
रांची। झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर पिछले कई दिनों से जारी छात्र आंदोलन के बीच सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच बातचीत में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। छात्रों के प्रतिनिधिमंडल के साथ करीब छह घंटे चली वार्ता के बाद राज्य सरकार ने तीन परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमति जताई है। इनमें झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा भी शामिल है। हालांकि, सरकार के इस कदम के बावजूद छात्रों का आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और कई महत्वपूर्ण मांगों को लेकर गतिरोध बरकरार है।
छात्र लंबे समय से विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। रांची में जारी प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है। छात्रों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी किसी भी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिससे भविष्य में अभ्यर्थियों के हित प्रभावित न हों।
छह घंटे चली वार्ता
सरकार और छात्रों के प्रतिनिधियों के बीच करीब छह घंटे तक बातचीत चली। वार्ता के दौरान छात्रों की विभिन्न मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई। बातचीत के बाद सरकार ने तीन परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमति जताई। इनमें JPSC कंबाइंड सिविल सर्विसेज की प्रारंभिक परीक्षा भी शामिल है। सरकार की ओर से कुछ अन्य मांगों पर भी सकारात्मक रुख दिखाए जाने की बात सामने आई है।
हालांकि, वार्ता के बाद भी छात्रों ने आंदोलन समाप्त करने का फैसला नहीं किया। रिपोर्टों के अनुसार, छात्र जांच की प्रकृति और कुछ अन्य मांगों को लेकर अब भी संतुष्ट नहीं हैं। प्रदर्शनकारी अपनी प्रमुख मांगों पर स्पष्ट और ठोस कार्रवाई चाहते हैं।
कथित वित्तीय गड़बड़ी की जांच पर भी चर्चा
JPSC परीक्षा को लेकर छात्रों की ओर से कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच की मांग उठाई गई थी। सरकार ने इस मामले की जांच को लेकर भी सहमति जताई है। हालांकि, जांच एजेंसी को लेकर सरकार और छात्रों की अपेक्षाओं में अंतर बना हुआ है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक छात्र केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच की मांग पर कायम हैं, जबकि सरकार की ओर से जांच के लिए अन्य एजेंसियों को लेकर सहमति जताई गई है।
यही मुद्दा छात्रों और सरकार के बीच जारी गतिरोध की प्रमुख वजहों में से एक बना हुआ है। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि परीक्षा से जुड़े आरोपों की ऐसी स्वतंत्र जांच हो, जिससे पूरी प्रक्रिया पर उनका भरोसा बहाल हो सके।
तीन JPSC सदस्यों के इस्तीफे से भी नहीं माने छात्र
इस बीच JPSC के तीन सदस्यों के इस्तीफे ने भी मामले को नया मोड़ दिया है। इन सदस्यों ने एक दिन पहले अपना इस्तीफा दे दिया था। सरकार की ओर से इसे संस्थागत स्तर पर उठाया गया कदम माना जा रहा है, लेकिन छात्र इससे संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि केवल सदस्यों के इस्तीफे से उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होगा।
छात्र परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की व्यापक जांच, जिम्मेदारी तय करने और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बनने की गारंटी चाहते हैं। यही वजह है कि सदस्यों के इस्तीफे के बावजूद आंदोलन जारी है।
16 दिनों से जारी है आंदोलन
रांची में छात्रों का विरोध प्रदर्शन करीब 16 दिनों से जारी बताया जा रहा है। इस दौरान बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने विभिन्न मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन किया है। आंदोलन का मुख्य केंद्र भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताएं और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग है।
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में अभ्यर्थी वर्षों का समय और संसाधन लगाते हैं। ऐसे में यदि परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी होती है तो उसका सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ता है। इसलिए सरकार को शिकायतों की निष्पक्ष जांच के साथ ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जिससे अभ्यर्थियों का विश्वास कायम रहे।
आंदोलन जारी रखने की तैयारी
सरकार के साथ बातचीत में कुछ मांगों पर सहमति बनने के बावजूद छात्रों ने आंदोलन समाप्त नहीं किया है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनकारी विधानसभा की ओर मार्च और घेराव की योजना पर भी आगे बढ़ रहे हैं। इससे साफ है कि परीक्षा रद्द करने और जांच पर सहमति बनने के बावजूद सरकार और छात्रों के बीच सभी मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई है।
छात्र नेताओं का कहना है कि सरकार द्वारा जिन मांगों को स्वीकार किए जाने की बात कही जा रही है, उनमें से कई पर अभी स्पष्टता जरूरी है। वहीं सरकार का पक्ष है कि बातचीत के माध्यम से छात्रों की बड़ी संख्या में मांगों को संबोधित करने की कोशिश की गई है। इस स्थिति में आगे की बातचीत आंदोलन को समाप्त कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
परीक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे आंदोलन ने राज्य की परीक्षा व्यवस्था और आयोगों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं। अभ्यर्थियों की मांग है कि परीक्षा आयोजित करने से लेकर परिणाम जारी करने तक पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो। किसी भी शिकायत की स्थिति में समयबद्ध जांच और कार्रवाई की व्यवस्था होनी चाहिए।
सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक ओर उसे छात्रों की मांगों का समाधान करना है, वहीं दूसरी ओर भर्ती परीक्षा प्रणाली में भरोसा बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। तीन परीक्षाओं को रद्द करने की सहमति इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, लेकिन आंदोलन खत्म कराने के लिए छात्रों की बाकी मांगों पर भी स्पष्ट निर्णय जरूरी होगा।
फिलहाल झारखंड में छात्रों और सरकार के बीच बातचीत से कुछ रास्ता जरूर खुला है, लेकिन गतिरोध पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। तीन परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमति, JPSC से जुड़े मामलों की जांच और आयोग के तीन सदस्यों के इस्तीफे के बावजूद छात्र अपनी अन्य मांगों पर कायम हैं। अब आने वाले दिनों में सरकार और छात्रों के बीच होने वाली बातचीत यह तय करेगी कि करीब 16 दिनों से जारी आंदोलन समाप्त होता है या प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन को और तेज करते हैं।





