
Ranchi रांची : राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर एमबीबीएस में नामांकन के लगातार सामने आए मामलों के बाद प्रबंधन ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। अब नए शैक्षणिक सत्र 2025-26 में नामांकित सभी एमबीबीएस छात्रों के जाति एवं आवासीय प्रमाणपत्रों का विस्तृत सत्यापन कराया जा रहा है।
रिम्स प्रशासन ने सभी छात्रों के दस्तावेजों को संबंधित जिलों के जिला प्रशासन को जांच के लिए भेज दिया है। जिला स्तर पर इन प्रमाणपत्रों की सत्यता की जांच की जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी भी छात्र ने गलत या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रवेश नहीं लिया है।
प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि सत्यापन प्रक्रिया में यदि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित छात्र का नामांकन तुरंत रद्द कर दिया जाएगा। साथ ही नियमों के अनुसार आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई भी की जाएगी।
रिम्स प्रशासन का कहना है कि यह कदम मेडिकल शिक्षा में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है। संस्थान ने हाल के वर्षों में फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए प्रवेश लेने के कई मामले सामने आने के बाद यह सख्त नीति अपनाई है।
वर्ष 2025-26 शैक्षणिक सत्र में एमबीबीएस की कुल 180 सीटों पर नामांकन हुआ है। इन सभी छात्रों के दस्तावेज अब जांच के दायरे में हैं। प्रशासन का मानना है कि इस प्रक्रिया से प्रवेश प्रणाली और अधिक मजबूत होगी तथा फर्जीवाड़े पर प्रभावी रोक लगेगी।
रिम्स प्रबंधन के अनुसार, मेडिकल सीटों पर प्रवेश एक अत्यंत जिम्मेदारी वाला प्रक्रिया है, जिसमें पारदर्शिता और नियमों का पालन सर्वोपरि होना चाहिए। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रवेश न केवल संस्थान की साख को प्रभावित करता है, बल्कि योग्य छात्रों के अवसरों को भी नुकसान पहुंचाता है।
इस कदम से यह भी उम्मीद जताई जा रही है कि भविष्य में छात्र प्रवेश के समय किसी भी प्रकार की गलत जानकारी देने से बचेंगे, क्योंकि अब हर दस्तावेज की स्वतंत्र जांच की जाएगी। जिला प्रशासन की रिपोर्ट को अंतिम माना जाएगा और उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
रिम्स ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सत्यापन प्रक्रिया को समयबद्ध और निष्पक्ष तरीके से पूरा किया जाए, ताकि शैक्षणिक सत्र पर कोई असर न पड़े। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि वास्तविक और योग्य छात्रों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
संस्थान के इस फैसले को मेडिकल शिक्षा में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल प्रवेश प्रक्रिया की पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि संस्थान की विश्वसनीयता भी मजबूत होगी।
फिलहाल सभी छात्रों के दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और आने वाले समय में इसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।





