
Jharkhand: पलामू जिले के पड़वा प्रखंड स्थित सिक्का गांव में एक ही परिवार के पांच सदस्यों की रहस्यमयी मौत के मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। इस घटना पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी ने राज्य सरकार, स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इतनी बड़ी त्रासदी के बावजूद सरकार की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी या जवाबदेही तय नहीं की गई है। उनके अनुसार यह केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की विफलता का उदाहरण है।
पूर्व मंत्री ने बताया कि इस परिवार के आठ सदस्यों में से पांच की मौत हो चुकी है, जबकि एक सदस्य अस्पताल में गंभीर स्थिति में भर्ती है। दो सदस्य घटना के समय गांव से बाहर होने के कारण बच गए। उन्होंने कहा कि अगर वे भी गांव में होते तो स्थिति और भयावह हो सकती थी। केएन त्रिपाठी ने सबसे बड़ा सवाल मौत के कारण को सार्वजनिक न किए जाने पर उठाया। उन्होंने कहा कि एमएमसीएच और रिम्स में इलाज के दौरान मौतें हुईं, लेकिन अब तक न तो जिला प्रशासन और न ही स्वास्थ्य विभाग ने कोई आधिकारिक कारण बताया है। इससे गांव में भय और अफवाहों का माहौल बन गया है।
उन्होंने राज्य सरकार से तुरंत मेडिकल बुलेटिन जारी करने की मांग की ताकि लोगों को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सके। साथ ही उन्होंने कहा कि पारदर्शिता के अभाव में ग्रामीण अंधविश्वास और अफवाहों की ओर जा रहे हैं। पूर्व मंत्री ने झारखंड के स्वास्थ्य विभाग की स्थिति पर भी गंभीर टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है और मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने एक मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि ऑक्सीजन की कमी के कारण एक मरीज की जान चली गई।
उन्होंने मांग की कि सिक्का गांव की घटना की जांच के लिए उच्चस्तरीय विशेषज्ञ टीम गठित की जाए, जिसमें चिकित्सक और वैज्ञानिक शामिल हों। साथ ही मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा देने और अस्पताल में भर्ती मरीज के बेहतर इलाज की व्यवस्था करने की मांग भी की गई। केएन त्रिपाठी ने कहा कि जब तक मौतों का वास्तविक कारण सामने नहीं आता, तब तक गांव में डर और असमंजस बना रहेगा। उन्होंने सरकार से इस मामले में तत्काल, पारदर्शी और वैज्ञानिक जांच कराने की अपील की।





