झारखंड

नोवामुंडी में हाथियों का आतंक, घर छोड़ स्कूल में रह रहे ग्रामीण

Saba Naaz
25 July 2026 7:00 PM IST
नोवामुंडी में हाथियों का आतंक, घर छोड़ स्कूल में रह रहे ग्रामीण
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झारखंड: पश्चिमी सिंहभूम जिले के नोवामुंडी क्षेत्र में जंगली हाथियों के आतंक ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दुधबिला पंचायत के बाहदा गांव स्थित डामुका साई टोला में हाथियों के झुंड ने लगातार दो रातों तक एक ही घर को निशाना बनाया। हाथियों के हमले के बाद ग्रामीणों में डर का माहौल है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि गांव की महिलाएं अपने घरों को छोड़कर बंद पड़े स्कूल के बरामदे में रात बिताने को मजबूर हैं, जबकि पुरुष पूरी रात लाठी-डंडे लेकर हाथियों को गांव से दूर भगाने के लिए पहरा दे रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, गुरुवार देर रात शिशु हाथी समेत करीब 12 हाथियों का झुंड डामुका साई टोला पहुंचा। हाथियों ने ग्रामीण गोरखा लागुरी के घर पर हमला कर दिया और मकान को काफी नुकसान पहुंचाया। हाथियों ने घर में रखा अनाज भी खा लिया। इसके बाद शुक्रवार रात हाथियों का वही झुंड दोबारा गांव में लौट आया और गोरखा लागुरी के मकान को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। घर में बचा करीब पांच क्विंटल धान भी हाथियों ने खा लिया।

गोरखा लागुरी ने बताया कि घटना के समय उनका पांच सदस्यीय परिवार घर के अंदर सो रहा था। अचानक हाथियों की चिंघाड़ सुनकर परिवार के सभी सदस्य घबरा गए और किसी तरह अपनी जान बचाकर घर से बाहर निकल गए। ग्रामीणों के अनुसार, हाथियों ने रात में कई बार वापस आकर घर को नुकसान पहुंचाया। इससे गांव के लोगों में भय और चिंता का माहौल बना हुआ है।

ग्रामीणों ने बताया कि हाथियों को भगाने के लिए वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची थी। टीम ने पटाखे और मशालों की मदद से हाथियों को आबादी क्षेत्र से दूर करने का प्रयास किया, लेकिन हाथियों का झुंड काफी देर तक वहीं डटा रहा। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार हाथियों के आने से उनकी सुरक्षा को लेकर खतरा बढ़ गया है।

हाथियों ने केवल मकान को ही नुकसान नहीं पहुंचाया, बल्कि आसपास के खेतों में लगी फसलों को भी बर्बाद कर दिया है। ग्रामीणों के अनुसार, हाथियों के झुंड ने सैकड़ों एकड़ खेतों में लगी फसल को रौंद दिया, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। प्रभावित किसानों ने प्रशासन और वन विभाग से उचित मुआवजे की मांग की है।

नोवामुंडी वन प्रक्षेत्र के फोरेस्टर आलोक कुमार महतो ने बताया कि गोरखा लागुरी के क्षतिग्रस्त मकान के लिए करीब दो लाख रुपये मुआवजे की अनुशंसा की जाएगी। इसके अलावा घर में रखे धान के नुकसान का भी आकलन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि फसल नुकसान को लेकर भी किसानों से आवेदन लिए जा रहे हैं। आवेदन मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर जाकर जांच करेगी और रिपोर्ट जिला कार्यालय को भेजी जाएगी।

वन विभाग की ओर से हाथियों को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर रखने के लिए विशेष निगरानी शुरू कर दी गई है। प्रभावित इलाकों में शाम के समय वन विभाग की टीम कैंप कर रही है, ताकि हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके और किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों की लगातार बढ़ती आवाजाही से उनकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। खेती पर निर्भर परिवारों को जहां फसल नुकसान की चिंता सता रही है, वहीं बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा भी बड़ी चिंता बनी हुई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से स्थायी समाधान निकालने और हाथियों के गांव में प्रवेश को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।

नोवामुंडी क्षेत्र में मानव और वन्यजीव संघर्ष की यह घटना एक बार फिर सामने आई है। विशेषज्ञों के अनुसार, जंगलों में भोजन और आवास की कमी के कारण हाथी अक्सर आबादी वाले क्षेत्रों की ओर पहुंच जाते हैं। ऐसे में वन विभाग और ग्रामीणों के बीच बेहतर तालमेल और समय पर कार्रवाई से इस तरह की घटनाओं को कम किया जा सकता है।

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