
कोडागु। कर्नाटक के कोडागु जिले में मानव-हाथी संघर्ष के बीच वन विभाग को बड़ी सफलता मिली है। वन विभाग के कर्मचारियों ने 9 अगस्त को यदुर गांव में एक एस्टेट वर्कर की मौत के लिए जिम्मेदार बताए जा रहे जंगली हाथी को पकड़ लिया है। अधिकारियों के अनुसार, हाथी को घटना स्थल से करीब तीन किलोमीटर दूर देखा गया, जिसके बाद वन विभाग की टीम ने अभियान चलाकर उसे बेहोश किया और सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पकड़ा गया हाथी करीब 32 साल का नर जंगली हाथी है। उसे कुशालनगर स्थित दुबारे एलिफेंट कैंप भेजे जाने की तैयारी है। हाथी को पकड़ने की कार्रवाई के दौरान वन विभाग की टीम ने सुरक्षा के सभी जरूरी इंतजाम किए थे।
तीन किलोमीटर दूर मिली हाथी की हलचल
यदुर गांव में एस्टेट वर्कर की मौत के बाद वन विभाग की टीम लगातार उस इलाके में हाथी की गतिविधियों पर नजर रख रही थी। अधिकारियों को घटना स्थल से लगभग तीन किलोमीटर दूर हाथी की मौजूदगी के संकेत मिले।
इसके बाद वन विभाग के कर्मचारियों ने अभियान शुरू किया। हाथी को ट्रैक करने के बाद उसे नियंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू की गई। टीम ने उसे बेहोश किया और फिर पकड़ लिया।
अधिकारियों के मुताबिक, हाथी को पकड़ने के बाद उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाने की तैयारी की गई। फिलहाल उसे दुबारे एलिफेंट कैंप भेजा जाएगा, जहां उसकी निगरानी और देखभाल की जाएगी।
9 अगस्त को हुई थी एस्टेट वर्कर की मौत
यदुर गांव में 9 अगस्त को जंगली हाथी के हमले में एक एस्टेट वर्कर की मौत हो गई थी। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल बन गया था। स्थानीय लोगों में वन विभाग और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी भी देखने को मिली।
मानव बस्तियों और जंगलों के आसपास हाथियों की लगातार आवाजाही के कारण स्थानीय लोगों में पहले से ही चिंता बनी हुई है। ऐसे में एस्टेट वर्कर की मौत ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया।
घटना के बाद वन विभाग ने हाथी की पहचान और उसे पकड़ने के लिए अभियान तेज किया। लगातार निगरानी और खोजबीन के बाद आखिरकार टीम को सफलता मिली।
इस साल हाथियों के हमलों में सात मौतें
कोडागु जिले में मानव-हाथी संघर्ष लगातार गंभीर समस्या बना हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, इस साल जनवरी से अब तक जंगली हाथियों के हमलों में कुल सात लोगों की मौत हो चुकी है।
इन घटनाओं में सबसे अधिक मौतें अम्माथी-सिद्धापुर इलाके में हुई हैं। जंगल से सटे इलाकों में रहने वाले लोगों, मजदूरों और एस्टेट वर्करों के लिए जंगली हाथियों की मौजूदगी बड़ा खतरा बनी हुई है।
हाथियों के प्राकृतिक आवास और मानव बस्तियों के बीच बढ़ता संपर्क संघर्ष की प्रमुख वजहों में से एक माना जाता है। भोजन और पानी की तलाश में हाथियों के आबादी वाले इलाकों में पहुंचने की घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं।
प्रवासी मजदूर की मौत के बाद हुआ था विरोध
दो दिन पहले जंगली हाथी के हमले में एक प्रवासी मजदूर की मौत के बाद इलाके में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। लोगों ने मानव-हाथी संघर्ष की समस्या का स्थायी समाधान करने और जानमाल की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की थी।
प्रदर्शन के बाद राज्य सरकार ने अम्माथी-सिद्धापुर इलाके में जंगली हाथियों को पकड़ने की मंजूरी दी थी। सरकार के इस फैसले के बाद वन विभाग ने हाथियों को पकड़ने की कार्रवाई तेज करने की दिशा में कदम उठाए।
स्थानीय लोगों की मांग है कि केवल हाथियों को पकड़ना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मानव बस्तियों में उनके प्रवेश को रोकने के लिए दीर्घकालिक उपाय भी किए जाने चाहिए।
वन विभाग के सामने बड़ी चुनौती
कोडागु में हाथियों को पकड़ने की कार्रवाई आसान नहीं होती। जंगल और एस्टेट क्षेत्र में हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखना चुनौतीपूर्ण होता है। इसके अलावा हाथियों को बेहोश करने और सुरक्षित स्थान पर ले जाने के दौरान वन विभाग की टीम को भी विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है।
पकड़े गए हाथी को दुबारे एलिफेंट कैंप भेजे जाने के बाद उसकी निगरानी की जाएगी। अधिकारियों के लिए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि हाथी को पकड़ने के बाद उसे किस तरह रखा जाए और भविष्य में वह मानव बस्तियों के लिए खतरा न बने।
स्थानीय लोगों में राहत की उम्मीद
यदुर गांव में मौत के लिए जिम्मेदार बताए जा रहे हाथी के पकड़े जाने से स्थानीय लोगों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि इलाके में हाथियों की मौजूदगी को देखते हुए ग्रामीणों की चिंता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
लोग चाहते हैं कि वन विभाग नियमित गश्त बढ़ाए और हाथियों की गतिविधियों के बारे में समय पर जानकारी उपलब्ध कराए। एस्टेट और जंगल से लगे क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूरों को भी हाथियों की मौजूदगी की स्थिति में सुरक्षा उपायों के बारे में जागरूक करने की जरूरत बताई जा रही है।
मानव-हाथी संघर्ष का स्थायी समाधान जरूरी
कोडागु में इस साल सात लोगों की मौत का आंकड़ा मानव-हाथी संघर्ष की गंभीरता को दर्शाता है। लगातार हो रही घटनाओं के कारण स्थानीय लोगों में डर बढ़ रहा है। खासकर एस्टेट में काम करने वाले मजदूरों और जंगल के आसपास रहने वाले परिवारों को हर समय सतर्क रहना पड़ता है।
यदुर गांव की घटना में जिम्मेदार बताए जा रहे हाथी को पकड़ लिया गया है, लेकिन विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों के लिए बड़ी चुनौती भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना है। इसके लिए हाथियों के आवागमन वाले क्षेत्रों की पहचान, प्रभावी निगरानी और मानव बस्तियों की सुरक्षा के उपायों को मजबूत करना जरूरी होगा।
फिलहाल वन विभाग की टीम पकड़े गए करीब 32 वर्षीय नर हाथी को दुबारे एलिफेंट कैंप भेजने की तैयारी कर रही है। वहीं, अम्माथी-सिद्धापुर क्षेत्र में हाथियों को पकड़ने की सरकारी मंजूरी के बाद आने वाले दिनों में वन विभाग की कार्रवाई और तेज होने की संभावना है।





