झारखंड

गुरुजी की विरासत संभालने चुनावी मैदान में उतरी थीं रूपी सोरेन, 4648 वोटों से मिली थी हार

nidhi
8 Oct 2026 9:28 AM IST
गुरुजी की विरासत संभालने चुनावी मैदान में उतरी थीं रूपी सोरेन, 4648 वोटों से मिली थी हार
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1999 का ऐतिहासिक चुनाव
रांची: झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की पत्नी तथा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन का राजनीतिक जीवन भले ही सीमित रहा हो, लेकिन झारखंड आंदोलन और सोरेन परिवार की राजनीतिक यात्रा में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। रूपी सोरेन ने वर्ष 1999 में अविभाजित बिहार की दुमका लोकसभा सीट से चुनाव लड़कर सक्रिय राजनीति में कदम रखा था। इस चुनाव में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता बाबूलाल मरांडी को कड़ी टक्कर दी थी। हालांकि, महज 4,648 मतों के अंतर से उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
रूपी सोरेन का बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को रांची के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। उनके निधन के बाद झारखंड की राजनीति में उनकी भूमिका और संघर्षों को याद किया जा रहा है। वह लंबे समय तक शिबू सोरेन के सामाजिक और राजनीतिक जीवन में सहयोगी रहीं। झारखंड राज्य के गठन से पहले शिबू सोरेन आदिवासी अधिकारों, जल, जंगल और जमीन की लड़ाई को लेकर सक्रिय थे। इस दौरान वह लगातार राजनीतिक आंदोलनों और जनसभाओं में व्यस्त रहते थे। ऐसे समय में रूपी सोरेन ने परिवार की जिम्मेदारियां संभालने के साथ उनके राजनीतिक संघर्षों में भी सहयोग दिया।
वर्ष 1990 के दशक के अंतिम वर्षों में झारखंड मुक्ति मोर्चा कई राजनीतिक चुनौतियों से गुजर रहा था। शिबू सोरेन के कानूनी विवादों में घिरने के दौरान रूपी सोरेन ने परिवार और पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने में भूमिका निभाई। इसी दौर में उनका नाम सक्रिय चुनावी राजनीति में सामने आया।
1999 में दुमका से लड़ा था लोकसभा चुनाव
वर्ष 1998 के लोकसभा चुनाव में शिबू सोरेन को भाजपा उम्मीदवार बाबूलाल मरांडी से हार मिली थी। इसके बाद शिबू सोरेन राज्यसभा के सदस्य बने। वर्ष 1999 के लोकसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा ने उनकी पत्नी रूपी सोरेन किस्कू को दुमका सीट से उम्मीदवार बनाया। उस समय दुमका लोकसभा क्षेत्र अविभाजित बिहार का हिस्सा था। इस सीट पर भाजपा ने एक बार फिर बाबूलाल मरांडी को चुनाव मैदान में उतारा। दोनों उम्मीदवारों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली।
निर्वाचन आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बाबूलाल मरांडी को 2,01,141 वोट मिले थे, जबकि रूपी सोरेन को 1,96,493 मत प्राप्त हुए थे। मरांडी ने 4,648 मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी। भाजपा उम्मीदवार को 36.87 प्रतिशत और झामुमो उम्मीदवार को 36.02 प्रतिशत वोट मिले थे।
परिवार और राजनीतिक आंदोलन में निभाई भूमिका
रूपी सोरेन ने अपने परिवार की जिम्मेदारियों को प्राथमिकता दी। उनके बेटे हेमंत सोरेन झारखंड के मुख्यमंत्री हैं, जबकि छोटे बेटे बसंत सोरेन दुमका से विधायक हैं। उनकी बेटी अंजनी सोरेन भी झामुमो की राजनीति से जुड़ी रही हैं।
शिबू सोरेन के आंदोलनों और राजनीतिक व्यस्तताओं के बीच रूपी सोरेन ने बच्चों की परवरिश तथा पारिवारिक जिम्मेदारियां निभाईं। इसके साथ ही वह कठिन राजनीतिक परिस्थितियों में परिवार और पार्टी के साथ खड़ी रहीं। वर्ष 1999 का दुमका लोकसभा चुनाव रूपी सोरेन के जीवन का महत्वपूर्ण राजनीतिक अध्याय रहा। हालांकि वह चुनाव जीत नहीं सकीं, लेकिन बेहद कम मतों के अंतर से मिली हार ने उस दौर में उनकी चुनावी मौजूदगी को दर्ज कराया। झारखंड की राजनीति में रूपी सोरेन को शिबू सोरेन के संघर्षों की सहयोगी और सोरेन परिवार की महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में याद किया जाता है।
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