
रांची। झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और परीक्षा प्रक्रिया में सुधार की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों और राज्य सरकार के बीच रविवार को हुई बातचीत का छठा दौर भी किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सका। करीब एक सप्ताह से अधिक समय से जारी छात्र आंदोलन के बीच हुई इस बैठक में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीरता से बात नहीं करने का आरोप लगाया। सरकार की ओर से गठित प्रतिनिधिमंडल ने जहां दावा किया कि छात्रों की करीब 98 प्रतिशत मांगें स्वीकार की जा चुकी हैं, वहीं छात्रों ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि उनकी प्रमुख मांगों पर अब भी स्पष्ट समाधान नहीं हुआ है।
बैठक के बाद भी आंदोलन समाप्त नहीं हुआ और छात्रों ने अपनी मांगों पर कायम रहने का संकेत दिया। इससे झारखंड में प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं की व्यवस्था को लेकर चल रहा विवाद फिलहाल जारी रहने की संभावना है।
छठे दौर की बातचीत भी नहीं बनी सहमति
रविवार को सरकार और आंदोलनरत छात्रों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का छठा दौर आयोजित किया गया। उम्मीद थी कि लगातार बातचीत के बाद दोनों पक्ष किसी समझौते तक पहुंच सकते हैं, लेकिन बैठक में गतिरोध दूर नहीं हो सका।
सरकारी पैनल ने बातचीत के दौरान छात्रों के सामने सरकार की ओर से उठाए गए कदमों और स्वीकार की गई मांगों का पक्ष रखा। अधिकारियों का कहना था कि सरकार छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से ले रही है और उनकी अधिकांश मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई की जा चुकी है।
सरकारी पक्ष के मुताबिक, जब करीब 98 प्रतिशत मांगों को स्वीकार किया जा चुका है तो आंदोलन को जारी रखने का कोई औचित्य नहीं होना चाहिए। पैनल ने छात्रों के आंदोलन वापस नहीं लेने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
हालांकि, छात्रों ने सरकार के इस दावे पर सवाल उठाया। छात्र प्रतिनिधियों का कहना था कि जिन मांगों को सरकार पूरा करने का दावा कर रही है, उनमें उनकी मुख्य और मूल चिंताएं शामिल नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस और स्पष्ट फैसला नहीं होता, तब तक आंदोलन समाप्त करने का सवाल नहीं उठता।
छात्रों ने सरकारी दावे को बताया गलत
आंदोलन कर रहे छात्रों ने सरकार के ‘98 प्रतिशत मांगें मानने’ के दावे को गलत बताया। उनका कहना है कि केवल कुछ मांगों पर सहमति या आश्वासन मिलने को सभी मांगों के समाधान के रूप में पेश नहीं किया जा सकता।
छात्रों का मुख्य जोर भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने, कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने और भविष्य में ऐसी शिकायतों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस व्यवस्था बनाने पर है।
छात्र प्रतिनिधियों ने बातचीत के दौरान अपनी चिंताओं को दोहराया और सरकार से लिखित तथा स्पष्ट आश्वासन की मांग की। उनका कहना है कि केवल मौखिक आश्वासन से उन्हें भरोसा नहीं हो रहा है।
भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी का आरोप
छात्रों का आंदोलन राज्य में आयोजित विभिन्न भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के आरोपों को लेकर शुरू हुआ है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता से जुड़े कई सवाल उठे हैं।
छात्रों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले हजारों अभ्यर्थी लंबे समय तक तैयारी करते हैं। ऐसे में परीक्षा से जुड़ी किसी भी तरह की अनियमितता उनके भविष्य पर सीधा असर डालती है।
उन्होंने परीक्षा प्रणाली में तकनीकी और प्रशासनिक खामियों को दूर करने के साथ-साथ शिकायतों के निपटारे के लिए प्रभावी तंत्र बनाने की मांग की है।
सरकार ने बताया बातचीत को सकारात्मक
सरकार की ओर से बातचीत को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने की कोशिश की गई। अधिकारियों ने छात्रों को यह भरोसा दिलाने का प्रयास किया कि उनकी शिकायतों पर विचार किया जा रहा है और जहां आवश्यक है, वहां सुधार के कदम उठाए जाएंगे।
सरकारी पैनल का तर्क है कि छात्रों की अधिकांश मांगों पर सहमति बन चुकी है। ऐसे में आंदोलन जारी रखना समाधान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के बजाय गतिरोध को बढ़ा सकता है।
सरकार की ओर से यह भी संकेत दिया गया कि छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए परीक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
छात्रों का आंदोलन जारी रहने के संकेत
छठे दौर की वार्ता के बाद छात्रों की ओर से आंदोलन समाप्त करने की घोषणा नहीं की गई। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मुख्य मांगों पर स्पष्ट समाधान नहीं मिलता, वे पीछे नहीं हटेंगे।
छात्रों का तर्क है कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति या राजनीतिक संगठन के खिलाफ नहीं, बल्कि भर्ती परीक्षा व्यवस्था में सुधार और अभ्यर्थियों के भविष्य की सुरक्षा के लिए है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। उनका दावा है कि यदि परीक्षा प्रणाली पर अभ्यर्थियों का विश्वास कमजोर होता है तो इसका असर पूरी भर्ती प्रक्रिया पर पड़ता है।
गतिरोध खत्म करना सरकार के लिए चुनौती
लगातार छह दौर की बातचीत के बावजूद सहमति नहीं बन पाने से सरकार के सामने अब गतिरोध खत्म करने की चुनौती है। एक ओर सरकार यह दावा कर रही है कि उसने छात्रों की लगभग सभी मांगों को स्वीकार कर लिया है, वहीं दूसरी ओर छात्र इस दावे को ही खारिज कर रहे हैं।
ऐसे में अगली बातचीत का फोकस इस बात पर रह सकता है कि सरकार द्वारा स्वीकार की गई मांगों और छात्रों की वास्तविक अपेक्षाओं के बीच अंतर को कैसे दूर किया जाए।
यदि दोनों पक्ष लिखित रूप में मांगों और उनके समाधान की समयसीमा पर सहमत होते हैं तो विवाद खत्म करने का रास्ता खुल सकता है। वहीं, यदि छात्रों की प्रमुख मांगों पर स्थिति स्पष्ट नहीं होती है तो आंदोलन आगे भी जारी रह सकता है।
आगे की बातचीत पर टिकी नजर
रविवार की बैठक के बाद फिलहाल दोनों पक्षों के बीच गतिरोध कायम है। सरकार जहां छात्रों से आंदोलन समाप्त कर बातचीत के जरिए आगे बढ़ने की अपील कर रही है, वहीं छात्र अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।
छठे दौर की वार्ता का बेनतीजा रहना इस पूरे विवाद को लंबा खींच सकता है। अब निगाहें सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच होने वाली अगली बातचीत पर हैं। दोनों पक्षों के बीच यदि भरोसा कायम होता है और सरकार छात्रों की प्रमुख मांगों पर ठोस रोडमैप देती है, तो आंदोलन समाप्त होने की संभावना बन सकती है।
फिलहाल इतना साफ है कि झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों और सरकार के बीच विश्वास की कमी दूर नहीं हुई है। 98 प्रतिशत मांगें स्वीकार करने के सरकार के दावे और उसे गलत बताने वाले छात्रों के रुख के बीच खड़ा यह मतभेद ही मौजूदा गतिरोध की सबसे बड़ी वजह बना हुआ है।





