
Jharkhand झारखण्ड : दक्षिण पूर्व रेलवे (SER) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में माल ढुलाई के क्षेत्र में शानदार प्रदर्शन दर्ज किया है। अप्रैल से जून 2026 के बीच तैयार इस्पात (Finished Steel) की रिकॉर्ड ढुलाई के चलते रेलवे की माल भाड़ा आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
रेलवे के आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में तैयार इस्पात की लोडिंग में 18.22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इस बढ़ोतरी के परिणामस्वरूप दक्षिण पूर्व रेलवे को तैयार इस्पात की ढुलाई से करीब 810 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह उपलब्धि क्षेत्र में मौजूद बड़े इस्पात उद्योगों और दक्षिण पूर्व रेलवे के बीच बेहतर समन्वय का परिणाम है। देश के प्रमुख इस्पात संयंत्रों से निकलने वाले तैयार उत्पादों को देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाने में दक्षिण पूर्व रेलवे की अहम भूमिका है।
बोकारो और टाटा स्टील बने प्रमुख आधार
दक्षिण पूर्व रेलवे के माल परिवहन में झारखंड और आसपास के क्षेत्रों में स्थित बड़े इस्पात संयंत्रों का महत्वपूर्ण योगदान है। रेलवे के आद्रा मंडल के अंतर्गत आने वाला बोकारो स्टील प्लांट और चक्रधरपुर मंडल क्षेत्र में स्थित टाटा स्टील देश के प्रमुख इस्पात उत्पादकों में शामिल हैं।
इन संयंत्रों से तैयार इस्पात की नियमित आपूर्ति देश के अलग-अलग राज्यों और औद्योगिक क्षेत्रों तक की जाती है। इसके लिए रेलवे की मालगाड़ियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, तैयार इस्पात की बढ़ती मांग और बेहतर माल परिवहन व्यवस्था के कारण इस क्षेत्र में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।
माल ढुलाई से बढ़ा रेलवे का राजस्व
भारतीय रेलवे की आय में माल ढुलाई का बड़ा योगदान होता है। कोयला, लौह अयस्क, इस्पात, सीमेंट और अन्य औद्योगिक उत्पादों की ढुलाई रेलवे के लिए प्रमुख राजस्व स्रोत हैं।
दक्षिण पूर्व रेलवे ने पहली तिमाही में तैयार इस्पात की ढुलाई बढ़ाकर अपनी माल भाड़ा आय को मजबूत किया है। अधिकारियों का कहना है कि उद्योगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए रेलवे लगातार अपनी माल परिवहन क्षमता बढ़ाने पर काम कर रहा है।
बेहतर लॉजिस्टिक्स सुविधा, समय पर माल पहुंचाने की क्षमता और उद्योगों के साथ बेहतर तालमेल ने इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
औद्योगिक विकास को मिल रहा समर्थन
इस्पात उद्योग देश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। निर्माण, ऑटोमोबाइल, इंफ्रास्ट्रक्चर और कई अन्य उद्योगों में इस्पात की मांग लगातार बनी रहती है।
दक्षिण पूर्व रेलवे द्वारा इस्पात की सुचारू ढुलाई से उद्योगों को भी फायदा मिलता है। समय पर कच्चे माल और तैयार उत्पादों की आवाजाही से उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होती है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़ी माल ढुलाई को बढ़ावा देना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है।
आधुनिक सुविधाओं से मजबूत हो रहा नेटवर्क
दक्षिण पूर्व रेलवे अपने माल परिवहन नेटवर्क को मजबूत करने के लिए लगातार कई कदम उठा रहा है। इसमें ट्रैक क्षमता बढ़ाना, मालगाड़ियों की गति में सुधार और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं का विस्तार शामिल है।
रेलवे का लक्ष्य है कि उद्योगों को तेज, सुरक्षित और किफायती परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। इसके लिए प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों को रेलवे नेटवर्क से बेहतर तरीके से जोड़ा जा रहा है।
आगे भी वृद्धि की उम्मीद
रेलवे अधिकारियों को उम्मीद है कि आने वाले महीनों में तैयार इस्पात की ढुलाई में और वृद्धि होगी। उद्योगों की बढ़ती मांग और बेहतर परिवहन व्यवस्था के कारण माल भाड़ा आय में भी सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।
दक्षिण पूर्व रेलवे का कहना है कि वह अपने प्रमुख ग्राहकों के साथ लगातार संपर्क में है और उनकी जरूरतों के अनुसार माल परिवहन सेवाओं को बेहतर बनाने पर काम कर रहा है।
क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा लाभ
इस्पात ढुलाई में वृद्धि का लाभ केवल रेलवे को ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मिलने की संभावना है। बड़े उद्योगों की गतिविधियां बढ़ने से रोजगार, व्यापार और स्थानीय बाजारों को भी मजबूती मिलती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रेलवे और उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल से देश के औद्योगिक विकास को नई गति मिल सकती है।
दक्षिण पूर्व रेलवे की पहली तिमाही की यह उपलब्धि माल परिवहन क्षेत्र में उसकी मजबूत स्थिति को दर्शाती है। तैयार इस्पात की रिकॉर्ड ढुलाई और 810 करोड़ रुपये के राजस्व ने रेलवे के प्रदर्शन को नई मजबूती दी है।





