कर्नाटक

लालबाग बचाने सड़क पर उतरे लोग

Kavita2
30 Aug 2026 4:13 PM IST
लालबाग बचाने सड़क पर उतरे लोग
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बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार के उस फैसले को लेकर विरोध तेज हो गया है, जिसमें शहर की ऐतिहासिक और हरियाली से भरपूर जगह लालबाग के करीब 5 प्रतिशत हिस्से को इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए इस्तेमाल करने की बात कही गई थी। रविवार को बड़ी संख्या में नागरिकों, पर्यावरण कार्यकर्ताओं और विभिन्न संगठनों के लोगों ने लालबाग पहुंचकर इस फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया।

प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि लालबाग के किसी भी हिस्से को निर्माण या अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर कार्यों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि लालबाग केवल एक पार्क नहीं, बल्कि बेंगलुरु के पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने वाला महत्वपूर्ण हरित क्षेत्र है।

लालबाग बचाने के लिए जुटे नागरिक

रविवार को आयोजित विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में प्लेकार्ड लेकर सरकार के फैसले का विरोध किया और नारे लगाए।

लोगों का कहना था कि शहर में तेजी से बढ़ते निर्माण कार्यों के बीच पहले ही हरित क्षेत्र कम होते जा रहे हैं। ऐसे में लालबाग जैसे ऐतिहासिक और पर्यावरणीय रूप से महत्वपूर्ण स्थान के हिस्से को किसी भी परियोजना के लिए देना उचित नहीं है।

बीजेपी नेताओं ने भी लिया हिस्सा

इस विरोध प्रदर्शन में कई प्रमुख नेता भी शामिल हुए। इनमें बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या, डॉ. मंजूनाथ और शोभा करंदलाजे समेत कई अन्य लोग मौजूद रहे।

प्रदर्शन के दौरान नेताओं और नागरिकों ने सरकार से अपने फैसले पर दोबारा विचार करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाएं जरूरी हैं, लेकिन इसके लिए शहर के महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों और हरित क्षेत्रों को नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए।

लालबाग सिर्फ पार्क नहीं, पर्यावरण की धरोहर

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लालबाग बेंगलुरु की पहचान से जुड़ा हुआ है।

यह क्षेत्र न केवल लोगों के घूमने और प्रकृति से जुड़ने का स्थान है, बल्कि शहर के पर्यावरण संतुलन में भी अहम भूमिका निभाता है।

लोगों के अनुसार, पेड़-पौधे और हरित क्षेत्र शहर में प्रदूषण कम करने, तापमान नियंत्रित करने और हवा की गुणवत्ता सुधारने में मदद करते हैं।

ऐसे में लालबाग के किसी भी हिस्से में निर्माण गतिविधि शुरू होने से पर्यावरण पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

इंफ्रास्ट्रक्चर बनाम पर्यावरण पर बहस

सरकार के फैसले के बाद बेंगलुरु में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन को लेकर बहस शुरू हो गई है।

एक तरफ शहर में बढ़ती आबादी, यातायात दबाव और इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत को देखते हुए नई परियोजनाओं की आवश्यकता बताई जा रही है।

वहीं, पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि विकास के नाम पर हरित क्षेत्रों को नुकसान पहुंचाना लंबे समय में शहर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।

नागरिक संगठनों ने जताई चिंता

प्रदर्शन में शामिल नागरिक संगठनों ने कहा कि लालबाग जैसे स्थानों को संरक्षित रखना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।

उन्होंने मांग की कि किसी भी परियोजना को मंजूरी देने से पहले पर्यावरणीय प्रभाव का विस्तृत अध्ययन किया जाना चाहिए।

संगठनों ने कहा कि शहर में पहले से मौजूद खाली जमीनों और वैकल्पिक स्थानों का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन हरित क्षेत्रों को बचाना जरूरी है।

सरकार से फैसला वापस लेने की मांग

प्रदर्शनकारियों ने सरकार से अपील की कि लालबाग के 5 प्रतिशत हिस्से को इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए देने के फैसले को वापस लिया जाए।

उनका कहना है कि लालबाग आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्राकृतिक विरासत है और इसे किसी भी कीमत पर सुरक्षित रखा जाना चाहिए।

आगे की रणनीति पर नजर

प्रदर्शन के बाद अब सभी की नजर सरकार की प्रतिक्रिया पर है।

पर्यावरण कार्यकर्ताओं और नागरिक संगठनों ने संकेत दिए हैं कि यदि फैसला वापस नहीं लिया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जा सकता है।

लालबाग को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब बेंगलुरु में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन की बड़ी बहस बन गया है।

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