झारखंड

परीक्षा धांधली के आरोपों पर बवाल छात्रों के समर्थन में जयराम महतो का अनशन

Ratna Netam
9 Aug 2026 3:44 PM IST
परीक्षा धांधली के आरोपों पर बवाल छात्रों के समर्थन में जयराम महतो का अनशन
x
रांची : झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। पिछले 16 दिनों से छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरना और भूख हड़ताल पर बैठे हैं। आंदोलनकारी छात्र भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक, धांधली और अन्य कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। अब इस आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। जेएलकेएम विधायक जयराम महतो ने रविवार को छात्रों के समर्थन में पुराने विधानसभा परिसर में एक दिन का निर्जला अनशन किया।
जयराम महतो ने कहा कि उन्होंने छात्रों के आंदोलन को मजबूती देने और सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए एक दिन का निर्जला उपवास रखा है। उन्होंने बताया कि वह सुबह करीब 6 बजे से अनशन पर बैठे हैं। उनके मुताबिक, लंबे समय से आंदोलन कर रहे छात्रों की मांगों पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन युवाओं ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में वर्षों मेहनत की है, उनके भविष्य से जुड़े मुद्दों को केवल प्रशासनिक मामला मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
जयराम महतो ने राज्य सरकार पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार सत्ता में है और उसके पास संबंधित अधिकारियों से बातचीत करने तथा छात्रों की समस्याओं का समाधान निकालने की जिम्मेदारी है, तो आंदोलन के लंबे समय तक चलने का इंतजार क्यों किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों के साथ सीधे संवाद करना चाहिए और उनकी शिकायतों को सुनकर उचित कार्रवाई करनी चाहिए।
विधायक ने यह भी सवाल उठाया कि जब छात्र कई दिनों से धरने और भूख हड़ताल पर बैठे हैं और उनकी तबीयत बिगड़ने लगी है, तब जाकर प्रतिनिधियों के माध्यम से बातचीत करने की कोशिश क्यों की जा रही है। उन्होंने सरकार से आंदोलनकारी छात्रों के साथ गंभीरता से बातचीत करने और उनकी मांगों पर स्पष्ट जवाब देने की अपील की।
वहीं, आंदोलन में शामिल छात्र निशांत यादव ने सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही है। निशांत ने कहा कि छात्रों को मजबूर होकर आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार उनकी आवाज नहीं सुनती है तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
निशांत यादव ने खुद को भी प्रतियोगी परीक्षा का अभ्यर्थी बताते हुए कहा कि उन्होंने सीजीएल, जेपीएससी, पीजीटी और जेईटी जैसी परीक्षाएं दी हैं। उनका आरोप है कि इन परीक्षाओं में भी गड़बड़ी देखने को मिली। उन्होंने कहा कि छात्रों ने अपनी आंखों के सामने कथित अनियमितताओं को देखा है और इसी वजह से वे लगातार विरोध कर रहे हैं।
आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी सीधे युवाओं के भविष्य को प्रभावित करती है। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी कई वर्षों तक परीक्षा की तैयारी करते हैं। इसके लिए वे आर्थिक और मानसिक स्तर पर काफी मेहनत करते हैं। ऐसे में यदि परीक्षा प्रक्रिया में पेपर लीक या किसी अन्य तरह की अनियमितता सामने आती है तो पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं।
छात्रों की ओर से सरकार से मांग की जा रही है कि जिन परीक्षाओं को लेकर आरोप लगाए गए हैं, उनकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए। साथ ही अगर जांच में किसी तरह की गड़बड़ी या भ्रष्टाचार सामने आता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। छात्रों का यह भी कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि योग्य अभ्यर्थियों को उनका अधिकार मिल सके।
पिछले 16 दिनों से चल रहे आंदोलन के दौरान कई छात्र भूख हड़ताल पर भी बैठे हैं। लगातार भूख हड़ताल के कारण कुछ छात्रों की तबीयत बिगड़ने की बात कही जा रही है। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के बावजूद वे अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
जयराम महतो के एक दिन के निर्जला अनशन को छात्रों के आंदोलन के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है। इससे पहले भी झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रिया को लेकर छात्र संगठनों की ओर से विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं। अब जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे मौजूदा आंदोलन में राजनीतिक नेताओं की सक्रियता बढ़ने से सरकार पर दबाव और बढ़ सकता है।
हालांकि, परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, धांधली या अन्य अनियमितताओं को लेकर लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल आंदोलनकारी छात्र अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और सरकार से बातचीत तथा कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, आंदोलन के लंबा खिंचने और भूख हड़ताल कर रहे छात्रों की तबीयत बिगड़ने से प्रशासन के सामने भी स्थिति को संभालने की चुनौती बनी हुई है।
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं की नजर अब सरकार के अगले कदम पर है। छात्रों की मांगों पर सरकार क्या निर्णय लेती है और क्या आंदोलनकारी छात्रों के साथ औपचारिक बातचीत होती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल जयराम महतो के निर्जला अनशन के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा के केंद्र में आ गया है।
Next Story