
बेंगलुरु। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई अचानक बाढ़ के कारण फंसे 54 कन्नड़ यात्री सुरक्षित कर्नाटक लौट आए हैं। लंबे समय से उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित परिवारों ने यात्रियों के वापस आने के बाद राहत की सांस ली।
सभी यात्री शनिवार रात बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचे, जहां उनके परिवार के सदस्य और संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
बाढ़ और भूस्खलन के कारण फंसे थे यात्री
जानकारी के अनुसार, ये कन्नड़ लोग मानसरोवर यात्रा समेत अन्य धार्मिक और पर्यटन उद्देश्यों से नेपाल-तिब्बत क्षेत्र में गए थे।
नेपाल-तिब्बत बॉर्डर क्षेत्र में अचानक आई भारी बाढ़ और खराब मौसम के कारण कई यात्री रास्ते में फंस गए थे।
क्षेत्र में सड़क मार्ग प्रभावित होने और भूस्खलन जैसी स्थिति बनने से यात्रियों की वापसी मुश्किल हो गई थी।
परिवारों में बनी हुई थी चिंता
यात्रियों के फंसने की जानकारी मिलने के बाद उनके परिवारों में चिंता का माहौल था।
कई परिवार लगातार प्रशासन और सरकार से संपर्क कर अपने परिजनों की सुरक्षित वापसी की मांग कर रहे थे।
यात्रियों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही थी और उन्हें सुरक्षित निकालने के प्रयास किए जा रहे थे।
शनिवार रात पहुंचे बेंगलुरु
राहत और बचाव प्रयासों के बाद सभी 54 यात्री सुरक्षित कर्नाटक लौट आए।
शनिवार रात जब वे बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचे तो उनके चेहरे पर राहत साफ दिखाई दे रही थी।
परिजनों ने यात्रियों का स्वागत किया और उन्हें सुरक्षित देखकर भावुक हो गए।
सरकार ने की थी निगरानी
कर्नाटक सरकार और अधिकारियों ने यात्रियों की वापसी के लिए लगातार स्थिति पर नजर बनाए रखी थी।
प्रशासन की ओर से यात्रियों की लोकेशन, स्वास्थ्य और सुरक्षित निकासी को लेकर संबंधित एजेंसियों से संपर्क किया गया था।
अधिकारियों ने यात्रियों की सुरक्षित वापसी को बड़ी राहत बताया।
प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हुआ था क्षेत्र
नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती इलाकों में भारी बारिश के कारण अचानक बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई थी।
कई जगहों पर सड़कें क्षतिग्रस्त हुईं और आवागमन प्रभावित हुआ।
इस वजह से वहां मौजूद पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
यात्रियों ने साझा किया अनुभव
वापस लौटे यात्रियों ने बताया कि बाढ़ और खराब मौसम के कारण हालात काफी मुश्किल हो गए थे।
उन्होंने बताया कि रास्ते बंद होने और लगातार बारिश के कारण सभी लोग चिंतित थे, लेकिन प्रशासनिक मदद और प्रयासों से उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला गया।
परिवारों ने जताया आभार
यात्रियों के परिजनों ने सरकार और बचाव दलों का आभार जताया।
उन्होंने कहा कि जब उन्हें अपने परिजनों के फंसे होने की जानकारी मिली थी, तब वे काफी परेशान थे।
सुरक्षित वापसी के बाद परिवारों ने राहत महसूस की।
आपदा के दौरान सतर्कता जरूरी
इस घटना ने एक बार फिर पहाड़ी और सीमावर्ती क्षेत्रों में यात्रा के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत को सामने ला दिया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे क्षेत्रों में मौसम की जानकारी लेकर ही यात्रा करनी चाहिए और आपदा की स्थिति में प्रशासन के निर्देशों का पालन करना चाहिए।
सुरक्षित वापसी से मिली बड़ी राहत
नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर फंसे 54 कन्नड़ यात्रियों की सुरक्षित वापसी ने उनके परिवारों की चिंता खत्म कर दी है।
हालांकि इस घटना ने प्राकृतिक आपदाओं के दौरान यात्रियों की सुरक्षा और बेहतर आपदा प्रबंधन व्यवस्था की जरूरत को भी उजागर किया है।





