
Jharkhand: पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा प्रखंड में इस साल मानसून की बेरुखी और सरकारी लापरवाही ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लगातार बारिश की कमी के कारण धान की खेती करीब 15 दिन पीछे चल रही है, जिससे पूरे क्षेत्र में सूखे का खतरा मंडराने लगा है। जून का महीना बीत जाने के बावजूद खेती लायक बारिश नहीं हुई, जिससे खेत सूखे पड़े हैं और बुवाई का काम प्रभावित हुआ है।
कृषि विभाग के अनुसार इस वर्ष बहरागोड़ा में 18,062 हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती का लक्ष्य तय किया गया है, लेकिन समय पर बारिश नहीं होने से यह लक्ष्य पूरा करना मुश्किल होता दिख रहा है। जून 2026 में सिर्फ 142.8 एमएम बारिश दर्ज की गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 670 एमएम बारिश हुई थी। यानी इस बार करीब पांच गुना कम बारिश हुई है। हालांकि 1 जुलाई को 84.8 एमएम बारिश के बाद किसानों को थोड़ी राहत मिली, लेकिन स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है।
किसान किसी तरह हल-बैल लेकर खेत तैयार करने में जुटे हैं, लेकिन पानी की कमी बड़ी बाधा बनी हुई है। कई किसान बिचड़ा लगाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन पर्याप्त नमी न होने से काम प्रभावित हो रहा है। यहां के किसान पूरी तरह मानसून पर निर्भर रहते हैं और उनकी आय का मुख्य साधन खेती ही है। इधर, लैंपस में भी बीज और खाद की भारी कमी ने संकट को और बढ़ा दिया है। बहरागोड़ा और पाथरी लैंपस में 22 जून को सिर्फ 126 बैग धान बीज भेजा गया था, जो एक-दो दिन में ही खत्म हो गया। इसके बाद से किसानों को खुले बाजार से महंगे दामों पर बीज खरीदना पड़ रहा है। लगभग 250 क्विंटल बीज की जरूरत वाले इस क्षेत्र में आपूर्ति न होने से किसानों में नाराजगी है।
किसानों का कहना है कि समय पर बीज और खाद नहीं मिलने से उनकी पूरी खेती प्रभावित हो रही है। छोटे और सीमांत किसान सबसे ज्यादा परेशान हैं, जिनके पास बाजार से बीज खरीदने की क्षमता नहीं है। इस मामले पर बहरागोड़ा के प्रभारी कृषि पदाधिकारी संजय कुमार ने स्वीकार किया कि लैंपस में बीज की कमी है और जल्द आपूर्ति के लिए उच्च अधिकारियों से बात की जा रही है। फिलहाल किसान बारिश और सरकारी मदद दोनों का इंतजार कर रहे हैं, ताकि उनकी फसल बचाई जा सके।





