
झारखंड : स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़ी पहल की तैयारी शुरू हो गई है। राजधानी रांची के इटकी क्षेत्र में देश के प्रतिष्ठित ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेदा (AIIA) की तर्ज पर एक अत्याधुनिक स्वास्थ्य संस्थान विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। प्रस्तावित परियोजना के तहत यहां विश्वस्तरीय अस्पताल, आयुर्वेद अनुसंधान केंद्र और आधुनिक योग सेंटर स्थापित किए जाने की तैयारी है।
केंद्र सरकार के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने की दिशा में गुरुवार को उच्च अधिकारियों की एक टीम ने रांची के इटकी सेनोटोरियम का दौरा किया। टीम ने प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण कर जमीन, सुविधाओं और निर्माण की संभावनाओं का जायजा लिया।
50 एकड़ जमीन पर विकसित होगा संस्थान
इस परियोजना के लिए इटकी सेनोटोरियम की लगभग 50 एकड़ प्राइम लैंड को चिन्हित किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि यह स्थान एक बड़े स्वास्थ्य संस्थान के निर्माण के लिए उपयुक्त है। पर्याप्त क्षेत्रफल होने के कारण भविष्य में यहां स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की भी संभावनाएं मौजूद रहेंगी।
प्रस्तावित संस्थान के माध्यम से झारखंड को आयुर्वेद चिकित्सा, शोध और प्रशिक्षण के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
उच्चस्तरीय टीम ने किया निरीक्षण
परियोजना की प्रगति को लेकर गुरुवार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा और आयुर्वेदा विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. कृष्ण कुमार समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों की टीम इटकी पहुंची।
अधिकारियों ने स्थल का निरीक्षण करने के साथ ही स्थानीय प्रशासन से भी जानकारी ली। टीम ने जमीन की स्थिति, पहुंच मार्ग, आसपास के क्षेत्र और आवश्यक बुनियादी सुविधाओं को लेकर चर्चा की।
माना जा रहा है कि इस दौरे के बाद परियोजना की आगे की रूपरेखा तैयार करने में मदद मिलेगी।
एम्स की तर्ज पर मिलेगी आधुनिक सुविधा
प्रस्तावित आयुर्वेद संस्थान को देश के बड़े चिकित्सा संस्थानों की तर्ज पर विकसित करने की योजना है। इसमें आधुनिक अस्पताल सुविधाओं के साथ आयुर्वेद आधारित उपचार पद्धतियों को बढ़ावा दिया जाएगा।
संस्थान में मरीजों के इलाज के लिए अत्याधुनिक अस्पताल, आयुर्वेद चिकित्सा पर शोध के लिए रिसर्च सेंटर और योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा से जुड़े कार्यक्रमों के लिए विशेष केंद्र विकसित किए जाएंगे।
इसका उद्देश्य पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धति को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक शोध के साथ जोड़ना है।
स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा बड़ा विस्तार
झारखंड में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की लंबे समय से मांग रही है। राज्य के कई मरीजों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता है। ऐसे में रांची में राष्ट्रीय स्तर के आयुर्वेद संस्थान की स्थापना से लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
यह संस्थान न केवल रांची बल्कि पूरे झारखंड और आसपास के राज्यों के मरीजों के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र बन सकता है।
आयुर्वेद और योग को मिलेगा बढ़ावा
देश में आयुर्वेद और योग को लेकर लगातार बढ़ती रुचि के बीच यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। संस्थान में इलाज के साथ-साथ आयुर्वेदिक दवाओं, चिकित्सा तकनीकों और योग आधारित उपचार पद्धतियों पर शोध को बढ़ावा दिया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के संस्थान भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को वैश्विक स्तर पर मजबूत करने में मदद करेंगे।
रोजगार और शिक्षा के अवसर बढ़ेंगे
प्रस्तावित परियोजना से स्वास्थ्य क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। अस्पताल, रिसर्च सेंटर और प्रशिक्षण संस्थान के संचालन के लिए डॉक्टरों, शोधकर्ताओं, तकनीकी कर्मचारियों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की जरूरत होगी।
इसके अलावा आयुर्वेद की पढ़ाई करने वाले छात्रों और शोधार्थियों को भी बेहतर अवसर मिल सकेंगे।
केंद्र सरकार की बड़ी पहल
केंद्र सरकार देश में आयुष चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाओं पर काम कर रही है। इसी क्रम में झारखंड में प्रस्तावित यह परियोजना आयुर्वेद के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए जमीन से जुड़ी औपचारिकताओं, तकनीकी मूल्यांकन और अन्य जरूरी प्रक्रियाओं को पूरा किया जाएगा।
स्थानीय लोगों में जगी उम्मीद
इटकी क्षेत्र में इस परियोजना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय लोगों में भी उत्साह है। लोगों का कहना है कि इतने बड़े संस्थान के आने से क्षेत्र में विकास की गति बढ़ेगी और रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
स्थानीय स्तर पर सड़क, परिवहन और अन्य सुविधाओं के विस्तार की भी उम्मीद जताई जा रही है।
आगे की प्रक्रिया पर नजर
फिलहाल यह परियोजना शुरुआती चरण में है और अधिकारियों द्वारा स्थल निरीक्षण के बाद आगे की योजना तैयार की जा रही है। यदि यह प्रस्ताव अंतिम रूप लेता है तो रांची का इटकी क्षेत्र देश के प्रमुख आयुर्वेदिक स्वास्थ्य और अनुसंधान केंद्रों में शामिल हो सकता है।
झारखंड के लिए यह परियोजना स्वास्थ्य सेवाओं, आयुर्वेदिक शोध और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक नई शुरुआत साबित हो सकती है।





