झारखंड

JPSC-JSSC विवाद पर छात्रों की सरकार से तीसरे दौर की वार्ता

Kavita2
9 Aug 2026 3:19 PM IST
JPSC-JSSC विवाद पर छात्रों की सरकार से तीसरे दौर की वार्ता
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रांची। झारखंड में JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और अन्य मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों के प्रतिनिधिमंडल और राज्य सरकार के बीच बातचीत का तीसरा दौर शुरू हो गया है। छात्रों का एक प्रतिनिधिमंडल रविवार को रांची स्थित स्टेट गेस्ट हाउस पहुंचा, जहां सरकार की ओर से गठित चार मंत्रियों के दल के साथ उनकी वार्ता चल रही है। बातचीत को लेकर स्टेट गेस्ट हाउस परिसर के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

छात्रों की ओर से लगातार अपनी मांगों को लेकर आंदोलन किया जा रहा है। उनका कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जानी चाहिए। आंदोलन के बीच सरकार और छात्रों के बीच पहले भी बातचीत के दौर हो चुके हैं, लेकिन अब तीसरे दौर की वार्ता में समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है।

चार मंत्रियों के दल से बातचीत

सरकार की ओर से छात्रों से बातचीत के लिए चार मंत्रियों का दल मौजूद है। छात्र प्रतिनिधिमंडल अपनी मांगों और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को सरकार के सामने रख रहा है। वार्ता का उद्देश्य आंदोलनकारी छात्रों की चिंताओं को समझना और उनके समाधान के लिए संभावित रास्ते पर सहमति बनाना है।

छात्रों के प्रतिनिधिमंडल में आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हैं। बातचीत के दौरान वे JPSC और JSSC से संबंधित मुद्दों के अलावा भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, परीक्षा संचालन और अभ्यर्थियों की शिकायतों जैसे विषयों को प्रमुखता से उठा सकते हैं।

स्टेट गेस्ट हाउस के बाहर भारी सुरक्षा

छात्र प्रतिनिधिमंडल के स्टेट गेस्ट हाउस पहुंचने के बाद परिसर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।

प्रशासन की कोशिश है कि बातचीत शांतिपूर्ण माहौल में हो और वार्ता स्थल के आसपास कानून-व्यवस्था की स्थिति बनी रहे। सुरक्षा बलों की तैनाती के साथ आने-जाने वाले लोगों पर भी नजर रखी जा रही है।

परीक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों में नाराजगी

JPSC और JSSC राज्य में सरकारी नौकरियों के लिए महत्वपूर्ण भर्ती संस्थाएं हैं। इनसे जुड़ी परीक्षाओं में बड़ी संख्या में युवा शामिल होते हैं। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी को लेकर छात्रों की नाराजगी लंबे समय से सामने आती रही है।

आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में किसी भी तरह की अनियमितता का सीधा असर अभ्यर्थियों के भविष्य पर पड़ता है। वे चाहते हैं कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो और परीक्षा से संबंधित शिकायतों का निष्पक्ष तरीके से समाधान किया जाए।

पहले भी हो चुकी है बातचीत

छात्रों और सरकार के बीच इस मुद्दे पर पहले भी दो दौर की बातचीत हो चुकी है। हालांकि, इन वार्ताओं के बाद भी आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ। अब तीसरे दौर की बातचीत को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

छात्र प्रतिनिधिमंडल का प्रयास है कि सरकार उनकी मांगों पर ठोस आश्वासन दे। वहीं सरकार की ओर से भी आंदोलन समाप्त कराने और छात्रों की समस्याओं का समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है।

आंदोलन समाप्त कराने की कोशिश

सरकार और छात्रों के बीच चल रही वार्ता को आंदोलन समाप्त कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती है तो छात्रों का आंदोलन खत्म हो सकता है और परीक्षा तथा भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर बनी असमंजस की स्थिति दूर होने की संभावना है।

हालांकि, बातचीत के परिणाम पर अभी सभी की नजरें टिकी हुई हैं। छात्र प्रतिनिधिमंडल अपनी मांगों पर कितना स्पष्ट रुख रखता है और सरकार की ओर से किस तरह का आश्वासन दिया जाता है, यह वार्ता के बाद ही स्पष्ट होगा।

युवाओं के भविष्य से जुड़ा मामला

JPSC-JSSC की परीक्षाएं झारखंड के हजारों युवाओं के लिए सरकारी रोजगार पाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। लंबे समय से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण है।

छात्रों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता से मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों का भरोसा प्रभावित होता है। इसलिए वे केवल तत्काल समस्या का समाधान नहीं, बल्कि भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की मांग भी कर रहे हैं।

वार्ता के नतीजे पर टिकी निगाहें

फिलहाल रांची के स्टेट गेस्ट हाउस में छात्रों के प्रतिनिधिमंडल और चार मंत्रियों के दल के बीच तीसरे दौर की बातचीत जारी है। परिसर के बाहर भारी सुरक्षा बल की मौजूदगी के बीच सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि तीसरे दौर की बातचीत में दोनों पक्ष किसी सहमति तक पहुंच पाते हैं या नहीं। यदि सरकार छात्रों की प्रमुख मांगों पर स्पष्ट और ठोस आश्वासन देती है, तो आंदोलन को समाप्त करने की दिशा में रास्ता खुल सकता है। वहीं यदि मांगों पर सहमति नहीं बनती है तो छात्रों के आंदोलन के आगे भी जारी रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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