झारखंड

इलाज करवाने वालों को मिलेगी राहत, रिम्स की इमरजेंसी सेवा न्यू ट्रॉमा सेंटर में होगी शिफ्ट

Gulabi Jagat
13 Jun 2022 10:24 AM IST
इलाज करवाने वालों को मिलेगी राहत, रिम्स की इमरजेंसी सेवा न्यू ट्रॉमा सेंटर में होगी शिफ्ट
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इलाज करवाने वालों को मिलेगी राहत
रांची: राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स (RIMS Ranchi) में आज, 13 जून से न्यू ट्रॉमा सेंटर में इमरजेंसी सेवा शिफ्ट कर दी जाएगी. वर्तमान में पुरानी बिल्डिंग में ही इमरजेंसी सेवा चलाई जा रही है. पुराने इमरजेंसी में 15 बेड पर मरीजों के इलाज की व्यवस्था है. बेड फुल होने की स्थिति में मरीजों का इलाज स्ट्रेचर या ट्रॉली पर किया जाता है. इसके अलावा इमरजेंसी सेवा के लिए पुरानी बिल्डिंग में दो वेंटिलेटर की व्यवस्था है, जिसमें एक वेंटिलेटर काफी पुराना होने और प्रबंधन की ओर से देख रेख न मिलने पर भगवान भरोसे ही रहता है. हालांकि प्रबंधन का दावा है कि आज हर हाल में इमरजेंसी को नए ट्रामा सेंटर में शिफ्ट कर दिया जाएगा. रिम्स अधीक्षक डॉ हीरेंद्र बिरूवा ने बताया कि न्यू ट्रॉमा सेंटर में नई इमरजेंसी के शुरुआत को लेकर सारी तैयारी कर ली गई है. उसके बाद व्यवस्था में सुधार की उम्मीद की जा रही है.
नवंबर 2021 में ही करना था शिफ्ट: बता दें कि रिम्स प्रबंधन ने नवंबर 2021 में ट्रॉमा सेंटर में शिफ्ट करने का निर्देश दिया था लेकिन, कोरोना की वजह से नवंबर माह में इमरजेंसी शिफ्ट नहीं हो पाई. जिसके बाद रिम्स प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारियों ने मार्च 2022 में न्यू ट्रॉमा सेंटर का निरीक्षण किया ताकि इमरजेंसी की शुरुआत की जा सके. लेकिन मार्च महीने में भी इमरजेंसी सेवा न्यू ट्रॉमा सेंटर में बहाल नहीं हो पाई. रिम्स अधीक्षक डॉ हीरेंद्र बिरूवा ने बताया कि अभी जो व्यवस्था पुराने इमरजेंसी में है, फिलहाल उसी व्यवस्था के साथ न्यू ट्रॉमा सेंटर में इमरजेंसी सेवा को शुरू की जा रही है. धीरे-धीरे सारी व्यवस्थाएं बढ़ाई जाएंगी और ट्रॉमा सेंटर के हिसाब से इमरजेंसी को अत्याधुनिक रूप दिया जाएगा.रिम्स अधीक्षक डॉ हीरेंद्र बिरूवा
चार साल पहले हुई थी न्यू ट्रॉमा सेंटर की शुरुआत: गौरतलब है कि साल 2019 में तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने न्यू ट्रॉमा सेंटर की शुरुआत की थी लेकिन, 4 साल बीत जाने के बावजूद ट्रॉमा सेंटर का पूर्ण इस्तेमाल नहीं हो पाया. हालांकि अब प्रबंधन के इस निर्णय से यह उम्मीद जताई जा रही है कि रिम्स में आने वाले गंभीर घायल मरीजों को बेहतर आकस्मिक सेवा (EMERGENCY SERVICE) उपलब्ध हो पाएगी.
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