
Jharkhand: गुमला जिले के भरनो प्रखंड स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में 10वीं की छात्रा प्रियंका कुमारी की संदिग्ध मौत के बाद माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया है। छात्रा का शव बुधवार को हॉस्टल के कमरे में फंदे से लटका मिला था, जिसके बाद गुरुवार को स्कूल परिसर के बाहर परिजनों और आदिवासी संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया। सुबह से ही बूढ़ीपाट गांव सहित आसपास के सैकड़ों ग्रामीण, समाजसेवी और आदिवासी संगठन के लोग स्कूल गेट पर जुट गए और न्याय की मांग करने लगे। भीड़ बढ़ने पर स्कूल प्रबंधन ने गेट बंद कर दिया, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों ने वहीं धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने शिक्षा विभाग और स्कूल प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों ने मामले की सीबीआई या एसआईटी जांच की मांग करते हुए दोषी वार्डन पर सख्त कार्रवाई की मांग की। स्कूल की वार्डन दिव्या स्वर्णा टोप्पो और प्रभारी वार्डन नूतन शशि टेटे से लोगों ने तीखे सवाल पूछे। वार्डन ने बताया कि वे छुट्टी पर थीं, जिस पर प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाते हुए प्रबंधन की जिम्मेदारी पर गंभीर आरोप लगाए। मृतका की मां ने रोते हुए कहा कि उनकी बेटी को पिछले चार दिनों से पेट दर्द था, लेकिन स्कूल ने इसकी सूचना नहीं दी और न ही इलाज कराया गया। परिजनों ने आरोप लगाया कि घटना की जानकारी देर से दी गई और पुलिस ने बिना उचित प्रक्रिया के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
प्रदर्शनकारियों का एक 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बाद में स्कूल के अंदर गया और अन्य छात्राओं से पूछताछ की। छात्राओं ने बताया कि प्रियंका पेट दर्द के कारण पीटी में नहीं गई थी और बाद में उसका कमरा अंदर से बंद मिला, जिसे तोड़ने पर वह फंदे से लटकी मिली। घटना के बाद परिजनों ने इसे आत्महत्या मानने से इनकार करते हुए स्कूल प्रशासन पर लापरवाही और साजिश का आरोप लगाया है। प्रशासन की ओर से मामले की जांच के संकेत दिए गए हैं। जिला शिक्षा पदाधिकारी, सीओ और पुलिस बल मौके पर मौजूद रहकर स्थिति को नियंत्रित करने में जुटे रहे।





