
झारखंड: सरायकेला-खरसावां जिले के खरसावां प्रखंड स्थित उत्क्रमित उच्च विद्यालय पदमपुर में स्मार्ट क्लास के डिजिटल बोर्ड पर अश्लील वीडियो चलने का मामला सामने आने के बाद विवाद बढ़ गया है। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद शनिवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण विद्यालय पहुंचे और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जताई। ग्रामीणों ने मामले में दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने के साथ ही प्रभारी प्राचार्य के स्थानांतरण की मांग उठाई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) कैलाश मिश्रा विद्यालय पहुंचे और पूरे घटनाक्रम की जांच की। उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत कर उन्हें शांत कराया और आश्वासन दिया कि जांच के बाद दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। डीईओ ने विद्यालय के कार्यालय, स्मार्ट क्लास और संबंधित विद्यार्थियों से पूछताछ कर घटना की जानकारी जुटाई।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि स्मार्ट क्लास के डिजिटल बोर्ड पर वीडियो चलाने में शिक्षकों या प्रभारी प्राचार्य की प्रत्यक्ष भूमिका नहीं मिली है। जांच के दौरान यह बात सामने आई कि विद्यालय के दो छात्र अपने साथ मोबाइल लेकर आए थे और उन्हीं छात्रों ने मोबाइल को डिजिटल बोर्ड से जोड़कर आपत्तिजनक वीडियो चला दिया था।
डीईओ कैलाश मिश्रा ने बताया कि घटना के समय विद्यालय के दो शिक्षक अवकाश पर थे, जबकि क्लर्क कुछ समय के लिए दूसरे कमरे में चले गए थे। इसी दौरान छात्रों ने डिजिटल बोर्ड का गलत इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि स्मार्ट क्लास जैसी आधुनिक सुविधा का उपयोग पढ़ाई के लिए किया जाता है, ऐसे में इस तरह की घटना गंभीर लापरवाही को दर्शाती है।
मामले में विद्यालय के क्लर्क को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उनसे पूरे घटनाक्रम को लेकर जवाब मांगा गया है। जवाब मिलने के बाद विभाग आगे की कार्रवाई करेगा। शिक्षा विभाग ने कहा है कि विद्यालयों में डिजिटल संसाधनों के उपयोग पर निगरानी और बढ़ाई जाएगी ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
घटना से नाराज ग्रामीणों ने विद्यालय प्रबंधन पर सवाल उठाए। ग्रामीणों का कहना था कि यदि स्मार्ट क्लास में शिक्षक या जिम्मेदार कर्मचारी मौजूद नहीं थे तो छात्रों को अकेला क्यों छोड़ा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि विद्यालय में निगरानी व्यवस्था कमजोर होने के कारण ऐसी स्थिति बनी। ग्रामीणों ने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों ने प्रभारी प्राचार्य की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए उनके स्थानांतरण की मांग की। उनका कहना था कि स्कूल में अनुशासन बनाए रखना प्रबंधन की जिम्मेदारी है। यदि छात्रों को समय पर निगरानी में रखा जाता तो ऐसी घटना नहीं होती।
घटना की सूचना मिलने के बाद खरसावां थाना प्रभारी राहुल सिंह भी विद्यालय पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत कर स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने भी मामले की जानकारी ली और शिक्षा विभाग की जांच प्रक्रिया में सहयोग करने की बात कही।
शिक्षा विभाग का कहना है कि अभी जांच प्रारंभिक स्तर पर है। सभी पहलुओं की जांच के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। अधिकारियों ने विद्यालय प्रबंधन को निर्देश दिए हैं कि स्मार्ट क्लास और डिजिटल उपकरणों के इस्तेमाल के दौरान विशेष सावधानी बरती जाए।
इस घटना ने सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा व्यवस्था की निगरानी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्ट क्लास जैसी सुविधाएं बच्चों की पढ़ाई को बेहतर बनाने के लिए हैं, लेकिन इनके सुरक्षित और सही उपयोग के लिए शिक्षकों की निगरानी बेहद जरूरी है। विभाग अब इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए स्कूलों में डिजिटल संसाधनों के इस्तेमाल के लिए नए दिशा-निर्देश जारी करने की तैयारी कर सकता है।





