने आई है जब शहर में अवैध प्रवासियों को लेकर राजनीतिक बहस भी चल रही है।
सदन में पूछे गए सवाल के जवाब में यह भी स्पष्ट किया गया कि पिछले तीन वर्षों में देश में अवैध तरीके से प्रवेश कर कर्नाटक में बसने वाले सभी विदेशियों से संबंधित पूरी जानकारी सरकार के पास उपलब्ध नहीं है। हालांकि, राज्य के गृह विभाग द्वारा बेंगलुरु में पहचाने गए 911 लोगों का आंकड़ा सामने रखा गया।
आपराधिक गतिविधियों का भी मुद्दा
भाजपा सदस्य के सवाल में अवैध प्रवासियों और आपराधिक गतिविधियों में शामिल विदेशी नागरिकों से संबंधित पहलू भी उठाया गया था। इसके जवाब में गृह मंत्री ने विभाग के पास उपलब्ध आंकड़ों का उल्लेख किया।
इस मुद्दे को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच आगे भी राजनीतिक बहस होने की संभावना है। विपक्ष की ओर से अवैध घुसपैठ और दस्तावेजों की जांच को लेकर सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की जा सकती है। वहीं सरकार के लिए चुनौती यह होगी कि अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान के साथ-साथ वैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के अधिकारों और कानूनी प्रक्रियाओं का भी पालन सुनिश्चित किया जाए।
दस्तावेजों की जांच पर जोर
बेंगलुरु जैसे बड़े महानगर में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक रोजगार, शिक्षा, कारोबार और अन्य कारणों से आते हैं। ऐसे में वीजा और पासपोर्ट की वैधता की नियमित जांच महत्वपूर्ण हो जाती है। दस्तावेजों की अवधि समाप्त होने के बाद संबंधित व्यक्ति की कानूनी स्थिति निर्धारित करने के लिए नियमानुसार प्रक्रिया अपनाई जाती है।
सरकार द्वारा 5,304 ऐसे विदेशियों का आंकड़ा दिए जाने के बाद दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर भी ध्यान आकर्षित हुआ है। इनमें से 446 लोगों को अवैध श्रेणी में रखने की जानकारी दी गई है। बाकी मामलों में दस्तावेजों की स्थिति और संबंधित व्यक्तियों की कानूनी स्थिति अलग-अलग हो सकती है।
अवैध प्रवेश और ओवरस्टे में अंतर
विदेशी नागरिकों से जुड़े मामलों में अवैध प्रवेश और वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद देश में रहना अलग-अलग परिस्थितियां हैं। कोई व्यक्ति वैध दस्तावेजों के साथ भारत आया हो, लेकिन निर्धारित अवधि के बाद भी देश में रह रहा हो, तो उसका मामला ओवरस्टे से जुड़ सकता है। वहीं बिना वैध अनुमति के सीमा पार कर प्रवेश करने का मामला अलग कानूनी श्रेणी में आता है।
इसी वजह से सरकार द्वारा दिए गए आंकड़ों की व्याख्या करते समय दोनों स्थितियों में अंतर करना जरूरी है। बेंगलुरु में पहचाने गए 911 लोगों की वास्तविक कानूनी स्थिति और उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई संबंधित जांच और सरकारी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से अहम मुद्दा
बेंगलुरु देश का प्रमुख आईटी और औद्योगिक केंद्र होने के साथ बड़ी संख्या में विदेशी नागरिकों को आकर्षित करता है। ऐसे में विदेशी नागरिकों के दस्तावेजों की निगरानी, वैध वीजा और पासपोर्ट की जांच तथा अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
विधान परिषद में सामने आए आंकड़ों के बाद अब सरकार की ओर से आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी। खास तौर पर 911 चिन्हित अवैध प्रवासियों के संबंध में क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है और 446 दस्तावेज-समाप्ति वाले विदेशियों की स्थिति को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं, यह महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल, गृह मंत्री द्वारा सदन में दी गई जानकारी ने बेंगलुरु में विदेशी नागरिकों के दस्तावेज और अवैध प्रवास से जुड़े मुद्दे को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक शहर में पिछले तीन वर्षों में 911 अवैध प्रवासियों की पहचान हुई है, जबकि हजारों विदेशी नागरिकों के वीजा और पासपोर्ट की अवधि समाप्त होने की जानकारी भी सामने आई है।





