झारखंड

देवघर बाबा बैद्यनाथ मंदिर की अनोखी परंपरा

Kavita2
27 Aug 2026 4:31 PM IST
देवघर बाबा बैद्यनाथ मंदिर की अनोखी परंपरा
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देवघर। धर्म और आध्यात्म की नगरी देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ मंदिर अपनी धार्मिक मान्यताओं और अनोखी परंपराओं के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध है। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल बाबा बैद्यनाथ धाम को मनोकामना लिंग के रूप में विशेष मान्यता प्राप्त है। मान्यता है कि सच्चे मन से बाबा के दरबार में आने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

देवघर के बाबा बैद्यनाथ मंदिर से जुड़ी कई परंपराएं सदियों से चली आ रही हैं। यहां पूजा-पद्धति, श्रृंगार और धार्मिक अनुष्ठानों की अपनी अलग पहचान है। इन्हीं परंपराओं में एक बेहद खास परंपरा नाग मुकुट तैयार करने की भी है, जिसे देवघर मंडल कारा के कैदी तैयार करते हैं और फिर बाबा बैद्यनाथ को अर्पित किया जाता है।

कैदियों के हाथों तैयार होता है बाबा का नाग मुकुट

बाबा बैद्यनाथ मंदिर में शाम की श्रृंगार पूजा के दौरान भगवान शिव को विशेष रूप से तैयार किया गया नाग मुकुट पहनाया जाता है। इस नाग मुकुट को बनाने की जिम्मेदारी देवघर मंडल कारा के कैदियों की होती है।

कैदी पूरी श्रद्धा और सावधानी के साथ इस मुकुट को तैयार करते हैं। उनके द्वारा बनाया गया यह नाग मुकुट प्रतिदिन बाबा मंदिर पहुंचाया जाता है, जहां शाम की श्रृंगार पूजा के बाद इसे भगवान शिव को अर्पित किया जाता है।

यह परंपरा न सिर्फ धार्मिक आस्था से जुड़ी है, बल्कि समाज में सुधार और सकारात्मक बदलाव का संदेश भी देती है। कैदियों को इस कार्य के माध्यम से धार्मिक सेवा से जुड़ने का अवसर मिलता है।

114 साल पुरानी परंपरा

बताया जाता है कि इस अनोखी परंपरा की शुरुआत आज से करीब 114 साल पहले देवघर में तैनात एक जेलर ने की थी। उस समय जेलर ने कैदियों को धार्मिक कार्यों से जोड़ने के उद्देश्य से नाग मुकुट तैयार करने की परंपरा शुरू कराई थी।

धीरे-धीरे यह परंपरा बाबा बैद्यनाथ मंदिर की विशेष पहचान बन गई। वर्षों से जेल के कैदी इस सेवा कार्य को पूरी श्रद्धा के साथ निभाते आ रहे हैं।

रावण और भगवान राम से जुड़ी मान्यताएं

बाबा बैद्यनाथ धाम को लेकर कई पौराणिक मान्यताएं प्रचलित हैं। कहा जाता है कि लंकापति रावण ने भगवान शिव की कठोर तपस्या कर उन्हें प्रसन्न किया था। वहीं मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की कांवर यात्रा की कथा भी बाबा धाम से जुड़ी हुई बताई जाती है।

श्रद्धालुओं का विश्वास है कि बाबा बैद्यनाथ के दर्शन मात्र से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यही कारण है कि देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु हर साल देवघर पहुंचते हैं।

पूजा पद्धति और विशेष परंपराएं

बाबा बैद्यनाथ मंदिर में पूजा की अपनी अलग विधि है। यहां प्रातःकालीन पूजा, कांचा जल अर्पण और विशेष श्रृंगार की परंपरा वर्षों से चली आ रही है।

सुबह बाबा का जलाभिषेक करने के बाद विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। वहीं शाम के समय श्रृंगार पूजा का आयोजन होता है, जिसमें बाबा को विशेष रूप से सजाया जाता है। इसी दौरान नाग मुकुट अर्पित करने की परंपरा निभाई जाती है।

महाशिवरात्रि पर बदल जाती है पूजा व्यवस्था

महाशिवरात्रि के दिन बाबा बैद्यनाथ मंदिर में पूजा व्यवस्था में विशेष बदलाव किया जाता है। इस दिन चार पहर की पूजा होती है। भगवान शिव की विशेष आराधना के कारण शाम की सामान्य श्रृंगार पूजा नहीं होती है।

महाशिवरात्रि पर देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए देवघर पहुंचते हैं। मंदिर में पूरे दिन धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-पाठ का माहौल रहता है।

आस्था और सुधार का संदेश देती परंपरा

देवघर मंडल कारा के कैदियों द्वारा नाग मुकुट तैयार करने की परंपरा अपने आप में अनूठी है। यह परंपरा जहां बाबा बैद्यनाथ के प्रति आस्था को दर्शाती है, वहीं यह भी संदेश देती है कि हर व्यक्ति को सुधार और सकारात्मक कार्यों से जुड़ने का अवसर मिलना चाहिए।

कैदियों के हाथों तैयार होकर जब नाग मुकुट बाबा के मस्तक पर सजता है तो यह धार्मिक आस्था और मानवीय संवेदना का सुंदर संगम दिखाई देता है।

देवघर की यही विशेष परंपराएं बाबा बैद्यनाथ धाम को अन्य धार्मिक स्थलों से अलग पहचान दिलाती हैं। सदियों पुरानी मान्यताओं और परंपराओं के कारण यह स्थान आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है।

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