
चाईबासा : झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के झींकपानी स्थित एसीसी अडानी सीमेंट कंपनी को 16 अगस्त 2026 से बंद किए जाने की प्रस्तावित कार्रवाई के विरोध में मजदूरों, ग्रामीणों और स्थानीय दुकानदारों ने मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार से कंपनी गेट के बाहर बड़ी संख्या में लोगों ने धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कंपनी बंद होने की स्थिति में हजारों लोगों की आजीविका प्रभावित होगी। उन्होंने कंपनी प्रबंधन पर आरोप लगाया कि स्थायी रोजगार व्यवस्था को खत्म कर आउटसोर्सिंग और मशीनीकरण के जरिए संचालन की तैयारी की जा रही है।
धरना प्रदर्शन में शामिल मजदूरों और ग्रामीणों ने कंपनी प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए रोजगार सुरक्षा और कर्मचारियों के अधिकारों की मांग की। उनका कहना है कि कंपनी से जुड़े हजारों परिवार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अपनी आजीविका चलाते हैं। ऐसे में प्लांट बंद होने का असर पूरे क्षेत्र पर पड़ेगा।
झारखंड जेनरल कामगार यूनियन के केंद्रीय अध्यक्ष जॉन मीरां मुंडा ने आरोप लगाया कि कंपनी प्रबंधन एक योजना के तहत सीमेंट वेज बोर्ड व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि स्थायी मजदूरों की जगह ठेका श्रमिकों से काम कराने की तैयारी की जा रही है, जिससे कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं पर असर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि स्थायी कर्मचारियों को वेतन, सामाजिक सुरक्षा, चिकित्सा सुविधा और अन्य कई लाभ मिलते हैं, लेकिन आउटसोर्सिंग व्यवस्था लागू होने से मजदूरों के अधिकार कमजोर हो जाएंगे। उन्होंने प्रबंधन से मजदूर हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कंपनी क्षेत्र के विकास में लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है। प्लांट बंद होने से न केवल कर्मचारी बल्कि आसपास के दुकानदार, छोटे व्यवसायी और स्थानीय लोग भी प्रभावित होंगे।
स्थानीय दुकानदारों ने भी आंदोलन का समर्थन किया है। उनका कहना है कि कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों और यहां आने वाले लोगों की वजह से उनका व्यापार चलता है। यदि कंपनी बंद होती है तो इसका सीधा असर स्थानीय बाजार और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
मजदूर संगठनों ने कहा कि वे किसी भी कीमत पर रोजगार खत्म करने के फैसले को स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने कंपनी प्रबंधन से बातचीत कर समाधान निकालने की मांग की है।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए वे लंबी लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।
बताया जा रहा है कि कंपनी बंद करने के प्रस्ताव के बाद क्षेत्र में पहले से ही चिंता का माहौल बना हुआ है। मजदूरों और स्थानीय लोगों को आशंका है कि इससे रोजगार के अवसर कम हो जाएंगे और क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होंगी।
वहीं, कंपनी प्रबंधन की ओर से इस मामले में अभी तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मजदूर संगठन और स्थानीय लोग अब प्रबंधन के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं।
एसीसी अडानी सीमेंट कंपनी को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब रोजगार और औद्योगिक भविष्य के मुद्दे से जुड़ गया है। आने वाले दिनों में प्रशासन, कंपनी प्रबंधन और मजदूर संगठनों के बीच बातचीत के जरिए ही इस विवाद का समाधान निकलने की उम्मीद है।





